पश्चिम एशिया के संकट के बाद भारत सरकार 42 अरब डॉलर यानी क़रीब चार लाख करोड़ के रणनीतिक ईंधन भंडार के लिए एलपीजी और प्राकृतिक गैस उपभोक्ताओं पर लेवी लगाने पर विचार कर रही है। अभी देश में 10 दिन के भंडार की क्षमता है।
देश में गैस भंडार बढ़ाने के लिए क्या सरकार अब एलपीजी और प्राकृतिक गैस उपभोक्ताओं पर नई लेवी लगाएगी? पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष और ईरान-इसराइल-अमेरिका युद्ध के दौरान ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर के बाद केंद्र सरकार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है। रायटर्स ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि सरकार रसोई गैस यानी एलपीजी और प्राकृतिक गैस के उपभोक्ताओं पर एक नई लेवी लगाने की योजना बना रही है, ताकि रणनीतिक ईंधन भंडार तैयार करने के लिए पैसा जुटाया जा सके।
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव के तहत करीब 42 अरब डॉलर यानी क़रीब 4 लाख करोड़ रुपये की लागत से अगले दस वर्षों में कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी का बड़ा रणनीतिक भंडार तैयार किया जाएगा। हालाँकि, सरकार की ओर से अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और इसे अभी विभिन्न मंत्रालयों के स्तर पर विचाराधीन बताया जा रहा है।
क्यों बन रही है रणनीतिक ईंधन भंडार की योजना?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। देश अपनी करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत आयात के ज़रिए पूरी करता है। ईरान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई अनिश्चितता के दौरान भारत समेत कई देशों को ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका का सामना करना पड़ा। इससे सरकार को लगा कि केवल कच्चे तेल का भंडार पर्याप्त नहीं है, बल्कि एलपीजी और एलएनजी के भी रणनीतिक भंडार की ज़रूरत है।
अब तक देश में केवल कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है। नई योजना के तहत पहली बार इसमें रसोई गैस और प्राकृतिक गैस को भी शामिल किया जाएगा। योजना के अनुसार कच्चे तेल का करीब दो महीने का भंडार तैयार किया जाएगा। एलएनजी का भी लगभग दो महीने का स्टॉक रखा जाएगा। एलपीजी का करीब डेढ़ महीने का भंडार तैयार किया जाएगा।
उपभोक्ताओं पर कितनी लेवी लग सकती है?
रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय दो तरह की लेवी लगाने पर विचार कर रहा है। एलपीजी पर लेवी 1.29 रुपये प्रति किलोग्राम लगाने पर विचार किया जा रहा है। इससे हर साल करीब 460 मिलियन डॉलर जुटाए जा सकते हैं। इससे एक घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में लगभग 18 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।
प्राकृतिक गैस पर 1.43 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर लेवी लगाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इससे हर साल क़रीब 1 अरब डॉलर जुटाने का अनुमान है। दोनों लेवी से कुल मिलाकर लगभग 1.5 अरब डॉलर यानी क़रीब 13 हजार करोड़ रुपये हर वर्ष जुटाए जा सकते हैं।
गैस बिल पर कितना असर पड़ेगा?
रायटर्स ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो घरेलू गैस उपभोक्ताओं के बिल में लगभग 2 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। यही कारण है कि इसे राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार एलपीजी और प्राकृतिक गैस के भंडारण केंद्र बनाने के लिए उपभोक्ताओं से ली गई राशि का इस्तेमाल किया जाएगा। जबकि कच्चे तेल के रणनीतिक भंडार के निर्माण और उसमें तेल भरने का खर्च केंद्र सरकार उठाती रहेगी। हालाँकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि लेवी किस तरीके से वसूली जाएगी।
10 वर्षों में कितना निवेश होगा?
सरकार की योजना के अनुसार अगले दस वर्षों में करीब 42 अरब डॉलर खर्च किए जाएंगे। इसमें आधे से ज़्यादा खर्च भंडारण सुविधाएं बनाने पर होगा। बाकी राशि ईंधन खरीदकर भंडार भरने में खर्च होगी। सरकार का अनुमान है कि अगले दस वर्षों में देश को अतिरिक्त 2.8 करोड़ टन कच्चे तेल, 90 लाख टन एलएनजी और 40 लाख टन एलपीजी भंडारण क्षमता की ज़रूरत होगी।
फिलहाल भारत के पास 53.3 लाख टन सरकारी रणनीतिक कच्चा तेल भंडार मौजूद है। 65 लाख टन अतिरिक्त क्षमता निर्माणाधीन है। लेकिन एलपीजी और एलएनजी के लिए अभी कोई अलग रणनीतिक भंडारण व्यवस्था नहीं है।
जापान और दक्षिण कोरिया से काफी पीछे भारत
रिपोर्ट के मुताबिक भारत के सरकारी रणनीतिक ईंधन भंडार फिलहाल देश की 10 दिन से भी कम ज़रूरत पूरी कर सकते हैं। इसके मुकाबले जापान और दक्षिण कोरिया के पास 100 दिनों से अधिक का रणनीतिक भंडार है। यही वजह है कि सरकार लंबे समय के लिए ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दे रही है।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यह प्रस्ताव अभी कैबिनेट की मंजूरी के लिए नहीं गया है। विभिन्न मंत्रालयों के बीच इस पर चर्चा जारी है और अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। पेट्रोलियम मंत्रालय और वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में रॉयटर्स द्वारा भेजे गए सवालों का फिलहाल कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है।
अगर यह योजना लागू होती है तो भारत पहली बार कच्चे तेल के साथ-साथ एलपीजी और एलएनजी का भी रणनीतिक भंडार तैयार करने वाले देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा। हालाँकि, इसके लिए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त लेवी लगाने का प्रस्ताव आने वाले समय में आर्थिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी बहस का विषय बन सकता है।