एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी को लेकर जो बड़ा बड़ा बवाल मचा है उस पर यूनिवर्सिटी ने अपने एक स्टाफ़ को 'बलि का बकरा' बनाकर पीछा छुड़ाने की कोशिश की है? एआई समिट में अपने स्टॉल पर एक चीनी रोबोट डॉग को दिखाकर शर्मसार हुई यूनिवर्सिटी ने एक स्टाफ को 'इल-इनफॉर्म्ड' बताकर उस पर ही जिम्मेदारी डाल दी है। क्या यह एक स्टाफ को 'बलि का बकरा' बनाने जैसा नहीं है?

इस सवाल का जवाब यूनिवर्सिटी के बयान से भी मिलता है। इसने बुधवार को ऑफिशियल प्रेस रिलीज जारी कर माफी मांगी। इसने बयान में कहा, 'हम एआई समिट में हुए कन्फ्यूजन के लिए दिल से माफी मांगते हैं। हमारे पेविलियन पर एक रिप्रेजेंटेटिव गलत जानकारी वाली थी। वह प्रोडक्ट की असली ओरिजिन नहीं जानती थी। कैमरे पर आने के उत्साह में उसने फैक्चुअली गलत जानकारी दी, जबकि उसे प्रेस से बात करने की इजाजत नहीं थी।'

इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने बयान में यह भी कहा है, 'यूनिवर्सिटी का कोई इरादा नहीं था गलत तरीके से इनोवेशन दिखाने का। हम अकादमिक इंटीग्रिटी, ट्रांसपेरेंसी और जिम्मेदारी से काम करते हैं। ऑर्गनाइजर्स की भावनाओं को समझते हुए हमने प्रेमिसिस खाली कर दी है।'

विश्वविद्यालय की सफ़ाई पर ही सवाल

विश्वविद्यालय की यह सफ़ाई तब आई है जब इसको लेकर काफ़ी विवाद मच गया है। विश्वविद्यालय की इस सफ़ाई पर ही कई सवाल खड़े होते हैं। यूनिवर्सिटी ने कहा है कि उसे प्रेस से बात करने की इजाजत नहीं थी। जब ऐसा था तो वह डीडी न्यूज़ जैसे सरकारी न्यूज़ चैनल को इंटरव्यू क्यों दे रहे थी? जब उसने इंटरव्यू दिया तो गलगोटिया यूनिवर्सिटी की इस 'उपलब्धि' को मंत्री तक ने सोशल मीडिया पर साझा किया। तब यूनिवर्सिटी ने स्टाफ को लेकर ये बातें क्यों नहीं कहीं। वह स्टाफ़ बुधवार को भी बयान जारी करती रही।

इससे एक दिन पहले भी यूनिवर्सिटी ने एक्स पर एक बयान पोस्ट किया था। उसमें उसने कहा था, 'हमने यह रोबोडॉग नहीं बनाया है, न ही कभी क्लेम किया। हमने इसे यूनिट्री से खरीदा है। यह स्टूडेंट्स के लिए लर्निंग टूल है। हम ऐसे टेक्नोलॉजी बनाने वाले माइंड्स तैयार कर रहे हैं जो भविष्य में भारत में ऐसे रोबोट बनाएंगे।' मंगलवार को यूनिवर्सिटी ने यह नहीं कहा था कि उस स्टाफ को जानकारी नहीं है और उत्साह में कैमरे पर बोल दिया। यह भी नहीं कहा था कि उसे प्रेस से बात करने की इजाजत नहीं थी।
यूनिवर्सिटी की ओर से यह बयान तब आया है जब कहा जा रहा है कि इससे दुनिया भर में भारत की ख़राब इमेज गई है और यूनिवर्सिटी को प्रदर्शनी से हटा दिया गया। यह सब रोबोडॉग की प्रदर्शनी के बाद हुआ। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पता चला कि यह रोबोडॉग चाइनीज कंपनी का बना हुआ है, न कि यूनिवर्सिटी का अपना इनोवेशन।

क्या हुआ था समिट में?

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहा है। यह एक बड़ा इवेंट है जहां भारत की AI की ताकत दिखाई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया था। यहाँ गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपना पेविलियन यानी स्टॉल लगाया। वहां एक रोबोट डॉग दिखाया गया, जिसका नाम 'ओरियन' रखा गया था।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एआई समिट में इस चीनी प्रोडक्ट को अपना बताया था

कम्युनिकेशंस डिपार्टमेंट की हेड प्रोफेसर नेहा सिंह ने डीडी न्यूज को इंटरव्यू दिया। उन्होंने कहा, 'यह ओरियन है। इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने डेवलप किया है।' वीडियो वायरल हो गया। लोग खुश हुए कि भारत में ऐसा रोबोट बन रहा है। लेकिन जल्दी ही सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी पड़ताल की। रोबोट पर यूनिट्री रोबोटिक्स यानी चाइनीज कंपनी की ब्रांडिंग दिख रही थी। यह यूनिट्री गो2 मॉडल है, जो ऑनलाइन 2800 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 2.3 लाख रुपये में बिकता है। यह दुनिया भर के यूनिवर्सिटी और रिसर्च में इस्तेमाल होता है, लेकिन यह भारत में नहीं बना।

बवाल क्यों मचा?

लोग बोले कि यूनिवर्सिटी ने चाइनीज प्रोडक्ट को अपना बताकर झूठ बोला। यह सरकारी समिट है, जहां 'मेक इन इंडिया' और भारतीय इनोवेशन को प्रमोट किया जाता है। ऐसे में विदेशी प्रोडक्ट को अपना दिखाना गलत लगा। एक्स पर कम्युनिटी नोट लगा कि यूनिवर्सिटी का क्लेम गलत है। बाद में ख़बर आई कि सरकार ने कह दिया है कि कि यूनिवर्सिटी को स्टॉल खाली करने को कहा गया है। बिजली काट दी गई और उन्हें तुरंत बाहर निकलना पड़ा। इसी के बाद बुधवार को यूनिवर्सिटी ने बयान जारी किया और सारा दोष उस स्टाफ़ पर मढ़ दिया।

नेहा सिंह पर सारा ब्लेम?

बयान में नेहा सिंह का नाम नहीं लिया गया, लेकिन साफ़ है कि वे ही वह 'रिप्रेजेंटेटिव' हैं। यूनिवर्सिटी ने कहा कि वे 'इल-इनफॉर्म्ड' थीं और 'कैमरे के उत्साह' में गलती की। नेहा सिंह ने बाद में कहा कि उनके शब्दों को गलत समझा गया।

लेकिन सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि यूनिवर्सिटी ने एक स्टाफ को 'बलि का बकरा' बना दिया। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट को पता होना चाहिए था कि क्या दिखा रहे हैं। स्टूडेंट्स और फैकल्टी को ट्रेनिंग देनी चाहिए थी। कई यूजरों ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रोफेसर की गलती नहीं, बल्कि पूरी यूनिवर्सिटी की प्लानिंग की कमी है। वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह ने लिखा है, 'अपने माफ़ीनामा में गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने मैडम के नाम पर्ची काट दी है। उनको ग़लत जानकारी वाला, अति उत्साही और तथ्यात्मक तौर पर ग़लत बता दिया है। लेकिन खेल समझिए। ये एक कर्मचारी को बलि का बकरा बना कर ख़ुद को बचाने की क़वायद है। चीन निर्मित रोबोडॉग को फ़ोकस में रख कर फ़र्ज़ीवाड़े की कोशिश मैडम का अकेले का फ़ैसला नहीं हो सकता।'

अब क्या हो रहा है?

समिट में यूनिवर्सिटी का स्टॉल हटा दिया गया। रोबोडॉग अब डिस्प्ले पर नहीं है। ऑनलाइन बहस जारी है। कुछ लोग यूनिवर्सिटी की आलोचना कर रहे हैं कि भारतीय एआई को प्रमोट करने के बजाय इसने फेक क्लेम किया। वहीं यूनिवर्सिटी कह रही है कि उनका फोकस स्टूडेंट्स को रियल टेक्नोलॉजी सिखाना है, न कि फेक इनोवेशन दिखाना। यह मामला दिखाता है कि एआई जैसे बड़े इवेंट में ट्रांसपेरेंसी कितनी जरूरी है।