नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर धरना देने के कुछ घंटों बाद, दिल्ली पुलिस पीड़ित छात्र साहिल लोचव की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने को तैयार हो गई है। साहिल उन 10 लोगों में शामिल है, जिसे 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से चोटें आईं थीं। इस मामले में राहुल गांधी के धरने के बावजूद पुलिस एफआईआर को तैयार नहीं हो रही थी। लेकिन जब संसद मार्ग पुलिस के आसपास भीड़ जुटने लगी तो पुलिस ने आखिरकार घुटने टेक दिये और राहुल गांधी को भरोसा दिया कि वो इस मामले में पीड़ित की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करेगी।
  • यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। क्योंकि इससे पहले संसद में, सुप्रीम कोर्ट में, मीडिया से बातचीत में मोदी सरकार के मंत्रियों ने जंतर मंतर की घटनाओं को इस तरह पेश किया था कि जैसे वहां कुछ हुआ ही नहीं है। पैलेट गन पर एफआईआर दर्ज होने के बाद इस केस की कानूनी वैधता बढ़ जाएगी। अभी कम से कम नौ लोग और हैं, जो पैलेट गन से घायल हुए हैं। पुलिस को सभी की एफआईआर दर्ज करना पड़ेगी, वरना मामला अदालत में जाएगा।
  • संसद मार्ग थाने पर धरना शुरू करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, वो यहां से जाने वाले हैं। हालांकि बीजेपी ने धरना देने के लिए उन पर अपाजकता फैलाने का आरोप लगाया है। 

मोदी सरकार के पास कोई रास्ता नहीं था

पैलेट गन मामले जितना उछल रहा है, मोदी सरकार की उतनी बदनामी और किरकिरी हो रही है। 14 अगस्त को साहिल लोचव अपने वकीलों के साथ दिल्ली पुलिस के संसद मार्ग थाने में गए और लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत ले ली गई लेकिन यह नहीं बताया कि कौन जांच अधिकारी होगा, साहिल किससे मिलेंगे। दिल्ली पुलिस ने उन्हें जांच अधिकारी का नंबर देने से इनकार कर दिया। 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए भी दोबारा संसद मार्ग पुलिस स्टेशन से संपर्क किया गया। फिर भी किसी जांच अधिकारी का नंबर नहीं दिया गया। शिकायत की पुष्टि भी नहीं की गई। तब आज 21 अगस्त को राहुल गांधी पीड़ित साहिल लोचव के साथ थाने पहुंच गए और मामले पर जोर दिया। पुलिस अधिकारी एफआईआर दर्ज करने को तैयार नहीं हुए। राहुल गांधी ने मीडिया को बताया कि पुलिस अधिकारियों ने अपने ऊपर के लोगों का हवाला देते हुए एफआईआर दर्ज करने में असमर्थता जताई। चूंकि यह एक संज्ञेय अपराध है, इसलिए एफआईआर त दर्ज होनी ही चाहिए थी, लेकिन दिल्ली पुलिस ने तभी किया जब नेता विपक्ष ने पूरी तरह दबाव बना दिया।

बीजेपी ने राहुल गांधी पर चौतरफा हमला बोला

राहुल गांधी के धरना देते ही बीजेपी नेता सक्रिय हो गए। बीजेपी सांसद और पूर्व मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फौरन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुला ली। प्रसाद ने कहा कि इस घटना के संबंध में एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है और मामले की जांच चल रही है। उनका कहना था कि जब पुलिस पहले से मामले की जांच कर रही है तो राहुल गांधी के धरने का औचित्य क्या है।
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रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि इस मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक हाई-पावर्ड कमेटी गठित की है। उनके मुताबिक, इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश कर रहे हैं और इसमें दो अन्य न्यायाधीशों, पूर्व सीबीआई निदेशक तथा एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी को शामिल किया गया है। ऐसे में पैलेट गन से गोली चली थी या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
बीजेपी नेता ने सवाल उठाया कि जब न्यायिक प्रक्रिया और जांच की व्यवस्था मौजूद है तो राहुल गांधी पुलिस थाने के बाहर धरना देकर किस तरह का संदेश देना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना अनुमति या पूर्व सूचना के पुलिस थाने के बाहर धरना देना कानून के शासन का सम्मान नहीं है और इसे ‘‘अराजकता की राजनीति’’ कहा।
रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या विपक्ष के नेता को कानून और संस्थाओं का सम्मान नहीं करना चाहिए। बीजेपी ने कांग्रेस के प्रदर्शन को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया।
केंद्रीय मंत्री जेप नड्डा ने प्रदर्शन के पीछे के इरादे पर सवाल उठाते हुए इसे न्याय मांगने या छात्रों का प्रतिनिधित्व करने के वास्तविक प्रयास के बजाय राजनीतिक हताशा और फोटो खिंचवाने की रणनीति बताया। उन्होंने विपक्षी नेताओं की खुले निमंत्रण के बावजूद प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर संसदीय बहसों से बचने के लिए आलोचना की और आरोप लगाया कि राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान से जुड़े विवादों से ध्यान हटाने के लिए सार्वजनिक प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। राहुल गांधी के प्रदर्शन के खिलाफ बोलने वालों में बीजेपी नेता स्मृति ईरानी भी हैं।  

कांग्रेस का BJP पर जवाबी हमला

कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि बीजेपी को यह बताना चाहिए कि 20 जुलाई के प्रदर्शन में कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ या नहीं और यदि हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है। कांग्रेस का तर्क है कि एफआईआर दर्ज करना किसी राजनीतिक दल की मांग भर नहीं है, बल्कि किसी कथित आपराधिक घटना की जांच शुरू करने की बुनियादी प्रक्रिया है। पार्टी ने बीजेपी पर जवाबदेही से बचने और मूल मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए दूसरे राजनीतिक मुद्दे उठाने का आरोप लगाया। जयराम रमेश और दूसरे कांग्रेस नेताओं ने इसी वजह से धरने के दौरान बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उनकी मांग सीमित और स्पष्ट है। हालांकि अब एफआईआर दर्ज हो चुकी है।

राहुल गांधी ने पैलेट गन से घायल युवक को साथ लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। फाइल फोटो

पैलेट गन राष्ट्रीय मुद्दा बना

पैलेट गन विवाद अब सिर्फ पुलिस कार्रवाई की जांच का मामला नहीं रह गया है, बल्कि संसद और सड़क दोनों पर सरकार तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव का विषय बन गया है। राहुल गांधी पहले भी इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला कर चुके हैं और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग करते रहे हैं।
इस तरह एक तरफ कांग्रेस घायल छात्र को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर रही है, वहीं बीजेपी इसे कानून के शासन और संस्थागत प्रक्रियाओं की अनदेखी के रूप में पेश कर रही है। अब पूरे विवाद का केंद्र यह है कि 20 जुलाई को वास्तव में क्या हुआ था, पैलेट गन का इस्तेमाल किस परिस्थिति में हुआ और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है। एफआईआर सिर्फ खानापूरी साबित होगी या फिर साहिल लोचव समेत तमाम पैलेट गन पीड़ितों को इंसाफ मिलेगा।