विदेश मंत्रालय ने ढाका स्थित भारतीय दूतावास की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और राष्ट्रीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता हसनत अब्दुल्ला द्वारा भारत विरोधी भड़काऊ टिप्पणियों के मद्देनजर बांग्लादेश के उच्चायुक्त को तलब किया। दोनों देशों के रिश्ते लगातार बिगड़ रहे हैं।
मोहम्मद यूनुस और पीएम मोदी
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने ढाका में भारतीय मिशन की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम. रियाज हमीदुल्लाह को तलब किया है। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से ढाका में भारतीय दूतावास के बाहर जारी विरोध प्रदर्शनों और भारत विरोधी बयानबाजी के कारण यह कदम उठाया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के नेता हसनत अब्दुल्लाह ने एक सार्वजनिक भाषण में भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों (सेवन सिस्टर्स) को अलग-थलग करने और अलगाववादियों को शरण देने की धमकी दी थी, जिससे सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर बांग्लादेश सरकार से ठोस कार्रवाई की उम्मीद जताई है।
यह घटना दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का नवीनतम उदाहरण है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-बांग्लादेश संबंध पिछले कुछ वर्षों में काफी गिरावट देख रहे हैं, खासकर 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में गिरावट के प्रमुख कारण
राजनीतिक बदलाव और हसीना का भारत में शरण: अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद अंतरिम सरकार के सत्ता संभालने से संबंधों में ठंडक आई। हसीना को भारत में शरण मिलने और उनकी प्रत्यर्पण मांग को लेकर ढाका नाराज है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इसे द्विपक्षीय संबंधों में बाधा बताया है।
अल्पसंख्यकों पर हमले और मीडिया कवरेज: हसीना के पतन के बाद बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर कथित हमलों की खबरों ने भारत में व्यापक आक्रोश पैदा किया। भारतीय मीडिया की कवरेज को बांग्लादेश ने अतिरंजित और गलत जानकारी वाला बताया, जिससे दोनों तरफ अविश्वास बढ़ा।
व्यापार और सीमा विवाद: 2025 में भारत ने बांग्लादेशी सामानों पर व्यापार प्रतिबंध लगाए, जिससे करीब 770 मिलियन डॉलर का व्यापार प्रभावित हुआ। सीमा पर 'पुश-इन' घटनाएं, अवैध प्रवासन और बाड़बंदी को लेकर तनाव बढ़ा है। बांग्लादेश ने भारत पर अनौपचारिक तरीके से लोगों को धकेलने का आरोप लगाया।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के इरादे
अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश ने पाकिस्तान और चीन के साथ संबंध मजबूत किए हैं। पाकिस्तानी आईएसआई अधिकारियों की ढाका यात्रा और सैन्य सहयोग ने भारत की चिंताएं बढ़ाई हैं। साथ ही, बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएं और 'बॉयकॉट इंडिया' अभियान भी चले। पुराने मजबूत सहयोग (जैसे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स, ऊर्जा और रक्षा) अब ठप पड़े हैं। कुछ परियोजनाएं रुकी हुई हैं, और दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत सीमित है।
हालांकि, हाल के महीनों में कुछ सकारात्मक संकेत भी दिखे हैं, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बातचीत और रेलवे, ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में जारी सहयोग। दोनों देशों के अधिकारियों ने संबंधों को 'पुनर्संतुलन चरण' बताया है और कहा है कि यह किसी एक सरकार पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
विश्लेषकों का कहना है कि दोनों पड़ोसी देशों के लिए स्थिर संबंध जरूरी हैं, क्योंकि व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता इससे जुड़ी है। उम्मीद है कि आने वाले समय में बातचीत से तनाव कम होगा।