हाल ही में, टीएमसी ने दावा किया था कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में फर्जी मतदाताओं की संख्या लाखों में है, जिसे बीजेपी शासित राज्यों से लाकर बसाया गया है। पार्टी ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए आयोग से सख्त कार्रवाई की मांग की थी। इन आरोपों के जवाब में आयोग ने कहा कि वह तकनीकी सुधारों के जरिए इस समस्या का समाधान करेगा।
मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने 27 फरवरी को कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में पार्टी की संगठनात्मक बैठक में बीजेपी पर 2026 के विधानसभा चुनावों की मतदाता सूची में हेरफेर करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि बीजेपी अन्य राज्यों, विशेष रूप से राजस्थान और हरियाणा, से "नकली मतदाताओं" को जोड़कर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
कंपनियों का नाम लियाः ममता बनर्जी ने दो एजेंसियों का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने इन्हें इस काम के लिए नियुक्त किया है। इन एजेंसियों के नाम हैं - एसोसिएशन ऑफ ब्रिलियंट माइंड्स और इंडिया 360। उन्होंने कहा कि ये एजेंसियां "भ्रष्ट ब्लॉक स्तरीय रिटर्निंग अधिकारियों" और डेटा एंट्री ऑपरेटरों के साथ मिलकर दिल्ली से निर्देशित होकर यह काम कर रही हैं।
कांग्रेस ने ईसीआई से 2009 से 2024 के बीच हरियाणा और महाराष्ट्र में हुए चुनावों की मतदाता सूची मांगी। लेकिन आयोग ने आनाकानी की। मामला अदालत में पहुंचा। अदालत में आयोग ने कहा कि वो तीन महीने में तय करेगा कि यह मतदाता सूची दी जाए या नहीं। हालांकि आयोग के पास यह मतदाता सूची हर समय तैयार रहती है लेकिन इसके बावजूद आयोग बहाने बना रहा है। हरियाणा और महाराष्ट्र की मतदाता सूचियों में गड़बड़ी की काफी शिकायतें चुनाव के दौरान आई थीं। लेकिन आयोग ने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया।