सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 1 जून, 2026 से कमर्शियल लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की खुदरा कीमतों में संशोधन किया है। हालांकि यह बदलाव कई कमर्शियल श्रेणियों में हुआ है, लेकिन इस रिपोर्ट का मुख्य फोकस फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) की बढ़ती कीमतों पर है, जो सीधे तौर पर छोटे व्यापारियों, प्रवासी मजदूरों और रेहड़ी-पटरी वालों को प्रभावित करता है।
राजधानी दिल्ली में, 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर की कीमत में ₹11 की बढ़ोतरी की गई है, जिससे अब इसकी खुदरा कीमत बढ़कर ₹821.50 हो गई है।

फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) की बड़ी मार

फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) कुकिंग गैस बाजार का वह हिस्सा है जिसे "पॉइंट-ऑफ-सेल" भी कहा जाता है। पारंपरिक घरेलू गैस कनेक्शनों के विपरीत, FTL सिलेंडर कोई भी व्यक्ति बिना किसी स्थानीय पते के प्रमाण (Address Proof) या स्थायी दस्तावेजों के काउंटर से सीधे खरीद सकता है।
₹11 की यह ताजा बढ़ोतरी उन उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालेगी जो पहले से ही पिछले महीने हुई भारी वृद्धि से परेशान हैं। 1 मई, 2026 को तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति में आई कमी का हवाला देते हुए 5 किलो वाले FTL सिलेंडर के दाम में ₹261 की भारी बढ़ोतरी की थी। जून में लगातार दूसरी बार हुए इस संशोधन से छोटे कमर्शियल खरीदारों की लागत और बढ़ गई है।

कमर्शियल एलपीजी का व्यापक संदर्भ

ईंधन की कीमतों में सुधार के तहत बड़े कमर्शियल सिलेंडरों के दाम भी बढ़ाए गए हैं:

  • 19 किलोग्राम कमर्शियल सिलेंडर (दिल्ली): इसकी कीमत में ₹42 की बढ़ोतरी की गई है, जिससे इसकी नई खुदरा कीमत ₹3,113.50 हो गई है।
  • 19 किलोग्राम कमर्शियल सिलेंडर (कोलकाता): यहां कीमतों में ₹53.50 की ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे अब यह ₹3,255.50 में मिलेगा।

आपूर्ति-मांग में अंतर और सुरक्षा निर्देश

घरेलू तेल रिफाइनरियों के रिकॉर्ड स्तर पर काम करने के बावजूद कीमतों पर यह दबाव देखा जा रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पुष्टि की है कि देश में एलपीजी का उत्पादन अब तक के उच्चतम स्तर यानी लगभग 90 हजार मीट्रिक टन (TMT) प्रतिदिन पर पहुंच गया है।
इसके बावजूद, भारत की कुल मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात की जरूरत पड़ती है:
विवरणमात्रा (प्रतिदिन)
कुल घरेलू मांग~72,000 मीट्रिक टन
घरेलू रिफाइनरी उत्पादन50,000 से 52,000 मीट्रिक टन
कमी (जिसे आयात से पूरा किया जाता है)~20,000 से 22,000 मीट्रिक टन


वैश्विक बाजार के झटकों और समुद्री रास्तों में आने वाली रुकावटों से देश को सुरक्षित रखने के लिए, केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को रणनीतिक बफर स्टॉक बनाने के निर्देश दिए हैं। कंपनियों को अब कम से कम 30 दिनों की खपत के बराबर एलपीजी का रिजर्व सुरक्षित रखना होगा।

कालाबाजारी और अवैध इस्तेमाल पर सख्ती

अधिकारियों के अनुसार, ईंधन का स्टॉक सुरक्षित है, लेकिन अचानक थोक बिक्री बढ़ने और कुछ क्षेत्रों में कृषि से जुड़ी मांग में तेजी आने के बाद निगरानी सख्त कर दी गई है। कमर्शियल उपयोगकर्ताओं द्वारा सस्ते घरेलू गैस सिलेंडरों के अवैध इस्तेमाल और जमाखोरी को रोकने के लिए, जांच टीमों ने चार दिनों के भीतर एलपीजी वितरण नेटवर्क पर 6,500 लक्षित छापेमारी की है। इस कार्रवाई में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं और गिरफ्तारियां भी हुई हैं।
हालांकि, इस मुस्तैदी से गैस की किल्लत का अंतर घटकर 4.5 दिन रह गया है, लेकिन 5 किलो वाले FTL सिलेंडरों का उपयोग करने वाले छोटे दुकानदारों और ढाबा संचालकों को इस बढ़े हुए खर्च को तुरंत अपनी जेब से भुगतना होगा।