केरल की फ्रंटियर फॉर्माकॉलोजी ने 131 जेनेरिक दवा नमूनों का क्वॉलिटी टेस्ट ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले में किया। पाया गया कि जेनेरिक दवाएं परीक्षण में उतनी ही असरदार थीं। study of 131 generic drugs passed quality tests and effectiveness compared to branded drugs.
जेनेरिक दवाओं के बारे में अगर आपकी राय नेगेटिव (नकारात्मक) है तो आज से बदल लीजिए। जेनेरिक दवाएं भी उतनी ही असरदार और क्वॉलिटी वाली होती हैं, जितनी किसी ब्रांडेड या बड़ी कंपनी की दवा। ब्रांडेड के मुकाबले तो खैर सस्ती होती ही हैं। सस्ती होने की वजह से लोग धारणा बना बैठे थे कि जेनेरिक दवाएं उतनी असरदार नहीं होती हैं, जितनी ब्रांडेड या नामी कंपनियों की दवाइयां। केरल की फ्रंटियर्स इन फॉर्माकॉलोजी संस्था ने डॉ एब्बी फिलिप्स और सात डॉक्टरों के नेतृत्व में एक स्टडी की है। डॉ फिलिप्स राजगिरी अस्पताल कोच्चि (केरल) से जुड़े हुए हैं। सोशल मीडिया पर वो लीवर डॉक्टर के रूप में मशहूर हैं।
क्या सस्ती जेनेरिक दवाएं महंगी ब्रांडेड दवाओं जितनी ही प्रभावी होती हैं? यह एक ऐसा सवाल है जो मरीजों के साथ-साथ कई डॉक्टरों को भी परेशान करता रहा है। अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि कम कीमत का मतलब कम क्वॉलिटी होता है। भारत जैसे देश में यह संदेह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं पर परिवारों द्वारा अपनी जेब से किए जाने वाले कुल खर्च का लगभग दो-तिहाई हिस्सा दवाओं पर खर्च होता है।
डॉ फिलिप्स के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में केरल के विभिन्न क्षेत्रों में 22 आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं के 131 नमूने खरीदे गए। इनमें हार्ट, डायबिटीज, इन्फेक्शन, दर्द, एसिडिटी और अन्य बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल थीं। ये नमूने सात प्रकार के अलग-अलग बिक्री केंद्रों से लिए गए। जिनमें सरकारी जन औषधि केंद्र, जेनेरिक दवा और महंगी ब्रांडेड दवाएं बेचने वाली फार्मेसियां शामिल थीं। इस स्टडी के लिए जनता से फंडिंग जुटाई गई थी।
इसके बाद सभी नमूनों को कोडिंग और रैंडेम प्रक्रिया के तहत एक शीर्ष मान्यता प्राप्त लेबोरेट्री में भेजा गया, जहां उनका भारतीय औषध संहिता (Indian Pharmacopoeia) 2022 के मानकों के अनुसार कठोर परीक्षण किया गया। इस अध्ययन की खास बात यह थी कि इससे पहले बहुत कम शोध ऐसे हुए हैं जिनमें एक ही बाजार से खरीदी गई ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं की सीधे तुलना की गई हो, या सरकारी आपूर्ति वाली दवाओं को शामिल किया गया हो या गुणवत्ता परीक्षण के साथ-साथ कीमतों का भी विस्तृत विश्लेषण किया गया हो।
जेनेरिक दवाएं क्या ब्रांडेड दवाओं से कम असरदार निकलीं
अध्ययन के नतीजे बेहद स्पष्ट और चौंकाने वाले थे। जांचे गए सभी 131 दवा नमूने गुणवत्ता के हर परीक्षण में सफल पाए गए। यानी सफलता दर 100 प्रतिशत रही। दवा जेनेरिक थी या ब्रांडेड, सस्ती थी या महंगी, इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। सभी दवाओं में सक्रिय औषधीय तत्व (Active Ingredient) की मात्रा, शुद्धता और शरीर में घुलने की क्षमता समान रूप से मानकों के अनुरूप पाई गई।
क्या जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड कंपनियों से महंगी हैं
कीमतों के मामले में तस्वीर बिल्कुल अलग है। अध्ययन में पाया गया कि जेनेरिक दवाएं औसतन ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 48.6 प्रतिशत सस्ती थीं। कुछ मामलों में सबसे महंगा ब्रांड उसी दवा के सबसे सस्ते जेनेरिक विकल्प से 13.9 गुना तक अधिक महंगा था। यानी पेन किलर की दवा ब्रांडेड कंपनी की बहुत मंहगी थी लेकिन जेनेरिक में उतनी ही असरदार दवा सस्ती थी।लीवर की जेनेरिक दवा खाने पर क्या 16000 रुपये बचते हैं
टेस्ट की गई 22 दवाओं में से 18 के लिए सरकारी जन औषधि केंद्र सबसे सस्ता विकल्प साबित हुए। इन दवाओं का इस्तेमाल करने पर मरीजों को सालाना हजारों रुपये की बचत हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, लीवर के इलाज में खाई जाने वाली दवा पर ही मरीज सालभर में 16,000 रुपये से अधिक की बचत कर सकते हैं।डॉक्टरों की भूमिका महत्वपूर्ण, मरीजों के हित से जुड़े मामला
दवाओं के पर्चे डॉक्टर लिखता है। पैसे वाले मरीज ब्रांडेड दवा जाकर खरीद लेता है। लेकिन गरीब और निम्न मध्यम वर्गीय लोग कहां जाएं। डॉक्टर इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डॉक्टरों के लिए यह अध्ययन एक महत्वपूर्ण संदेश है। डॉक्टर का जेनेरिक दवा लिखना इलाज में किसी प्रकार का समझौता नहीं है। मरीज को वही प्रभावी दवा बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा सकती है।
मरीजों के लिए इसका अर्थ और भी महत्वपूर्ण है। कम लागत वाली लेकिन समान गुणवत्ता वाली दवाओं का इस्तेमाल उन्हें बिना आर्थिक दबाव के रेगुलर इलाज जारी रखने में मदद कर सकता है। लंबे समय तक इलाज जारी रखना ही बेहतर स्वास्थ्य नतीजों की कुंजी है।
इस अध्ययन का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं एक-दूसरे की विरोधी नहीं हैं। अगर बाजार में रेगुलेटर प्रभावी हो और गुणवत्ता मानकों का पालन सख्ती से कराया जाए, तो कम कीमत और बेहतर गुणवत्ता साथ-साथ चल सकती हैं।