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पत्रकार की मौत पर पुलिस का रवैया आश्चर्यजनक: एडिटर्स गिल्ड

एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ ज़िले में एक पत्रकार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस के रवैये को आश्चर्यजनक क़रार दिया है। इसने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा है कि प्रतापगढ़ में टीवी पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की रहस्यमयी मौत को लापरवाही बरती जा रही है। इसने कहा है कि सुलभ ने शराब माफिया के ग़लत कामों का भंडाफोड़ किया था और उनको धमकी दी गई थी। उन्होंने इस संबंध में अपनी जान को ख़तरा बताते हुए पुलिस को पत्र भी लिखा था। 

एडिटर्स गिल्ड ने कहा है कि उनकी जान पर ख़तरा होने के बावजूद अधिकारियों ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया और पत्र लिखने के कुछ दिन बाद ही उनकी मौत हो गई। इसने कहा है कि पुलिस अब उनकी बाइक को हैंडपंप से टकराने और हादसे में उनकी मौत होना बता रही है। 

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यह मामला उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एबीपी न्यूज़ और एबीपी गंगा से जुड़े पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव का शव मिलने का है। उस घटना से एक दिन पहले उनके द्वारा उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर जताई गई आशंका मौत के मामले में संदेह पैदा करता है। उन्होंने घटना से एक दिन पहले ही यानी 12 जून को पुलिस को लिखे पत्र में अपनी जान और परिवार की सुरक्षा को लेकर ख़तरे की आशंका जताई थी। सोशल मीडिया पर सुलभ श्रीवास्तव का एक कथित ख़त वायरल हुआ है जो उन्होंने पुलिस को अपनी सुरक्षा के लिए लिखा था। इसमें उन्होंने लिखा है कि 9 जून को उनकी रिपोर्ट से एक शराब माफिया नाराज़ है। उन्होंने तो यहाँ तक लिखा कि जब भी वह घर से निकलते हैं तो लगता है कि उनका कोई पीछा कर रहा है। 

इस बीच कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सुलभ श्रीवास्तव की मौत का मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया है कि शराब माफिया अलीगढ़ से प्रतापगढ़ तक पूरे प्रदेश में मौत का तांडव कर रहे हैं और सरकार चुप है। उन्होंने ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा और सुलभ की मौत के मामले में हत्या की आशंका जताई। 

काफ़ी दबाव के बाद रिपोर्ट है कि पुलिस ने अब अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है। 

एडिटर्स गिल्ड ने कहा है कि सुलभ की मौत ऐसे समय में हुई है जब मीडिया पर केंद्र और राज्य सराकरों से इसके लिए दबाव है कि वह महामारी के मामले में अधिकारियों के नैरेटिव पर चले।

इसने यूएपीए के ग़लत इस्तेमाल का ज़िक्र करते हुए कहा है कि यह चिंताजनक है कि पुलिस और स्थानीय अधिकारी यूएपीए का इस्तेमाल पत्रकारों के ख़िलाफ़ कर रहे हैं। इसमें एडिटर्स गिल्ड ने विनोद दुआ का भी ज़िक्र किया है जिनके ख़िलाफ़ राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को रद्द कर दिया था। एडिटर्स गिल्ड ने यह भी कहा है कि सरकारों की आलोचना करने वाले पत्रकारों और कार्टूनिस्टों को निशाना बनाया जा रहा है।

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सुलभ की मौत के मामले में एफ़आईआर दर्ज किए जाने से पहले प्रतापगढ़ पुलिस ने कहा था, 'श्रीवास्तव मीडिया कवरेज के बाद रविवार रात क़रीब 11 बजे अपनी मोटरसाइकिल पर लौट रहे थे। वह एक ईंट भट्टे के पास अपनी मोटरसाइकिल से गिर गये। कुछ मज़दूरों ने उन्हें सड़क से उठाया और फिर उनके दोस्तों को फोन करने के लिए उनके फोन का इस्तेमाल किया। उन्हें ज़िला अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।'

पुलिस ने यह भी कहा था कि प्रारंभिक जाँच से पता चला है कि श्रीवास्तव की 'बाइक सड़क के किनारे एक हैंडपंप से टकराने के बाद गिर गई।' हालाँकि इसके साथ पुलिस ने यह भी कहा है कि वे मामले में अन्य कोणों से भी जाँच कर रहे हैं।

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क़मर वहीद नक़वी
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