दिल्ली पुलिस ने एक बेहद गोपनीय और रणनीतिक ऑपरेशन के तहत शनिवार (18 जुलाई 2026) सुबह जंतर-मंतर से पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को धरना स्थल से हटा दिया। वांगचुक पिछले 20 दिनों से नीट (NEET) पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले आमरण अनशन पर बैठे थे।
दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। इस पूरी कार्रवाई को बेहद नाटकीय और योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया, ताकि किसी को भनक तक न लग सके।

सुबह 3 बजे 'मॉक ड्रिल' का बहाना

सूत्रों के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 3 बजे यानी वांगचुक को हटाने से करीब चार घंटे पहले नई दिल्ली जिले के सभी पुलिसकर्मियों को जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने के लिए कहा गया। उन्हें बताया गया कि संसद के मानसून सत्र से पहले यह एक 'मॉक ड्रिल' है। इसके बाद इन पुलिसकर्मियों को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया, जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें असली प्लान बताया। पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया गया कि वांगचुक को जंतर-मंतर से मात्र "30 सेकंड" के भीतर वहां से हटाना है।
ताज़ा ख़बरें

फोन जैमर और सफेद पर्दे का हुआ इस्तेमाल

रणनीति के तहत, पुलिस ने कार्रवाई से ठीक कुछ मिनट पहले पूरे इलाके में एक फोन जैमर लगा दिया ताकि प्रदर्शनकारी और वहां मौजूद लोग बाहरी दुनिया या सोशल मीडिया से संपर्क न कर सकें। इसके बाद सुबह करीब 6:30 बजे पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन में मुख्य मंच के आगे एक बड़ा सफेद पर्दा लगा दिया। पर्दे के पीछे क्या चल रहा है, यह कोई देख पाता, उससे पहले ही पुलिस ने वांगचुक को वहां से सुरक्षित निकाल लिया।

टाइमिंग का रखा खास ख्याल

पुलिस ने इस ऑपरेशन के लिए समय का चुनाव बहुत सोच-समझकर किया था। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के सदस्यों की दिनचर्या पर नजर रखी हुई थी। उन्हें पता चला कि सुबह के समय एक छोटा सा विंडो मिलता है जब पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके कुछ मिनटों के लिए पास के वाशरूम जाते हैं। पुलिस ने ठीक उसी वक्त का फायदा उठाया जब दिपके मंच पर मौजूद नहीं थे और वांगचुक को वहां से उठा लिया।

नए पुलिस कमिश्नर की पहली बड़ी कार्रवाई

दिलचस्प बात यह है कि यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा को अचानक पद से हटाकर अनुराग कुमार को नया कमिश्नर नियुक्त करने के ठीक एक दिन बाद हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, गोलचा को हटाए जाने का संबंध जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन से ही जुड़ा था। पद संभालते ही नए कमिश्नर अनुराग कुमार ने सभी स्पेशल कमिश्नरों के साथ बैठक की और वांगचुक को हटाने का यह पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों का पक्ष

  • न्यू दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने बताया कि यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन और डॉक्टरों की सलाह पर की गई है, क्योंकि भूख हड़ताल के कारण वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही थी। पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बाधा डालने की कोशिश की जिससे हल्की नोकझोंक हुई, लेकिन पुलिस ने संयम से काम लिया। पुलिस ने अब बाकी प्रदर्शनकारियों से भी जंतर-मंतर खाली करने की अपील की है।

  • प्रदर्शनकारी और परिवार: वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने कहा कि कल तक वह पूरी तरह ठीक थे और उन्हें अस्पताल ले जाने की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को चेतावनी दी है कि उनकी या उनके डॉक्टर की सहमति के बिना वांगचुक को कोई दवा या इलाज न दिया जाए। वहीं सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें हिरासत में ले लिया।

अभिजीत दिपके ने शुरू किया आमरण अनशन

सोनम वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में ले जाए जाने के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने उनके समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (Indefinite Hunger Strike) पर बैठने का ऐलान कर दिया है। CJP ने बताया, "अभिजीत दिपके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। 20 जुलाई को होने वाला ‘चलो संसद’ मार्च तय योजना के अनुसार ही होगा।" इससे पहले शनिवार सुबह दिपके ने यह भी दावा किया कि उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें हिरासत में लिया गया, हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस दावे को खारिज कर दिया।