प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 2023 में दुबई में 2028 में COP33 की मेजबानी की इच्छा जताई थी तो अब सरकार ने इसकी मेजबानी से पीछे हटने का फ़ैसला क्यों ले लिया? क्या इसका पीएम मोदी की छवि से कुछ लेना देना है? कम से कम कांग्रेस ने तो यही आरोप लगाया है। दरअसल, क्लाइमेट होम न्यूज़ की बुधवार की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2028 में कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़ यानी COP33 के 33वें संस्करण की मेज़बानी करने की अपनी बोली वापस ले ली है। इसी रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर बड़ा हमला किया है।

2023 में तो मेजबानी का दावा किया था!

कांग्रेस के महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि 1 दिसंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुबई में COP28 के दौरान भव्य तरीके से घोषणा की थी कि भारत 2028 के अंत में इस वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
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जयराम रमेश ने कहा, 'साफ़ तौर पर इरादा यह था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले इस बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का फायदा उठाया जाए। ठीक वैसे ही जैसे मोदी जी ने 2024 के लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले दिल्ली में G20 सम्मेलन के आयोजन में उठाया था।'

G20 सम्मेलन का फायदा कैसे उठाया था बीजेपी ने?

प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर 2023 में दिल्ली में आयोजित G20 सम्मेलन को 2024 लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले बड़ी चालाकी से चुनावी रणनीति में बदल दिया था। सरकार ने पूरे साल देश में 200 से अधिक G20 कार्यक्रम आयोजित किए, जिससे हर राज्य और जिले तक ‘विश्व गुरु भारत’ का संदेश पहुंचाने की कोशिश की गई। दिल्ली समिट के दौरान मोदी की तस्वीरें हर जगह पोस्टर्स, बसों, दीवारों और होर्डिंग्स पर छाई रहीं। G20 लोगो में कमल का फूल बीजेपी के चुनाव चिह्न जैसा दिखाया गया।

जी20 आयोजन के दौरान ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ जैसे नारे मोदी की छवि से जोड़े गए। समिट की सफलता नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन का सर्वसम्मति से पारित होना और अफ्रीकी संघ को G20 का स्थायी सदस्य बनाना भी था। इसे ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बनने और भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा के रूप में प्रचारित किया गया।

विपक्ष के आरोप

विपक्ष ने इस पर चुनावी प्रचार का आरोप लगाया, लेकिन बीजेपी ने इसे मोदी के नेतृत्व में भारत की नई ऊंचाई के रूप में पेश किया। बीजेपी ने पीएम मोदी की छवि ‘विश्व नेता’ और ‘मजबूत भारत’ के प्रतीक के रूप में दिखाया। इससे 2024 चुनाव में विकास, राष्ट्रवाद और वैश्विक सम्मान के मुद्दे पर बीजेपी को फायदा पहुँचा।

COP33 से पीछे हटने पर कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस अब इसी जी20 के आयोजन से जोड़कर पीएम मोदी पर COP33 की मेजबानी से पीछे हटने पर हमला कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि यह फ़ैसला मोदी सरकार की 2015 के पेरिस समझौते के प्रति प्रतिबद्धता को शब्दों और भावना दोनों रूप में दिखाता है। विपक्षी पार्टी ने कहा कि यह फ़ैसला सरकार की अल्पकालिक और मध्यम अवधि में ज्यादा महत्वाकांक्षी कार्बन कटौती लक्ष्यों को पूरा करने की सच्ची इच्छाशक्ति पर भी सवाल उठाता है।
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जयराम रमेश ने लिखा है, 'अचानक कल रात घोषणा हुई कि भारत इस प्रतिष्ठित 2028 के सम्मेलन की मेजबानी नहीं करेगा। इस अचानक फैसले के कोई कारण नहीं बताए गए। लेकिन यह मोदी सरकार की 2015 के पेरिस समझौते के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता को दोनों रूप में (अक्षर और भावना में) दिखाता है।'

आईपीसीसी की रिपोर्ट से डर गए?

उन्होंने बताया कि 2028 तक इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज यानी आईपीसीसी की सातवीं मूल्यांकन रिपोर्ट प्रकाशित हो सकती है। अगर भारत उस समय सम्मेलन की अध्यक्षता करता तो उसे नई सहमति बनाने के लिए ज्यादा दबाव पड़ता, जिसमें सिर्फ दूर के भविष्य के लिए नहीं बल्कि तत्काल के लक्ष्य को भी पूरा करने का दबाव होता।
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा, "क्या हम याद करते हैं कि कुछ साल पहले प्रधानमंत्री ने बच्चों के एक समूह से जलवायु परिवर्तन पर क्या कहा था? उन्होंने कहा था कि 'लोग बदल गए हैं, जलवायु नहीं बदली।' अजीब बात!"

मीडिया रिपोर्टों में सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत ने COP33 की मेजबानी का प्रस्ताव वापस ले लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2023 में दुबई में COP28 के दौरान भारत को मेजबान देश बनाने का प्रस्ताव रखा था। आमतौर पर COP की मेजबानी दो साल पहले तय की जाती है। सूत्रों ने बताया कि इस सप्ताह की शुरुआत में संबंधित अधिकारियों को भारत के फैसले की आधिकारिक जानकारी दी गई। हालांकि, सरकार ने इस अचानक फैसले के पीछे कोई खास कारण नहीं बताया है।
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सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि भारत ने 2028 की अपने अन्य प्रतिबद्धताओं की समीक्षा के बाद यह फ़ैसला लिया है। कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज यानी COP संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज यानी UNFCCC के तहत हर साल होने वाला बड़ा जलवायु सम्मेलन है। इसमें दुनिया भर के देश जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए चर्चा करते हैं और लक्ष्य तय करते हैं।

भारत ने अब तक केवल एक बार COP8 की मेजबानी की थी, जो 2002 में दिल्ली में हुई थी। कांग्रेस के इस हमले से राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष सरकार पर जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर गंभीर नहीं होने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।