हाल में पाकिस्तान के साथ बढ़े तनाव के बीच क्या अब भारत ने इस्लामाबाद के प्रति सद्भावना दिखाना शुरू कर दिया है? भारत ने रविवार को तवी नदी में भारी बाढ़ के हालात की पूर्व सूचना पाकिस्तान को दी है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया गया था और तब से इस तरह की जानकारी पाकिस्तान के साथ साझा नहीं की गई। हालाँकि रिपोर्ट है कि यह जानकारी सिंधु जल संधि चैनल के माध्यम से साझा नहीं की गई है और इसको इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग ने जानकारी साझा की है। पाकिस्तानी मीडिया ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से ही यह रिपोर्ट दी है। 

इन रिपोर्टों पर भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से भी कुछ इसी तरह की पुष्टि हुई है। द इंडियन एक्सप्रेस ने एक सूत्र के हवाले से कहा है, 'मानवीय आधार पर प्रचंड बाढ़ के बारे में जानकारी साझा करने का निर्णय लिया गया। सिंधु जल संधि स्थगित है, इसलिए विदेश मंत्रालय के माध्यम से जानकारी साझा की गई।' रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने रविवार को विदेश मंत्रालय के साथ जानकारी साझा की, जिसने इसे इस्लामाबाद भेज दिया।
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बाढ़ की जानकारी साझा करने का माध्यम क्या?

सिंधु जल संधि के तहत बाढ़ के आँकड़े सिंधु जल आयुक्तों के माध्यम से साझा किए जाते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच नौ साल की बातचीत के बाद 19 सितंबर, 1960 को सिंधु जल संधि यानी आईडब्ल्यूटी पर हस्ताक्षर किए गए थे। संधि के प्रावधानों के अनुसार, पूर्वी नदियों- सतलुज, व्यास और रावी का सारा पानी भारत के लिए उपलब्ध होगा। हालाँकि, पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब- का पानी मिलेगा।

पहलगाम हमले के बाद भारत ने 22 अप्रैल 2025 को एक आधिकारिक बयान जारी कर सिंधु जल संधि को निलंबित घोषित कर दिया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा था कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और पहलगाम हमले के बाद यह क़दम उठाया गया। पाकिस्तान ने इस फैसले की कड़ी निंदा की थी और विश्व व्यापार संगठन तथा अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में अपील करने की धमकी दी थी। संधि के निलंबन के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया।

अप्रैल में अचानक पानी छोड़ दिया था

इसके बाद भारत ने नदियों से जुड़ी कोई भी जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया था। इसी बीच भारत ने अप्रैल महीने के आख़िर में अचानक झेलम नदी में पानी छोड़ दिया था। इसके बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में झेलम नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी से स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई थी।
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पाकिस्तानी मीडिया और अधिकारियों ने दावा किया था कि भारत ने जानबूझकर बिना सूचना के पानी छोड़ा। पीओके अधिकारियों ने भारत पर जानबूझकर 'जल आतंकवाद' फैलाने का आरोप लगाया। यह आरोप 1960 के सिंधु जल संधि यानी आईडब्ल्यूटी के कथित उल्लंघन पर आधारित था, जो भारत और पाकिस्तान के बीच साझा नदियों के पानी के उपयोग को नियंत्रित करती है। इस रिपोर्ट पर भारतीय अधिकारियों का बयान नहीं आया था। उन्होंने न तो पानी छोड़ने की पुष्टि की और न ही इसका खंडन किया था। हालाँकि, कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि यह पानी छोड़ना जम्मू और कश्मीर में भारी बारिश के कारण बांध की एक नियमित प्रक्रिया थी।

अब जानकारी साझा करने के मायने क्या?

तवी नदी में भारी बाढ़ के हालात की जानकारी साझा करने के फ़ैसले को भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के बीच एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। 
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रिपोर्टों के अनुसार विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि भारत द्वारा पाकिस्तान के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तवी नदी के बाढ़ के हालात की जानकारी दी गई है। इसे सद्भावना के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालाँकि, दोनों देशों की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यह सद्भावना संकेत भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक नया मोड़ ला सकता है। सिंधु जल संधि का निलंबन पहले से ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा चुका है। हालाँकि, ताज़ा फ़ैसले को सद्भावना संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्ती बरकरार है।