मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन ने शनिवार 31 अक्टूबर को जन महाभियोग आयोजित किये। इसमें विपक्षी नेताओं के अलावा सिविल सोसायटी और वो मतदाता पहुंचे, जिनके नाम SIR में उड़ा दिये गये।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग में शनिवार को शामिल विपक्षी नेता
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने शनिवार, 31 अक्टूबर को ‘जन महाभियोग’ की प्रतीकात्मक कार्यवाही शुरू की। इसकी अध्यक्षता पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने की। विपक्ष ने यह कार्यक्रम चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के बीच आयोजित किया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर उनकी चिंताओं का उचित समाधान नहीं किया है।
- इस जनमहाभियोग की सबसे खास बात यह थी कि इसमें ऐसे मतदाताओं ने सबूतों को पेश करते हुए कहा कि उनके नाम वोटर लिस्ट से उड़ा दिये गये। एक महिला ने कहा कि एक तरह उनकी भारतीय नागरिकता छीन ली गई। उनकी बेटी को अब नौकरी कैसे मिलेगी, जब उसके पास इस तरह का कोई सबूत नहीं होगा। बंगाल से आये शख्स ने अपना पासपोर्ट, आधार कार्ड और पुराना मतदाता पहचानपत्र दिखाते हुए कहा कि इतने सबूतों के बावजूद उनका नाम वोटरलिस्ट में नहीं है।
खड़गे ने पेश किया ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए कहा- सत्तारूढ़ पार्टी के विरोधियों को निशाना बनाने के लिए "ईसीआई (चुनाव आयोग) ने एसआईआर की घोषणा रातोंरात की। इसे पूरे देश में लागू किया गया, जिसका मकसद भाजपा विरोधियों के वोटों को हटाना था।" उन्होंने मोदी सरकार पर अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बाहरी लोगों और घुसपैठियों की चिंताओं का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "वे आरोप लगाते हैं कि हम घुसपैठियों को शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा नहीं है; हम तो बस असली, वैध मतदाताओं को बनाए रखने की वकालत कर रहे हैं। हम यह उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कर रहे हैं।"
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को भाजपा पर 2014 से सत्ता में बने रहने की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सांसदों की धांधली की, राजनीतिक दलों को तोड़ा, सरकारों को गिराया और अब "वोटों की चोरी" कर रही है। खड़गे ने कहा, "2014 से सत्ता हथियाने और उसे बरकरार रखने के लिए हर संभव साजिश रची गई है। उन्होंने सांसदों की धांधली की, राजनीतिक दलों को तोड़ा, सरकारों को गिराया और चुनावी बांड, ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल किया, और अब वे वोटों की चोरी कर रहे हैं। हमारे पास वोट चोरी के ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं। ज्ञानेश कुमार 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम के कारण इस चोरी को बढ़ावा दे पा रहे हैं। यह विधेयक 145 विपक्षी सांसदों को निलंबित करने के बाद दिसंबर 2023 में पारित किया गया था। यह शर्मनाक और कलंक है। यह कानून चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा कवच प्रदान करता है- ऐसा संरक्षण जो भारत के राष्ट्रपति या मुख्य न्यायाधीश को भी नहीं मिलता।"
ज्ञानेश ने संविधान से विश्वासघात किया, देशद्रोह का मुकदमा चलेः खड़गे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाने की मांग की और उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने का आह्वान किया, उन पर जनता और संविधान के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। खड़गे ने कहा- "यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह द्वारा दिसंबर 2023 में इस सरकार के जरिये मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को दी गई आजीवन कानूनी सुरक्षा, उनके द्वारा राष्ट्र और भारत के संविधान के विरुद्ध किए गए आपराधिक कृत्यों को छिपाने के लिए थी। इसलिए, उन्हें फौरन हटाया जाना चाहिए। भारत की साठ प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले इंडिया गठबंधन के सांसदों ने 31 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में एकत्रित नागरिकों के साथ मिलकर यह संकल्प लिया कि भारत की जनता के साथ इस घोर विश्वासघात के लिए, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भारत के संविधान के कानूनी ढांचे के अनुसार देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।"
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 6 आरोप क्या क्या हैं
