दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी ने सख्त टिप्पणी की है। राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज़ फूफा’ टिप्पणी पर विपक्ष और CJP ने भी पीएम मोदी को घेरा।
राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी
दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी भवन गिरने से हुई छात्रों की मौत के बाद केंद्र और दिल्ली की भाजपा सरकार विपक्ष के निशाने पर है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार पर हादसों से पहले रोकथाम के उपाय नहीं करने और हादसे के बाद दिखावटी सक्रियता दिखाने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी की ओर से युवाओं और विपक्ष के लिए इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज़ फूफा’ जैसे शब्दों को लेकर कांग्रेस और CJP ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी का हमला
दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास एक बहुमंजिला पीजी इमारत रविवार को मरम्मत के दौरान ढह गई। हादसे में सात लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। इमारत में लड़कों के लिए पेइंग गेस्ट सुविधा चल रही थी। राहत और बचाव अभियान में दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियां शामिल रहीं। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का एक तय पैटर्न बन गया है—हादसे से पहले कोई प्रभावी रोकथाम नहीं, और हादसा होने के बाद बड़े-बड़े दावे तथा दिखावटी सक्रियता।राहुल ने कहा कि हादसों के लिए कुछ निचले स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराकर वास्तविक जिम्मेदार लोगों को जवाबदेही से बचने दिया जाता है। उन्होंने सत्य निकेतन की घटना को कोई अकेली घटना मानने से इनकार किया और दिल्ली के सैदुलाजाब में हुई मौतों तथा हौज रानी में लगी आग जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब बार-बार लोगों की जिंदगी, सपने और आकांक्षाएं मलबे के नीचे दब रही हैं तो वास्तविक कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती। उन्होंने दिल्ली की शासन व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राजधानी में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार होने के बावजूद ऐसी घटनाओं को रोकने में प्रशासन असहाय क्यों दिखाई देता है।
‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज़ फूफा’ पर भी राहुल का निशाना
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर उन लोगों को बदनाम करने का आरोप भी लगाया जो सरकार से सवाल पूछते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज़ फूफा’ जैसे लेबल का इस्तेमाल करके आलोचकों को शर्मिंदा और चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल के मुताबिक, सरकार को सार्वजनिक सुरक्षा और शासन के वास्तविक सवालों का जवाब देना चाहिए।
यह मुद्दा प्रधानमंत्री मोदी के 5 सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में दिए भाषण के बाद और गरमा गया।
मोदी के ‘होम्योपैथिक पिल’ वाले बयान पर CJP का पलटवार
SRCC में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का फिर जिक्र किया। उन्होंने अपने उस बयान को ‘होम्योपैथिक गोली’ से जोड़ते हुए कहा कि होम्योपैथी के सिद्धांत के अनुसार उपचार शुरू होने पर बीमारी पहले कुछ समय के लिए बढ़ती हुई दिखाई दे सकती है। मोदी ने इसी संदर्भ में कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ वाली उनकी टिप्पणी के बाद ऐसे लोग एक-एक करके सामने आने लगे।CJP के सौरव दास ने कड़ी आपत्ति जताई
प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी पर CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को, जो सवाल पूछ रही है, किसी राजनीतिक लेबल से चिन्हित करना प्रधानमंत्री की ओर से किए जाने वाले सबसे शर्मनाक कामों में से एक है। दास के मुताबिक प्रधानमंत्री के पास SRCC में युवाओं से सीधे संवाद करने का मौका था। उन्हें छात्रों की वास्तविक समस्याओं शिक्षा, रोजगार, बुनियादी ढांचे, अकादमिक दबाव और शिक्षकों की शिकायतों पर बात करनी चाहिए थी।CJP नेता ने दावा किया कि देश में बड़ी संख्या में स्कूल बंद हुए हैं और बड़ी संख्या में युवा रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण की समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने शिक्षा बजट में कथित कमी को भी सवालों के घेरे में रखा। दास ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं का काम सत्ता से सवाल पूछना है और प्रधानमंत्री को उन्हें उम्मीद देनी चाहिए, न कि ऐसे लेबल लगाने चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री पर एक पूरी पीढ़ी को ‘देमोनाइज’ करने का आरोप लगाया।
खड़गे बोले- हर साल विपक्ष के लिए नया विशेषण
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी प्रधानमंत्री के SRCC भाषण पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के पास युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य पर संवाद करने का अवसर था, लेकिन भाषण एक और राजनीतिक अभियान में बदल गया। खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार लोकतंत्र में उठने वाले सवालों को दबाने के लिए विपक्ष को हर साल एक नया विशेषण देती है। उन्होंने ‘नाराज़ फूफा’, ‘दिमागी नक्सल’, ‘अर्बन नक्सल’, ‘खान मार्केट गैंग’, ‘आंदोलनजीवी’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्दों का उल्लेख किया।खड़गे ने कहा कि विशेषण भले बदलते रहें, लेकिन उनके मुताबिक मोदी सरकार की ‘जनविरोधी नीतियां’ नहीं बदलतीं। उन्होंने युवाओं की समस्याओं में बेरोजगारी, वर्षों से अटकी सरकारी नौकरियां, पेपर लीक, महंगी होती शिक्षा, कम होते छात्रवृत्ति के अवसर और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर बढ़ते दबाव को गिनाया।
मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि 12 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद भी मोदी के पास देश के युवाओं के लिए कोई प्रेरणादायक विजन या सकारात्मक संदेश नहीं है और इसलिए वे विपक्ष को नामों से पुकारने का सहारा ले रहे हैं।