मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान तीन महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार के मामले ने सोमवार को नया मोड़ ले लिया। आरोप लगाने वाली महिला पत्रकारों में से एक रोज़ी को दिल्ली पुलिस ने 17 अन्य लोगों के साथ हिरासत में ले लिया। ये लोग कथित घटना को लेकर एफआईआर दर्ज करने और आरोपी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों के मुताबिक, करीब 17 लोग रविवार रात से पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर डटे हुए थे। इनमें स्वतंत्र पत्रकार, यूट्यूबर और कथित यौन दुर्व्यवहार की शिकायत करने वाली महिला पत्रकार भी शामिल थीं। सोमवार सुबह पुलिस ने इन्हें एक-एक कर हिरासत में लिया और बस से दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन ले गई।

FIR दर्ज कराने की मांग कर रहे थे प्रदर्शनकारी

हिरासत में ली गई पत्रकार का कहना था कि वे पुलिस अधिकारियों से मिलकर अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई की स्थिति जानना चाहती थीं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि आरोपी पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, प्रदर्शनकारी रविवार शाम करीब 6 बजे से पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर मौजूद थे और सोमवार सुबह लगभग 7 बजे उन्हें हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हिरासत के दौरान उनके साथ खराब व्यवहार करने का आरोप लगाया।

CJP का आरोप- हिरासत में लिए गए लोगों के साथ मारपीट

Cockroach Janta Party (CJP) की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि जिस महिला पत्रकार रोज़ी ने ACP विवेक भगत पर कथित यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है, उसे भी 17 अन्य लोगों के साथ हिरासत में लिया गया। रत्ना सिंह के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया है और दो लोगों के साथ कथित तौर पर गंभीर मारपीट की गई। उन्होंने दावा किया कि सभी 18 लोग दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में हिरासत में हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने इन आरोपों से इनकार किया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार अधिकारी ने कहा कि किसी के साथ मारपीट नहीं हुई और हिरासत में लिए जाने के दौरान कुछ लोग पुलिसकर्मियों के बस तक ले जाने का विरोध कर रहे थे। 
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दिल्ली पुलिस का पक्ष- धारा 163 लागू है

दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि प्रदर्शन के दौरान नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू है। पुलिस के अनुसार, इसके तहत बिना पूर्व लिखित अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक रूप से एकत्र होने और प्रदर्शन करने पर रोक थी। DCP नेहा यादव के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को वहां से हटने के लिए कहा गया था, लेकिन उनके हटने से इनकार करने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस का कहना है कि 5 अक्टूबर की हिरासत भी इसी प्रतिबंध के संदर्भ में की गई और हिरासत में लिए गए लोगों को बाद में रिहा किया जायेगा।

तीन महिला पत्रकारों ने लगाए थे पुलिस पर आरोप

यह पूरा विवाद 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर और उसके आसपास हुए प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। आरोप है कि प्रदर्शन को कवर कर रहीं तीन महिला पत्रकारों के साथ पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर यौन दुर्व्यवहार किया।
एक शिकायत में पत्रकार ने आरोप लगाया कि वह महिला प्रदर्शनकारियों की हिरासत को कवर कर रही थीं और वहां महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी नहीं थी। जब उन्होंने इस पर सवाल उठाया तो एक पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर उन्हें धक्का दिया और उनके साथ धक्का-मुक्की की।
एक अन्य पत्रकार ने शिकायत में कहा कि वह अशोका रोड पर प्रदर्शनकारियों की हिरासत की रिकॉर्डिंग कर रही थीं। इसी दौरान उन्होंने अपनी पीठ पर किसी के हाथ का स्पर्श महसूस किया। उनका आरोप था कि पीछे मुड़ने पर एक पुलिस अधिकारी उनके बेहद करीब खड़ा था और आपत्ति जताने पर उसने कथित तौर पर उनकी शिकायत को खारिज कर दिया। कम से कम एक पत्रकार ने सार्वजनिक वीडियो में आरोप लगाया कि ACP विवेक भगत ने उन्हें कथित तौर पर गलत तरीके से छुआ/ग्रोप किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

दिल्ली पुलिस ने शिकायतें क्राइम ब्रांच को भेजीं

विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने 4 अक्टूबर को पहली बार आधिकारिक रूप से इन शिकायतों की पुष्टि की। पुलिस ने कहा कि 3 अक्टूबर को नई दिल्ली इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए।
पुलिस के मुताबिक, नई दिल्ली जिला पुलिस को तीनों शिकायतें मिलीं और उन्हें निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। महिलाओं के बयान भी दर्ज किए गए हैं और घटनास्थल की CCTV फुटेज की जांच की जा रही है। पुलिस ने आम लोगों से भी कहा है कि यदि उनके पास घटना से संबंधित कोई वीडियो है तो उसे जांच एजेंसी को उपलब्ध कराएं।

हिरासत में लेने का सिलसिला जारी है

4 अक्टूबर को दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण भी शामिल थे। इसके बाद भी विरोध प्रदर्शन जारी रहे। 5 अक्टूबर को भी कई पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। Times of India के अनुसार AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पत्रकार रोसी समेत कई प्रदर्शनकारियों को दिल्ली कैंट थाने में रखा गया है।