सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर में बसंत पंचमी और जुमे की नमाज को लेकर बड़ा फ़ैसला दिया। जानिए आख़िर क्या विवाद है और सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा।
मध्य प्रदेश के धार जिले में ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शुक्रवार को बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक साथ पड़ने के कारण कोर्ट ने आदेश दिया है कि हिंदू भक्त बसंत पंचमी पर सुबह से शाम तक सरस्वती पूजा कर सकेंगे, जबकि मुस्लिम समुदाय दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज अदा कर सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग जगह व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। नमाज के लिए परिसर में ही एक अलग क्षेत्र बनाया जाएगा, जहां अलग प्रवेश और निकास की सुविधा होगी। नमाज के बाद भीड़ तुरंत वहां से हट जाएगी। इसी तरह हिंदू समुदाय के लिए भी बसंत पंचमी पर पारंपरिक पूजा-पाठ के लिए अलग स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि यह एक उचित और संतुलित सुझाव है, जिससे दोनों पक्ष अपनी धार्मिक प्रथाएं निभा सकें।
क्या है भोजशाला का विवाद?
भोजशाला 11वीं शताब्दी का एक पुराना स्मारक है, जिसकी देखभाल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई करता है। हिंदू समुदाय इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानता है, जहां ज्ञान और कला की देवी की पूजा होती है। वहीं, मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है।
2003 में हुए एक समझौते के अनुसार, हिंदू हर मंगलवार को यहां पूजा करते हैं और मुस्लिम हर शुक्रवार को नमाज पढ़ते हैं। लेकिन इस साल बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया था। हिंदू संगठन ने पूरे दिन पूजा की मांग की थी, जबकि मुस्लिम पक्ष ने कहा कि जुमे की नमाज का समय तय है, इसे बदला नहीं जा सकता।
2016 में भी बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी थी, तब समय को लेकर विवाद हुआ था और धार में विरोध-प्रदर्शन और झड़पें हुई थीं। इस बार स्थिति संवेदनशील होने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल थे। यह सुनवाई हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर हो रही थी, जिसमें बसंत पंचमी पर दिनभर पूजा की अनुमति मांगी गई थी।
हिंदू पक्ष भोज उत्सव समिति ने पूरे दिन सरस्वती पूजा की अनुमति मांगी थी और कहा था कि 30,000 से 50,000 भक्त आ सकते हैं। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि सुबह से शाम तक पूजा, हवन आदि होंगे। मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने बताया कि नमाज दोपहर 1 से 3 बजे के बीच होगी और उसके बाद मुस्लिम समुदाय परिसर खाली कर देगा। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने केंद्र और एएसआई की ओर से कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाएगी। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने एक अच्छा सुझाव दिया कि नमाज के लिए परिसर में ही अलग से जगह बनाई जाए, अलग प्रवेश-निकास हो और जिला प्रशासन पास जारी करे। मुस्लिम पक्ष ने माना कि वे आज ही नमाज में आने वालों की संख्या प्रशासन को बता देंगे।
कोर्ट के मुख्य आदेश
- हिंदू समुदाय को बसंत पंचमी पर सुबह से शाम तक पारंपरिक पूजा-पाठ की अनुमति।
- मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज के लिए अलग जगह और व्यवस्था।
- दोनों पक्षों को आपसी सम्मान रखते हुए प्रशासन का सहयोग करना होगा।
- कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पास व्यवस्था या अन्य उचित तरीके अपनाए जाएं।
- कोर्ट ने पुरानी याचिका को भी निपटा दिया और हाईकोर्ट में लंबित मामले को जल्द सुनने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट में केस कहाँ तक पहुँचा?
एएसआई ने पहले वैज्ञानिक सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में सील बंद लिफाफे में है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट रिपोर्ट खोलकर दोनों पक्षों को कॉपी दे सकता है। और अगर कोई हिस्सा गोपनीय हो तो वकीलों की मौजूदगी में देखा जा सकता है। फिर हाईकोर्ट अंतिम सुनवाई कर फैसला सुनेगा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
धार जिले में शांति बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। लगभग 8000 पुलिसकर्मी, सीआरपीएफ़ और आरएएफ़ के जवान मौके पर हैं। सीसीटीवी कैमरे, पैदल और वाहन गश्त चल रही है। सोशल मीडिया पर भी नज़र रखी जा रही है ताकि कोई अफवाह न फैले। प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति और सहयोग की अपील की है।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से अपील की है कि वे एक-दूसरे का सम्मान करें और प्रशासन के साथ मिलकर कानून-व्यवस्था बनाए रखें। यह फैसला दोनों समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।