जंतर मंतर को बतौर प्रदर्शन स्थल वापस लेने का आंदोलन 14 अक्टूबर को जारी रहा। काफी प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने जंतर मंतर पहुंचने से पहले रोक दिया। सीपीएम के सांसद को हिरासत में लिया गया। पूरे विपक्ष ने जंतर मंतर को फिर से हासिल करने का संकल्प दोहराया है।
जंतर मंतर प्रोटेस्ट साइट को फिर से हासिल करने के लिए आंदोलन
दिल्ली के जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के निर्धारित स्थल की सूची से हटाए जाने के बावजूद वहां प्रदर्शन रुक नहीं पा रहे हैं। जंतर मंतर के आसपास मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन बुधवार को भी जारी रहा। बुधवार को छात्र संगठनों, वामपंथी कार्यकर्ताओं, विपक्षी नेताओं और Cockroach Janata Party (CJP) के समर्थकों ने जंतर-मंतर पहुंचने या उसके आसपास विरोध दर्ज कराने की कोशिश की। दिल्ली पुलिस ने कई जगह मार्च रोक दिया और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन को जंतर-मंतर की ओर जाते समय विंडसर प्लेस पर हिरासत में लिया गया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के कार्यकर्ताओं को फिरोजशाह रोड से जंतर-मंतर की ओर बढ़ते समय बैरिकेड लगाकर रोक दिया गया। इसी बीच, CJP के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा गया है।
जंतर मंतर भी बड़ा मुद्दा बना
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के बाद वहां विरोध करने की कोशिशें रुक जाएंगी, या प्रदर्शनकारी दूसरे रास्तों से अपनी आवाज उठाते रहेंगे? बुधवार की घटनाएं बताती हैं कि फिलहाल आंदोलन का केंद्र सिर्फ चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध नहीं, बल्कि विरोध प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर के इस्तेमाल का अधिकार भी बन गया है।जंतर-मंतर की ओर बढ़े SFI-DYFI कार्यकर्ता, पुलिस ने रोका मार्च
14 अक्टूबर को SFI और DYFI के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर फिरोजशाह रोड से जंतर-मंतर की ओर संयुक्त मार्च निकालने की कोशिश की। दिल्ली पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश भी की। इसके बाद DYFI के सदस्यों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। इस कार्रवाई से साफ है कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का असर केवल वहां पहुंचने वाले प्रदर्शनकारियों तक सीमित नहीं है। आसपास की सड़कों से वहां तक मार्च करने की कोशिश करने वाले संगठनों को भी पुलिस की रोक का सामना करना पड़ रहा है।SFI और DYFI का प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। इस तरह छात्र संगठनों का आंदोलन अब सीधे तौर पर उस विवाद से जुड़ गया है जिसमें एक तरफ चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं और दूसरी तरफ विरोध दर्ज कराने के लिए उपलब्ध सार्वजनिक स्थानों को लेकर टकराव बढ़ रहा है।
जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश में CPM के राज्यसभा सांसद हिरासत में
जंतर-मंतर की ओर बढ़ने वालों में सिर्फ छात्र और युवा कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। सीपीएम के राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन को बुधवार को जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश के दौरान विंडसर प्लेस पर दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि जंतर-मंतर को लंबे समय से राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों, सामाजिक आंदोलनों और नागरिक समूहों के विरोध प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है। अब वहां पहुंचने की कोशिश ही पुलिस कार्रवाई का कारण बन रही है।बुधवार को ही NSUI और इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बाद में प्रदर्शनकारियों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। इस तरह विरोध की गतिविधियां जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रहीं। संसद मार्ग पुलिस स्टेशन और उसके आसपास भी प्रदर्शन और हिरासत की घटनाएं सामने आईं।
सीजेपी का देशभर में जंतर मंतर बनाने और तिरंगा फहराने का ऐलान
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके बुधवार को नागपुर से दिल्ली पहुंचे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश में तिरंगा फहराना अपराध बन गया है। उन्होंने अपने सहयोगियों की हिरासत की तुलना ब्रिटिश शासन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों पर हुई कार्रवाई से की। CJP ने सोशल मीडिया पर कहा कि वह देशभर में जंतर मंतर बनाकर तिरंगा फहराएगा और जेल भेजे जाने के बावजूद पीछे नहीं हटेगा। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना और शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का अधिकार है।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद CJP के नेताओं ने मंगलवार सुबह वहां पहुंचकर तिरंगा फहराया था। इसके बाद सौरव दास, आशुतोष रांका और संगठन के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे को हिरासत में लिया गया। बुधवार को दास और रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया। अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
विपक्षी दलों का जंतर-मंतर वापस लेने का ऐलान
जंतर-मंतर विवाद पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं।
- कांग्रेस और नेता विपक्ष राहुल गांधीः कांग्रेस सांसद ने बुधवार को कहा कि जंतर-मंतर लोकतांत्रिक भावनाओं को व्यक्त करने का प्रमुख माध्यम रहा है और इसे दोबारा हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि यह भारत में लोकतंत्र बहाल करने के उद्देश्य से जुड़ा एक साझा आंदोलन है।
- राष्ट्रीय जनता दल (RJD): सांसद मनोज झा ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक स्थल जनता की आवाज है और लोग इसे वापस लेंगे।
- आम आदमी पार्टी (AAP): अरविंद केजरीवाल ने CJP नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजने की कार्रवाई की आलोचना करते हुए सवाल किया कि अपने ही देश में अपना राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपराध कैसे हो सकता है।
- CPI और CPI(ML): सीपीआई महासचिव डी. राजा और CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने इसे असहमति की आवाज दबाने और विरोध के अधिकार को सीमित करने से जोड़ा।
- तृणमूल कांग्रेस: महुआ मोइत्रा ने भी CJP नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत की निंदा की और युवाओं के समर्थन में एकजुट रहने की बात कही।
- शिवसेना (UBT): संजय राउत ने INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दावों पर सवाल उठाए।
जंतर-मंतर पर आंदोलन का अगला कदम क्या होगा?
14 अक्टूबर की घटनाओं से तीन बातें सामने आती हैं।
- पहली, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के बाद भी आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। छात्र संगठनों ने वहां मार्च करने की कोशिश की, CPI(M) के सांसद को रास्ते में हिरासत में लिया गया और NSUI तथा युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध दर्ज कराया।
- दूसरी, CJP के नेताओं की न्यायिक हिरासत ने आंदोलन को नया राजनीतिक मुद्दा दे दिया है। अभिजीत दिपके के दिल्ली पहुंचने, विपक्षी नेताओं के समर्थन और राहुल गांधी के बयानों से यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना हुआ है।
- तीसरी, अब संघर्ष केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं है। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और सार्वजनिक स्थानों पर असहमति दर्ज कराने के अधिकार को लेकर भी टकराव तेज हो गया है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है, तो क्या उसके आसपास और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर आंदोलन जारी रहेगा? बुधवार को सामने आई घटनाएं बताती हैं कि प्रदर्शनकारी पीछे हटने के बजाय अलग-अलग रास्तों से अपनी आवाज उठाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, पुलिस प्रतिबंधों को लागू करने पर जोर दे रही है।