शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी का आंदोलन और नेता विपक्ष राहुल गांधी की शनिवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस मोदी सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब रही। आखिरकार दोपहर 2.18 बजे धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर दिया।  
बातचीत के तीसरे दौर से पहले, CJP नेताओं ने कहा कि प्रधान का इस्तीफ़ा "बिना किसी समझौते" वाली बात है। कुछ घंटों बाद, प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट में अपने इस्तीफ़े का ऐलान किया। यह एक रेयर मामला है जिसमें मोदी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने लगातार हो रहे सड़क पर विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव के बीच पद छोड़ दिया है। हालांकि मोदी सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कभी कहा था कि हमारी सरकार में इस्तीफे नहीं होते। यह तथ्य सत्य भी है। पहली बार किसी आंदोलन के दबाव में किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ है।

प्रधान ने इस्तीफे में क्या कहा

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में लंबी चौड़ी सफाई नीट पेपर लीक को लेकर पेश की है और जो कदम उठाए गए, उसके बारे में जानकारी दी। लेकिन अंत में उन्होंने वही लाइन लिखी जिसका जिक्र बीजेपी और आरएसएस अक्सर करते हैं। उन्होंने कहा कि देश में युवा आंदोलनरत हैं। इन हालात का कहीं देशविरोधी ताकतें फायदा न उठा लें, इसलिए मैं इस्तीफा दे रहा हूं।
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सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके की पहली प्रतिक्रिया

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है। और यह इस्तीफ़ा इस बात का सबूत है कि अगर आप लोग डरते नहीं हैं, अगर आप लोग इस सरकार के सामने झुकते नहीं हैं, तो हम किसी का भी इस्तीफ़ा ले सकते हैं।"

हम यहां से ऐसे नहीं जाने वालेः सीजेपी

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपक ने इस घटनाक्रम के बाद एक और ट्वीट किया है। दिपके ने लिखा है- यह लोकतंत्र है। उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है। हमारी दो और मांगें हैं। हम ऐसे ही नहीं जाएंगे। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है। लेकिन जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा मिलना चाहिए। उन्हें यह मिलना चाहिए। उन सभी परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा।
और दूसरी बात, 20 तारीख को जिन पुलिस वालों ने गुंडों जैसा बर्ताव किया, उन पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए। 
याद रखिए, कॉकरोच से पंगा मत लीजिए। अंत में उन्होंने अपना नाम लिखा है।

सरकार के साथ बातचीत के लिए जा रहे हैं सीजेपी नेता

सरकार के साथ बातचीत के अगले दौर पर, कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा- "हमें दोपहर 3:30 बजे बुलाया गया है। जब तक हमारी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं और वे उन्हें लिखित रूप में नहीं देते, तब तक हम कहीं नहीं जा रहे हैं। यह एक बड़ी जीत है।"

कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा- "अगर आप हमारी तीन मांगें लिखित रूप में मान लेते हैं, तो हम घर चले जाएंगे। हमने देश भर में शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकालने की अनुमति मांगी है। सभी को शाम 6:00 बजे देश भर में कैंडल मार्च निकालना चाहिए।"

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मूल पाठ

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में जो  लिखा है, उसका मूल पाठ यहां दिया जा रहा है-                                                                          पिछले चार दशकों से अधिक समय से मैंने स्वयं को छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के उद्देश्य के लिए समर्पित किया है। मेरा हमेशा यह विश्वास रहा है कि एक सुदृढ़, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही एक मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होती है।
मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूँ। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हमारे राजनीतिक और सामाजिक जीवन की नैतिक प्रतिबद्धता रहा है। माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का अवसर प्रदान करने के लिए मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
उन्होंने आगे लिखा है- हालाँकि, 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा के संबंध में अनियमितताएँ सामने आईं। इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए भारत सरकार ने जाँच सीबीआई को सौंप दी, परीक्षा रद्द कर दी और पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की। साथ ही यह निर्णय भी लिया गया कि अगले वर्ष से यह परीक्षा सीबीटी (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) मोड में आयोजित की जाएगी। इस पूरे समय हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों के लिए परीक्षा का सुचारु संचालन सुनिश्चित करना रही। भारत सरकार, राज्य सरकारों और सबसे महत्वपूर्ण जिला प्रशासन के सहयोग से 'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' (Whole-of-Government) दृष्टिकोण अपनाकर यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। छात्रों और उनके अभिभावकों के सहयोग से 21 जून 2026 को परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई। पहले दिन से ही मैंने इस पूरे प्रकरण की पूर्ण जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटा। मेरा दृढ़ संकल्प था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य तथाकथित 'परीक्षा माफिया' के कारण बर्बाद न हो और किसी भी छात्र के साथ अन्याय न होने पाए। 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे। विशेष रूप से आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों से आने वाले अनेक मेधावी छात्रों ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। लेकिन इस दौरान भी कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने और परीक्षा प्रक्रिया में बाधाएँ उत्पन्न करने का प्रयास किया। इस प्रकार की घटनाओं ने मुझे अत्यंत पीड़ा पहुँचाई।

प्रधान के त्यागपत्र की सबसे बात ये है, लिखा है- जंतर-मंतर तथा देशभर में उत्पन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रविरोधी शक्तियों को इसका लाभ उठाने से रोकने, राष्ट्रीय एकता को अक्षुण्ण बनाए रखने, किसी भी भारतीय छात्र के भविष्य को कानूनी जटिलताओं में उलझने से बचाने तथा हमारे बच्चों को अपना समय पढ़ाई और अपने करियर निर्माण में लगाने का अवसर देने के उद्देश्य से मैंने माननीय प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

पूर्व शिक्षा मंत्री ने अंत में लिखा है- मैं माननीय प्रधानमंत्री का उनके मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए हृदय से आभारी हूँ। साथ ही, मंत्रिपरिषद के अपने सभी सम्मानित सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा उन सभी व्यक्तियों का भी धन्यवाद करता हूँ जिनके साथ मुझे कार्य करने का अवसर मिला। राष्ट्र की सेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और मैं जीवनपर्यंत इस उद्देश्य के प्रति समर्पित रहूँगा। भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से मैं भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करता रहूँगा।