इसी आधार पर तुलना कर कहा जा रहा है कि जब बेल्जियम में ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन क़रीब 160 रुपये की पड़ रही है तो भारत सरकार को 200 रुपये की क्यों पड़ रही है। कहा तो यह जा रहा है कि क़ायदे से बेल्जियम में इसकी क़ीमत भारत से ज़्यादा होनी चाहिए थी।
सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा सरकार को 200 रुपये में दी जाने वाली वैक्सीन की क़ीमत खुले बाज़ार में 1000 रुपये रखने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।