ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ईरान ने भारत के सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं को औपचारिक निमंत्रण भेजा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहले ही आमंत्रित किया जा चुका था। ईरान की ओर से भेजे गए निमंत्रण में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और पवन खेड़ा शामिल हैं। इसके अलावा पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती तथा संसद के कई शिया सांसदों को भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। संसद के इन शिया सदस्यों में रुहुल्ला मेहदी, हाजी हनीफा, इमरान मसूद और अफजल अंसारी शामिल हैं।

ईरान का यह कदम भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ उसके कूटनीतिक संबंधों का संकेत माना जा रहा है। ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था। हालांकि, भारत सरकार ने प्रधानमंत्री के बजाय एक विशेष प्रतिनिधिमंडल भेजने का फ़ैसला किया है। भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। ईरान में अंतिम संस्कार के कार्यक्रम 4 जुलाई से 9 जुलाई तक तेहरान, क़ोम और मशहद में आयोजित किए जाएंगे।
ताज़ा ख़बरें

पीएम मोदी-ईरानी राष्ट्रपति की बातचीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच मंगलवार को ही पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति, संवाद और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया था। इसी बातचीत के दौरान भारत ने ईरान के राष्ट्रपति को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का भी औपचारिक निमंत्रण दिया है।

2026 में ब्रिक्स की रोटेटिंग प्रेसिडेंसी भारत के पास है। ईरान ने पहले भारत से अपील की थी कि वह ब्रिक्स प्लेटफॉर्म से यूएस-इसराइल की निंदा करे और 'आक्रमण रोकने' में सक्रिय भूमिका निभाए। चीन, रूस और ब्राजील ने हमलों की निंदा की, लेकिन भारत ने साफ़ तौर पर अमेरिका-इसराइल की आलोचना से परहेज किया। भारत ने केवल संयम, कूटनीति और संवाद की अपील की। इसके साथ ही इसने ईरान की उसके पड़ोसी देशों में कार्रवाई की आलोचना की। 

भारत में विपक्षी दलों ने भी ईरान के साथ सदियों पुराने संबंध को उतना महत्व नहीं देने के लिए मोदी सरकार की आलोचना की है।

विदेश सचिव ने जताई थी संवेदना

इस बीच, अयातुल्ला खामेनेई के निधन के बाद कुछ हफ़्ते पहले भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचे थे और वहां रखी गई शोक पुस्तिका में अपनी संवेदनाएं दर्ज की थीं। भारत सरकार ने उस समय भी कहा था कि भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंध आगे भी मजबूत बने रहेंगे।

भारत-ईरान संबंधों पर विशेष जोर

पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत और ईरान के संबंध लगातार बने हुए हैं। ईरान, भारत के लिए रणनीतिक नज़रिए से बेहद अमह साझेदार है। चाबहार बंदरगाह के ज़रिए भारत को पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरेशिया तक पहुंच मिलती है। इसके अलावा इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर परियोजना में भी दोनों देशों का बड़ा सहयोग है।

ईरान की ओर से भारत के लिए संदेश

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई के संभावित उत्तराधिकारी माने जा रहे मुजतबा खामेनेई ने भी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईद-उल-अजहा के शुभकामना संदेश के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत और ईरान के बीच आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित ऐतिहासिक मित्रता आने वाले समय में दोनों देशों के प्रयासों से और मजबूत होगी।

माना जा रहा है कि अंतिम संस्कार में भारत के सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं को निमंत्रण भेजना ईरान की ओर से एक बेहद अमह कूटनीतिक पहल है। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान भारत के साथ अपने लंबे समय के लिए राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाए रखना चाहता है, चाहे भारत की घरेलू राजनीति में कोई भी दल सत्ता में हो।