कल्याण बनर्जी ने कहा, "सब पूरी तरह से दिखावा है। हमें बताया गया था कि 24 और 25 जनवरी को बैठक होगी। अब, आज (शुक्रवार) की बैठक के लिए, एजेंडे को ही बदल दिया गया है।" जेपीसी में विपक्षी सदस्यों का इस बात पर जबरदस्त ऐतराज है कि बिना पूर्व सूचना एजेंडा बदल दिया जाता है। शुक्रवार को भी यही हुआ। करीब 11 बजे सदस्य जब बैठक के लिए पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि बैठक का एजेंडा बदल गया है। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि नए एजेंडे और मसौदे में प्रस्तावित बदलाव पर उन्हें रिसर्च करने का समय ही नहीं दिया गया। इस घटनाक्रम से सरकार की मंशा को समझा जा सकता है। वो तमाम प्रस्तावों में मनमाना बदलाव करके इस विवादित विधेयक को पास कराना चाहते हैं।
वक्फ की जमीनों का नेरेटिव क्यों बनाया जा रहा हैः तमाम राज्यों खासकर यूपी में वक्फ जेपीसी बैठकों के दौरान बीजेपी पूरा एक नेरेटिव तैयार कर रही है। लखनऊ में दो दिन पहले हुई बैठक के दौरान यूपी की बीजेपी सरकार ने जो नजरिया पेश किया, उसे मीडिया में खूब उछाला गया। सरकार ने जेपीसी को बताया कि राज्य में 78 फीसदी वक्फ की जमीनें सरकारी की हैं। यहां तक कि उसने लखनऊ में ऐतिहासिक छोटे और बड़े इमामबाड़े, अयोध्या में बेगल के महल को भी सरकारी प्रॉपर्टी बता दी। जबकि ये सारी ऐतिहासिक प्रॉपर्टी ब्रिटिश कॉल से ही वक्फ संपत्तियां रही हैं, जिनकी देखरेख भारतीय पूरातत्व सर्वेक्षण करता है।