सरकार ने यूपीआई पेमेंट पर एक बिल पेश किया है। जिसमें दो हज़ार से ऊपर के पेमेंट पर फीस का प्रस्ताव है। लेकिन यह फीस आम लोगों, छोटे दुकानदारों पर लागू नहीं होगी। जिन व्यापारियों का सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ या उससे ज्यादा है, वो इसके दायरे में होंगे।
भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था में एक बड़ा नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने संसद में कानून संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। जिसके तहत ₹2,000 से अधिक मूल्य के चुनिंदा यूपीआई (UPI) मर्चेंट लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या प्रोसेसिंग फीस लगाने का रास्ता खुल जाएगा।
विधेयक और कानूनी संशोधन
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में 'कर एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक' (Taxation and Other Laws Amendment Bill) पेश किया गया है। यह विधेयक भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम (Payment and Settlement Systems Act) में संशोधन करेगा। जिससे बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रदाताओं पर डिजिटल भुगतान साधनों पर शुल्क लगाने से जुड़ी कानूनी पाबंदी को हटाया जा सके।यूपीआई पेमेंट बिल की खास बातें
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अभी शुल्क लागू करने की कोई अंतिम तिथि या दर तय नहीं की गई है। यह प्रस्ताव केवल एक कानूनी ढांचा (Enabling Provision) तैयार करने के लिए है। निर्णय होने तक UPI सेवाएं पहले की तरह मुफ्त रहेंगी। बिल जब कानून बनेगा, तब भी आम लोग आपस में लेन-देन करने, छोटो दुकानदारों, ग्रोसरी आइटम, ऑटो, उबर, ओला आदि की पेमेंट पर यह फीस नहीं लगेगी।
सरकार का दावा- 95% लेनदेन रहेंगे अप्रभावित
सरकारी अनुमानों और वित्तीय विश्लेषण के अनुसार इस नियम से आम नागरिकों की दिनचर्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- कुल लेनदेन पर असर: कुल UPI लेनदेन की संख्या (Volume) का केवल 4% से 5% हिस्सा ही ₹2,000 से अधिक मूल्य का होता है। यानी 95% लेनदेन पूरी तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे।
- लेनदेन का मूल्य (Value): संख्या में कम होने के बावजूद, ₹2,000 से अधिक के यह 4%-5% लेनदेन कुल UPI वैल्यू का लगभग 65% से 67% हिस्सा कवर करते हैं।
- दैनिक खरीदारी: दूध, सब्जी, किराना, ऑटो-टैक्सी किराया या छोटे दुकानों पर किए जाने वाले भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
- जुलाई का रिकॉर्ड: जुलाई माह में देश भर में ₹29.9 लाख करोड़ मूल्य के 23.7 अरब UPI लेनदेन दर्ज किए गए थे।
डिजिटल पेमेंट क्षेत्र की कंपनियां (जैसे Paytm, PhonePe, Google Pay, Pine Labs आदि) लंबे समय से शून्य-MDR नीति में बदलाव की मांग कर रही थीं। उनका तर्क है कि बिना किसी शुल्क के UPI सेवाएं देने से इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीकों में निवेश करना चुनौतीपूर्ण हो गया था।
वार्षिक राजस्व: ब्रोकरेज फर्म 'जेफरीज' (Jefferies) के विश्लेषण के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट पेमेंट्स पर MDR लागू करने से डिजिटल पेमेंट उद्योग को सालाना ₹5,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ का राजस्व अवसर मिल सकता है।
अन्य कार्ड्स से तुलना: वर्तमान में क्रेडिट कार्ड पर 1.5% से 3% तक का MDR लगता है, जबकि डेबिट कार्ड पर ₹20 लाख तक के लेनदेन पर 0.4% और उससे अधिक पर 0.9% तक शुल्क तय है।
भारत में यूपीआई लोकप्रियता बढ़ी, लेकिन पेमेंट सुरक्षा अभी भी आधी अधूरी
भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) की अभूतपूर्व लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसकी अत्यधिक सरलता, त्वरित कार्यप्रणाली और शून्य-शुल्क मॉडल रहा है। जब 2016 में एनपीसीआई (NPCI) ने इसे लॉन्च किया, तो इसने जटिल बैंक विवरणों और आईएफएससी (IFSC) कोड दर्ज करने के पारंपरिक झंझट को खत्म कर दिया। इसके बजाय, एक साधारण मोबाइल नंबर या क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करके सीधे एक बैंक खाते से दूसरे खाते में सेकंडों में पैसे भेजने की सुविधा दी गई। स्मार्टफोन के प्रसार, सस्ते इंटरनेट डेटा और छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक क्यूआर कोड की सुलभता ने इसे हर भारतीय की दैनिक जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा बना दिया।
इसके साथ ही, डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने में यूपीआई के सहज और बहुभाषी इंटरफेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। नोटबंदी के बाद कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा मिलने और फिर कोरोना महामारी के दौरान संपर्क रहित (contactless) भुगतान की आवश्यकता ने इसकी रफ्तार को कई गुना बढ़ा दिया। इसके अलावा, सरकारी प्रोत्साहन और किसी भी मर्चेंट लेनदेन पर उपभोक्ताओं के लिए शून्य शुल्क की नीति ने आम जनता के साथ-साथ छोटे दुकानदारों का भी इस तकनीक पर भरोसा कायम किया। आज सब्जी विक्रेता से लेकर बड़े व्यापारिक संस्थान तक, बिना किसी हिचकिचाहट के यूपीआई से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं।
हालाँकि, व्यापक सफलता के बावजूद आम उपयोगकर्ताओं को और अधिक राहत व सुरक्षा देने की दिशा में अभी भी गुंजाइश है।
- सबसे पहले, सर्वर डाउन होने या बैंकों के तकनीकी कारणों से असफल होने वाले (failed) ट्रांजैक्शन की स्थिति में कट चुके पैसों का रिफंड तुरंत (Instant) होना चाहिए, ताकि आम आदमी का पैसा अटके नहीं।
- दूसरे, बढ़ते साइबर फ्रॉड और गलत नंबर पर गलती से भेजे गए पैसों को तुरंत रिकवर करने के लिए एक सीधा, सुलभ और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र (grievance redressal) होना आवश्यक है।
- अंत में, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लिए फीचर फोन उपयोगकर्ताओं (UPI 123Pay) तथा बिना इंटरनेट वाले क्षेत्रों (Offline UPI) की प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाया जाना चाहिए, ताकि यह तकनीक वास्तव में भारत के अंतिम व्यक्ति तक और अधिक आसानी व सुरक्षित रूप से पहुँच सके।