राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि CBSE परीक्षा परिणाम में भयंकर हेर-फेर हो गई और पूछा कि शिक्षा मंत्री मेरे सवालों का जवाब क्यों नहीं दे पा रहे हैं? शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जिम्मेदारी लेते हुए छात्रों को भरोसा दिया कि गड़बड़ी पर कोई बख्शा नहीं जाएगा।
धर्मेंद्र प्रधान और राहुल गांधी
सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी OSM व्यवस्था में गड़बड़ी पर राहुल गांधी के बड़े हमले के बाद पहली बार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 'गड़बड़ी' मानी है। उन्होंने कहा कि वे पूरी जिम्मेदारी लेते हैं और अगर मूल्यांकन में कोई गड़बड़ी पाई गई तो कोई भी नहीं बचेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा, 'मैं जिम्मेदारी लेता हूं। इसे ठीक किया जाएगा, समाधान निकाला जाएगा। हम सब इस काम पर लगे हुए हैं।' हालाँकि, उन्होंने यह साफ़ नहीं किया है कि यह ज़िम्मेदारी लेने का क्या मतलब है। क्या यह सिर्फ़ बयान देने के लिए है या फिर उनको इस प्रक्रिया से अलग करने जैसी कार्रवाई भी होगी?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान तब आया है जब एक दिन पहले राहुल गांधी ने कहा है कि CBSE परीक्षा परिणाम में भयंकर हेर-फेर हो गई जिससे देश के लाखों बच्चे और उनके माता-पिता सदमे में हैं। उन्होंने कहा था, 'और मोदी जी? हमेशा की तरह - न जवाब, न ज़िम्मेदारी, न शर्म।' राहुल ने कहा, 'जिस कंपनी COEMPT को यह ज़िम्मेदारी मिली, वह पहले Globarena के नाम से तेलंगाना में 2019 में यही कारनामे कर चुकी है।' कुछ ज़रूरी सवाल हैं, 'COEMPT को सीबीएसई का ठेका क्यों और किसके कहने पर दिया गया? कौन-कौन से नियम और प्रक्रिया दरकिनार करके इस कंपनी को ये ठेका दिया गया? COEMPT पहले Globarena के नाम से विवादों में घिर चुकी है, ये सीबीएसई को क्यों नहीं पता चला? बैकग्राउंड चेक क्यों नहीं किए गए? COEMPT प्रबंधन और मोदी सरकार के बीच आखिर क्या संबंध हैं?'
राहुल गांधी के इन आरोपों पर जब सीबीएसई ने Coempt Edutech को कॉन्ट्रैक्ट देने के संबंध में लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया तो राहुल ने शिक्षा मंत्री का नाम लेकर आरोप लगाए। राहुल ने कहा, 'बचना कोई जवाब नहीं है। शिक्षा मंत्री और सीबीएसई मेरे पूछे गए चार सीधे-सादे सवालों का जवाब क्यों नहीं दे पा रहे हैं? 18.5 लाख छात्रों का भविष्य खतरे में डाल दिया गया है। वे सच जानने के हकदार हैं।'
OSM सिस्टम पर क्या हैं आरोप
परीक्षा के नतीजे आने के बाद छात्रों ने OSM सिस्टम की बहुत शिकायतें की हैं। इन समस्याओं से छात्र और उनके माता-पिता काफी परेशान हैं-
- कुछ छात्रों की स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका बदल गई
- स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपियां धुंधली आ रही हैं
- कई जवाब बिना चेक किए रह गए
- पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा है
- पेमेंट करने में दिक्कत हो रही है
- री-इवैल्यूएशन में भारी कन्फ्यूजन है
एक्स पर जलाल जैन नाम के एक यूज़र ने पोस्ट किया है, "मुझे उम्मीद थी कि 12वीं क्लास के Accounts में 90 से ज़्यादा नंबर आएंगे, लेकिन मुझे सिर्फ़ 47 नंबर मिले। जब मैंने अपनी आंसर शीट के लिए अप्लाई किया, तो मुझे पता चला कि वह मेरी थी ही नहीं। एक और छात्र के साथ भी बिल्कुल ऐसी ही गड़बड़ी हुई थी। हेल्पलाइन या ईमेल से कोई जवाब नहीं मिला। अपनी असली आंसर शीट लेने के लिए मुझे खुद सीबीएसई आरओ भोपाल जाना पड़ा। Final Score: 92/100"।
शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
दिल्ली में सीबीएसई अधिकारियों के साथ बैठक के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने OSM व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि यह 'प्रगतिशील' सिस्टम है। दुनिया भर के संस्थान इसे अपना रहे हैं। मंत्री ने बताया, 'इस बार 17 लाख छात्रों ने परीक्षा दी और कुल 98 लाख उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन की गईं। हर उत्तर पुस्तिका में औसतन 40 पेज हैं, यानी कुल 40 करोड़ पेज स्कैन किए गए।' प्रधान ने कहा, 'OSM छात्रों के लिए बनाया गया है। यह पारदर्शी है, ताकि छात्रों को अपने अंकों की सही जानकारी मिल सके।'राहुल गांधी पर पलटवार
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मामले पर सवाल उठाए और जवाबदेही मांगी थी। इसके जवाब में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सीबीएसई ने पहले ही अपना पक्ष साफ़ कर दिया है और पूरा प्रोसेस सरकार के खरीद नियमों के अनुसार हुआ है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, 'वे डिजिटल इंडिया और वैज्ञानिक प्रगति से जुड़ी हर चीज का विरोध करते हैं।' मंत्री ने सभी राजनीतिक नेताओं से अपील की कि वे ऐसे बयान दें जो छात्रों का मानसिक तनाव और बढ़ाएँ नहीं। उन्होंने कहा, 'राजनीति बाद में की जा सकती है। अभी सबसे ज़रूरी है कि छात्रों का तनाव कम हो।'
सीबीएसई का बयान
सीबीएसई ने छात्रों से अनुरोध किया है कि वे घबराएं नहीं। बोर्ड ने स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं देखने की आखिरी तारीख़ बढ़ा दी है और कहा है कि सभी सही शिकायतों की जांच विषय विशेषज्ञ करेंगे।
विवाद क्यों बढ़ा?
ओएसएम सिस्टम को सीबीएसई ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए शुरू किया था, लेकिन इस बार छात्रों को अपनी कॉपियाँ देखने में बहुत दिक्कत हुई। इससे पूरे सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं। यह हाल के वर्षों में सीबीएसई का एक बड़ा विवाद बन गया है।
विवाद बढ़ने और चौतरफ़ा दबाव पड़ने के बाद शिक्षा मंत्री ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे जल्द ठीक करने का भरोसा दिया है। उन्होंने ज़िम्मेदारी तो ली है, लेकिन यह ज़िम्मेदारी सिर्फ़ बयान भर के लिए है या फिर जैसा कि विपक्ष मांग कर रहा है कि शिक्षा मंत्री पर कार्रवाई हो? छात्रों और अभिभावकों की नजर अब इस बात पर है कि सरकार और सीबीएसई इस समस्या का क्या समाधान निकालते हैं।