जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में छात्रों और फैकल्टी के शामिल होने को लेकर IIT रुड़की के बाद डीयू और जेएनयू की चेतावनी को कांग्रेस ने छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार पर हमला क़रार दिया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इन एडवाइजरी को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से डराना स्वीकार नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इसे छात्रों को धमकाने वाला प्रोपेगैंडा क़रार दिया है।

कांग्रेस नेताओं की यह कड़ी प्रतिक्रिया तब आई है जब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी जेएनयू ने शुक्रवार को अपने छात्रों और कर्मचारियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इससे पहले गुरुवार देर रात को डीयू यानी दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी ऐसी ही एडवाइजरी जारी करते हुए छात्रों और फैकल्टी को चेताया। कुछ दिनों पहले ही आईआईटी रुड़की ने भी ऐसी ही एडवाइजरी जारी की थी। इन संस्थानों ने छात्रों से जंतर-मंतर और आसपास के प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने तथा कानून और विश्वविद्यालय के नियमों का पालन करने की अपील की है।

राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना

एक्स पर दिल्ली विश्वविद्यालय की एडवाइजरी को रिप्लाई करते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

राहुल ने लिखा, 'लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने वाले छात्रों को धमकाने की हिम्मत कैसे हुई? याद रखिए, समय आने पर जवाबदेह आपको ही ठहराया जाएगा।'

विश्वविद्यालयों का इस्तेमाल प्रोपेगैंडा के लिए: खड़गे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि छात्र इसलिए सड़कों पर हैं क्योंकि सरकार अब देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों का इस्तेमाल 'प्रोपेगैंडा' के लिए कर रही है।

खड़गे ने कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेकर शिक्षा व्यवस्था पर सार्थक चर्चा शुरू करने के बजाय मोदी सरकार इन सम्मानित विश्वविद्यालयों का इस्तेमाल छात्रों को डराने-धमकाने के लिए कर रही है। अब समझिए कि देश का युवा सड़कों पर क्यों उतर रहा है। अब आप जानते हैं कि बीजेपी ने पिछले 12 सालों में शिक्षा व्यवस्था को कैसे नुकसान पहुँचाया है!'

JNU की एडवाइजरी में क्या?

शुक्रवार को जारी एडवाइजरी में जेएनयू प्रशासन ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों से जिम्मेदारी से व्यवहार करने और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने को कहा है। इसके साथ ही छात्रों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट के सार्वजनिक प्रदर्शनों से जुड़े निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय समुदाय के सदस्य जंतर-मंतर और उसके आसपास होने वाले प्रदर्शनों में शामिल होने या वहां जाने से बचें।

जेएनयू ने यह भी कहा कि 'सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय भी जिम्मेदारी बरती जाए। यदि कोई व्यक्ति लागू कानूनों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ विश्वविद्यालय के अनुशासनात्मक नियमों के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।'

डीयू ने क्या चेताया है?

जेएनयू से पहले दिल्ली विश्वविद्यालय गुरुवार रात को अपने छात्रों और कर्मचारियों को इसी तरह की एडवाइजरी जारी कर चुका है। डीयू ने एडवाइजरी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा है, 'आपकी सुरक्षा हमारे लिए बहुत अहम है। कृपया ध्यान दें कि जंतर मंतर पर कोई भी गैर-कानूनी सभा या प्रदर्शन करना सख्ती से वर्जित है। माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ऐसे कार्यक्रमों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इन गतिविधियों से छात्रों की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा हो सकता है और उनकी पढ़ाई तथा भविष्य के करियर पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए सभी छात्र जंतर मंतर से दूर रहें, अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें और कानून का पालन करें। इसके अलावा, सावधानी बरतें क्योंकि इस स्थिति को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारा फर्जी और गलत खबरें और सामग्री बनाई और फैलाई जा रही है। अपनी सुरक्षा पहले रखें।'

इससे पहले आईआईटी रुड़की ने भी ऐसी ही एडवाइजरी जारी की थी। इन संस्थानों ने छात्रों से प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने, सुरक्षा का ध्यान रखने और क़ानून का पालन करने की अपील की है। विश्वविद्यालयों का कहना है कि यह सलाह छात्रों की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जारी की गई है।

नीट आंदोलन के बीच बढ़ी सियासी बहस

नीट पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र संगठन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

हाल के दिनों में इस आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस और विपक्षी दल छात्रों के समर्थन में सरकार पर निशाना साध रहे हैं, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि एडवाइजरी केवल सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जारी की गई है। अब विश्वविद्यालयों की एडवाइजरी और उस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं ने छात्र आंदोलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।