भारत ने अपनी प्रतिक्रिया में पश्चिमी देशों और ख़ासकर NATO के सदस्य देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के अनुसार, 2022 के बाद से यूरोपीय संघ रूसी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (51%) और पाइपलाइन गैस (37%) का सबसे बड़ा खरीदार रहा है, जबकि NATO का सदस्य तुर्की रूसी तेल उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार (26%) रहा है। इसके बावजूद, यूरोप और NATO देशों ने भारत जैसे देशों पर रूस के साथ व्यापार को लेकर दबाव डाला है।
जायसवाल ने अपने बयान में इस ओर इशारा करते हुए कहा, 'हम दोहरे मापदंडों के खिलाफ विशेष रूप से चेता रहे हैं।' यह बयान इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि यूरोपीय देश खुद रूस से ऊर्जा आयात जारी रखते हुए भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों को प्रतिबंधों की धमकी दे रहे हैं।
रूटे की टिप्पणी के मायने
रूटे की टिप्पणी को भारत में कई हलकों में राजनयिक सीमाओं का उल्लंघन माना जा रहा है। NATO एक सैन्य गठबंधन है और उसके पास वैश्विक व्यापार को नियंत्रित करने का कोई अधिकार नहीं है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि रूटे का बयान अमेरिकी नीतियों के प्रति उनकी निष्ठा को दिखाता है, विशेष रूप से ट्रंप के हालिया बयानों के बाद।