अमेरिका से अवैध भारतीय प्रवासियों के निर्वासन के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में गुरुवार 6 फरवरी को हंगामा हुआ। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी गई। जैसे ही दोनों सदनों में सांसद पहुंचे, विपक्षी सदस्य, ज्यादातर कांग्रेस सांसदों ने अपनी सीटों पर खड़े होकर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की। लेकिन स्पीकर ने अनुमति नहीं दी। इसके बाद संसद के बाहर विपक्षी सांसदों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। हथकड़ी बेड़ी में जकड़े अवैध प्रवासियों की वापसी मोदी सरकार के लिए नई मुसीबत बन गई है। विपक्ष इस बात पर नाराज है कि मोदी सरकार ने इस मुद्दे पर ट्रम्प प्रशासन से दो टूक बात नहीं की, जबकि छोटे-छोटे देश ट्रम्प की इस नीति का विरोध कर रहे हैं।
राज्यसभा में उपसभापति हरिवंश अपने आसन पर थे। उन्होंने आदेश दिया कि विपक्षी सांसदों की बातें रिकॉर्ड में नहीं जाएंगी। यानी विपक्ष को प्रवासी भारतीयों के दुख दर्द और उस पर सरकार से सवाल पूछने की भी अनुमति नहीं दी गई। काफी हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी गई। नियम 267 के तहत नोटिस देने वालों में सीपीआई के संतोष कुमार पी, टीएमसी के संकेत गोखले, सीपीएम के वी शिवदासन और कांग्रेस नेता अनिल कुमार यादव, शक्ति सिंह गोहिल, प्रमोद तिवारी, रेणुका चौधरी और अशोक सिंह शामिल थे।

लोकसभा में स्पीकर ओम बिडला ने हंगामा कर रहे सदस्यों को यह कहकर शांत करने की कोशिश की कि सरकार ने उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा, "यह विदेश नीति का मामला है। विदेशी देश के भी अपने नियम और कानून होते हैं। आप दोपहर में अपने मुद्दे उठा सकते हैं और प्रश्नकाल को सुचारू रूप से चलने दें।"

कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में केंद्र से डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के साथ जुड़ने के लिए उठाए जा रहे राजनयिक कदमों की रूपरेखा तैयार करने का आग्रह किया गया। लेकिन स्पीकर ने इस पर चर्चा की अनुमति नहीं दी।

हालाँकि, विरोध कर रहे सदस्यों ने अध्यक्ष की दलीलों को नजरअंदाज कर दिया और विरोध जारी रखा जिसके बाद बिड़ला ने सदन को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया।

ट्रम्प प्रशासन का भारतीय नागरिकों को "हथकड़ी" में निर्वासित करने का कदम देश का अपमान है।
थरूर ने कहा, "जिस तरीके से यह किया गया, हम उसका विरोध कर रहे हैं। उनके पास अपने देश में अवैध रूप से रहने वाले लोगों को निर्वासित करने का पूरा कानूनी अधिकार है... लेकिन उन्हें इस तरह अचानक सैन्य विमान और हथकड़ी में भेजना भारत का अपमान है, यह भारतीयों की गरिमा का अपमान है।"

संसद के बाहर वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा- बहुत बात की गई थी कि मोदी जी और ट्रंप जी बहुत अच्छे मित्र हैं, फिर मोदी जी ने ऐसा क्यों होने दिया? क्या इंसानों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है कि उनको हथकड़ियां और बेड़ियां पहनाकर भेजा जाए? ये कोई तरीका है... प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए।
भारत लौटे अवैध प्रवासी दर्दनाक कहानियां सुना रहे हैं। वहां उन्हें एक से दूसरे कैंप ले जाया जाता था। शौचालय का इंतजाम नहीं था। पूरी यात्रा के दौरान उन्हें हथकड़ी पहनाई गई और उनके पैर जंजीरों से बंधे रहे। मीडिया से बातचीत में उनमें से कुछ ने कहा कि अमृतसर में उतरने के बाद ही वे हथकड़ी-बेड़ी से मुक्त हुए थे। यह घटना अमेरिका की 'डंकी रूट' से अवैध रूप से जाने वाले खतरों को बताती है। पीएम मोदी जो यूएस राष्ट्रपति ट्रम्प का दोस्त होने का दावा करते हैं, ने एक बार भी इस मुद्दे पर ऐतराज नहीं जताया।

104 अवैध भारतीय प्रवासियों को लेकर एक अमेरिकी सैन्य विमान बुधवार को अमृतसर में उतरा। यह अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के तहत डोनाल्ड ट्रम्प सरकार द्वारा निर्वासित भारतीयों का पहला ऐसा जत्था था। उनमें से 33-33 हरियाणा और गुजरात से, 30 पंजाब से, तीन-तीन महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से और दो चंडीगढ़ से हैं।

(इस रिपोर्ट का संपादन यूसुफ किरमानी ने किया)