शनिवार को इंडिया ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोपों वाला एक प्रस्ताव जारी किया, जिसमें संविधान के उल्लंघन और मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप में उन्हें हटाने की मांग की गई।
- 1. पहले आरोप में कुमार पर भाजपा द्वारा राष्ट्रीय और राज्य चुनावों में हेरफेर करने के लिए रची गई कथित आपराधिक साजिश का हिस्सा होने का आरोप लगाया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी को मतदाता सूची तक पहुंचने और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए मनमाने ढंग से मतदाताओं को जोड़ने या हटाने की अनुमति दी थी।
- 2. ज्ञानेश कुमार को ब्लॉक द्वारा हेरफेरपूर्ण और विनाशकारी एसआईआर प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि 13.2 करोड़ मतदाताओं को जानबूझकर मतदाता सूची से हटा दिया गया, जिससे उनके संवैधानिक मतदान अधिकार का हनन हुआ। इसमें चुनाव आयोग पर पक्षपातपूर्ण और अपारदर्शी तरीके से यह प्रक्रिया चलाने का भी आरोप लगाया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
- 3. केंद्रीय चुनाव आयुक्त पर संसदीय निगरानी या जानकारी के बिना मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के प्रपत्र 6 में अवैध रूप से संशोधन करने का आरोप लगाया गया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि यह संशोधन पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को पंजीकरण कराने और अपने मतदान अधिकार का प्रयोग करने से रोकने के उद्देश्य से किया गया था।
- 4. आरोप लगाया गया कि कुमार ने ईआरओनेट/ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर के उपयोग के माध्यम से भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के भीतर मतदाता सूची पर केंद्रीकृत नियंत्रण स्थापित किया था। इसमें दावा किया गया कि इससे स्थानीय मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को वैध मतदाताओं को सूची में जोड़ने से रोका गया, जबकि सूची से नाम हटाने में सुविधा प्रदान की गई।
- 5. कुमार पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों को निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर रखकर कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया। प्रस्ताव के अनुसार, चुनाव आयोग के सात सहयोगी कथित उल्लंघन में शामिल थे, जिसके चलते दो निष्कासित आयुक्तों ने कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज कराईं।
- 6. कुमार पर स्वतंत्र रूप से कार्य करने में विफल रहने और संविधान का पालन न करने का आरोप लगाया गया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि उन्होंने बार-बार विपक्षी दलों को निशाना बनाया, उनके नेताओं को सुनवाई से वंचित किया और उन्हें चुनाव आयोग के समक्ष अपनी चिंताएं उठाने से रोका। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि जब विपक्षी नेताओं को कथित तौर पर चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया और चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर उन पर हमला किया गया, तब वे चुप रहे।
समाजवादी पार्टी ने SIR को PDA पर हमला बताया
समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को PDA यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों पर सीधा हमला बताया। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया का सबसे ज्यादा असर कमजोर और वंचित तबकों पर पड़ सकता है।बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए पद का दुरुपयोग: नेहा बोरा
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बीजेपी के साथ कथित साजिश करने और अपने पद का दुरुपयोग कर पार्टी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। नेहा बोरा ने कहा कि यदि सत्ता में बैठे लोग वास्तव में जनता के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो यह महाभियोग संसद के भीतर होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि देशभर में लोग लंबे समय से इस तरह की कार्यवाही की मांग कर रहे हैं।मीरा कुमार ने कहा- लोकतंत्र की आत्मा पर हमला
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने INDIA ब्लॉक की प्रतीकात्मक कार्यवाही की शुरुआत की। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र की आत्मा पर हमला बताया। कार्यक्रम का प्रारूप संसद में महाभियोग की कार्यवाही जैसा रखा गया। मीरा कुमार ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे सबसे पहले अपनी बात रखेंगे। इसके बाद INDIA ब्लॉक के नेता, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का दावा करने वाले नागरिक अपनी बात रखेंगे।