मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की विपक्ष की मुहिम अब संसद के साथ-साथ सड़कों पर भी तेज होती दिख रही है। चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों के बीच बढ़ते विरोध के बीच आज, 30 सितंबर को INDIA ब्लॉक की अहम बैठक नई दिल्ली में होने जा रही है। बैठक में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई, संसद में हटाने का प्रस्ताव और देशव्यापी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।

CWC के प्रस्ताव को INDIA ब्लॉक में आगे बढ़ाने की तैयारी

कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में मंगलवार को ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया था। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी उठाई। इसके बाद INDIA ब्लॉक की बैठक का एजेंडा काफी हद तक इसी लाइन पर तैयार किया गया है। विपक्ष संसद में CEC के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाने के साथ-साथ देशभर में प्रदर्शन और जनसभाएं आयोजित करने की रणनीति पर विचार कर सकता है।
NDTV के मुताबिक, विपक्ष की प्रस्तावित मुहिम की शुरुआत दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली से किए जाने की चर्चा है। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन आयोजित करने की योजना है। बैठक में पहली रैली की तारीख की घोषणा भी संभव है।
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कौन-कौन नेता बैठक में होंगे?

बैठक में कांग्रेस की ओर से पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी शामिल होंगे। तृणमूल कांग्रेस की ओर से ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी और डेरेक ओ'ब्रायन के शामिल होने की जानकारी है।
वाम दलों के नेता भी बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन, RJD के तेजस्वी यादव, NCP की सुप्रिया सुले, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और PDP की महबूबा मुफ्ती के शामिल होने की बात कही गई है। शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे बैठक में वर्चुअल माध्यम से जुड़ेंगे। केरल कांग्रेस, VCK, MDMK, राजस्थान की RLP और BAP के प्रतिनिधि भी भाग ले सकते हैं। स्वतंत्र राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल को भी आमंत्रित किया गया है।

अखिलेश यादव बैठक में नहीं होंगे

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह पार्टी के वरिष्ठ नेता हरेंद्र मलिक प्रतिनिधित्व करेंगे। कांग्रेस के मुताबिक अखिलेश यादव राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया में व्यस्त हैं। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच किसी विवाद से अखिलेश की गैरमौजूदगी को जोड़ने वाली खबरों को खारिज किया है।

हालांकि, INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेदों का मुद्दा इस बैठक के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि AAP और DMK बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं, लेकिन दोनों दलों ने ज्ञानेश कुमार को हटाने के विपक्ष के प्रस्ताव का समर्थन करने की सहमति जताई है।

INDIA ब्लॉक से बाहर, फिर भी CEC के खिलाफ साथ AAP और DMK

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी (AAP) और DMK विपक्ष की ओर से तैयार किए जा रहे ज्ञानेश कुमार को हटाने के नोटिस का समर्थन करेंगी, भले ही दोनों दलों के INDIA ब्लॉक के साथ राजनीतिक संबंधों में दूरी आ चुकी है। प्रस्तावित नोटिस को कानूनी विशेषज्ञों से जांच कराने के बाद संसद के दोनों सदनों में पेश किए जाने की तैयारी है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि AAP और DMK इस समय INDIA ब्लॉक की बैठक में हिस्सा नहीं ले रही हैं। इसके बावजूद CEC के खिलाफ प्रस्ताव के मुद्दे पर दोनों दल विपक्ष के साथ खड़े हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह ज्ञानेश कुमार को हटाने की कोशिश का तीसरा प्रयास होगा।

SIR को लेकर विवाद बना मुख्य आधार

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की मौजूदा मुहिम की पृष्ठभूमि में मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विवाद है। हाल में सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में मतदाता सूची, मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया और चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी कम से कम 14 औपचारिक आपत्तियां दर्ज की गई थीं।
इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और आंतरिक चर्चा में अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।

संसद में हटाने की प्रक्रिया क्या है?

CEC को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है। विपक्ष को पहले संबंधित सदन में नोटिस देना होगा। इसके बाद यदि नोटिस स्वीकार होता है तो आरोपों की जांच के लिए समिति बनाई जा सकती है। आरोप सिद्ध होने की स्थिति में हटाने का प्रस्ताव दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित होना जरूरी है।
विपक्ष पहले भी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में नोटिस दे चुका है। अप्रैल में करीब 73 राज्यसभा सांसदों ने ऐसा प्रस्ताव दिया था। इससे पहले मार्च में भी लोकसभा और राज्यसभा के विपक्षी सांसदों की ओर से हटाने की कोशिश की गई थी, जिसे दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने पर्याप्त आधार नहीं होने के कारण स्वीकार नहीं किया था।

INDIA ब्लॉक की एकजुटता की भी परीक्षा

CEC के खिलाफ मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच व्यापक सहमति दिखाई दे रही है, लेकिन INDIA ब्लॉक की राजनीतिक एकता पर सवाल भी बने हुए हैं। AAP और DMK बैठक से बाहर रहते हुए भी प्रस्ताव का समर्थन कर रही हैं, जबकि अखिलेश यादव बैठक में स्वयं उपस्थित नहीं होंगे। दूसरी ओर, CPM महासचिव एम.ए. बेबी ने विपक्षी एकता को और व्यापक करने के लिए विभिन्न गैर-BJP दलों को साथ लाने का प्रस्ताव दिया है।
इसलिए 30 सितंबर की बैठक का महत्व केवल CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय करने तक सीमित नहीं है। इसमें यह भी स्पष्ट होने की कोशिश होगी कि विपक्ष चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर संसद और सड़क- दोनों मोर्चों पर कितनी समन्वित रणनीति बना पाता है।