केंद्र सरकार ने एक्स पर फिर से दबाव डाला है और चेतावनी दी है कि यदि वह पत्रकार राणा अय्यूब के हिंदू देवताओं को 'अपमानित करने वाले ट्वीट्स' नहीं हटाता तो देश में उसको मिली क़ानूनी सुरक्षा ख़त्म हो सकती है। सोशल मीडिया कंपनियों को यह क़ानूनी सुरक्षा इस रूप में मिलती है कि यूज़रों द्वारा आपत्तिजनक पोस्ट या गैर कानूनी पोस्ट पर उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर जैसी क़ानूनी कार्रवाई हो भी तो एक्स, फ़ेसबुक जैसी कंपनियों पर कार्रवाई नहीं होती है। इसी छूट को वापस लेने की केंद्र ने चेतावनी दी है। यदि सरकार यह छूट वापस ले ले तो ऐसी किसी भी सोशल मीडिया कंपनी को देश में चलाना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि कंपनी को अनगिनत मुक़दमों का सामना करना पड़ सकता है और ऐसे में वह काम नहीं कर पाएगी।
यह बात केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में कही है। मामले की सुनवाई जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की कोर्ट में चल रही है।
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राणा अय्यूब पर क्या हैं आरोप?

वकील अमिता सचदेवा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि राणा अय्यूब ने 2013 से 2017 के बीच 6 ट्वीट्स में हिंदू देवताओं का अपमान किया, वीर सावरकर और भारतीय सेना को बदनाम किया। ये ट्वीट्स धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले, भड़काऊ और सांप्रदायिक हैं। अमिता सचदेवा खुद को सनातन धर्म की कट्टर अनुयायी बताती हैं। उन्होंने पहले नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत की, फिर ट्रायल कोर्ट में अर्जी दी। कोर्ट के आदेश पर राणा अय्यूब के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज हुई।

केंद्र और दिल्ली पुलिस का क्या कहना है?

केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट को बताया है कि एक्स को सचाई का पता चल चुका है। कोर्ट के आदेश और दिल्ली पुलिस की नोटिस के बावजूद एक्स ने उन ट्वीट को नहीं हटाया। सरकार ने कहा, 'X का यह निष्क्रिय रहना आईटी नियमों के तहत सतर्कता की शर्तों का उल्लंघन है। इससे राणा अय्यूब जैसे यूजर अवैध काम जारी रहते हैं। इसलिए इंटरमीडियरी को मिलने वाला धारा 79(1) का सेफ़ हार्बर प्रोटेक्शन (कानूनी छूट) को वापस लिया जा सकता है।'

दिल्ली पुलिस ने 9 अप्रैल को ट्वीट्स ब्लॉक करने के लिए केंद्र सरकार को अनुरोध भेजा है। केंद्र ने कहा कि यह अनुरोध आईटी ब्लॉकिंग रूल्स 2009 के तहत प्रोसेस किया जा रहा है। अगर ज़रूरी हुआ तो इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करके फैसला लिया जाएगा।

एक्स का जवाब

एक्स ने कोर्ट में कहा कि यह याचिका उसके खिलाफ सही नहीं ठहरती है, क्योंकि वह आर्टिकल 12 के तहत 'सरकार' नहीं है और न ही कोई सरकारी काम करती है। इसलिए आर्टिकल 226 के तहत रिट याचिका नहीं चल सकती। एक्स का तर्क है कि कोर्ट को यह तय नहीं करना चाहिए कि ट्वीट्स गलत हैं या नहीं। इसके लिए अमिता सचदेवा को सिविल सूट दायर करना चाहिए। विकल्प के रूप में एक्स ने कोर्ट से कहा कि या तो दिल्ली पुलिस और केंद्र 2009 के ब्लॉकिंग रूल्स के तहत प्रक्रिया अपनाकर ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी करें, या फिर राणा अय्यूब के खिलाफ ही टेकडाउन डायरेक्टिव जारी करें।

कोर्ट ने क्या किया?

इस हफ्ते कोर्ट ने कहा था कि राणा अय्यूब के ट्वीट्स 'काफ़ी अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक' हैं, इसलिए तुरंत कार्रवाई ज़रूरी है। शुक्रवार की सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को अंतरिम आदेश को कानून के अनुसार लागू करने का निर्देश दिया। राणा अय्यूब को याचिका की मेंटेनेबिलिटी समेत इस पर जवाब दाखिल करने की छूट दी गई है।
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मामला अब 19 मई 2026 को अगली सुनवाई के लिए अदालत के सामने आएगा। राणा अय्यूब की तरफ़ से वकील वृंदा ग्रोवर और सौतिक बनर्जी पेश हुए। केंद्र सरकार की तरफ़ से एएसजी चेतन शर्मा ने कोर्ट को एक शॉर्ट नोट सौंपा।

अमिता सचदेवा ने एक्स की शिकायत समिति से भी गुहार लगाई थी, लेकिन वहां राहत नहीं मिली क्योंकि मामला अदालत में लंबित था। उन्होंने कहा कि सारी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बावजूद ट्वीट्स अब भी दुनिया भर में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, जिससे धार्मिक भावनाओं को लगातार चोट पहुँच रही है और साम्प्रदायिक सद्भाव बिगड़ रहा है।

पिछले साल मई में दिल्ली पुलिस ने ट्रायल कोर्ट को बताया था कि राणा अय्यूब के अकाउंट और ट्वीट्स की डिटेल्स का इंतज़ार है और पोस्ट्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं हैं।