जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिका के भारत में राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए विशेष दूत सर्जियो गोर के बयान के बाद भारत, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। श्रीनगर की अपनी पहली यात्रा के दौरान गोर ने जम्मू-कश्मीर को “भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा” बताया। पाकिस्तान ने इस बयान को लेकर इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रभारी राजदूत नताली बेकर को तलब किया और अमेरिका के सामने कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया। इसी बीच नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर लगे सुरक्षा बैरिकेड, ट्रैफिक बोलार्ड और कतार नियंत्रित करने वाले ढांचे भी हटा दिए गए हैं।

श्रीनगर में सर्जियो गोर ने क्या कहा था?

सर्जियो गोर ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि “यह भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है” और वह पहली बार यहां आए हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता की भी तारीफ की और कहा कि वह इस क्षेत्र को देखकर बेहद उत्साहित हैं। 
गोर ने उमर अब्दुल्ला के साथ अपनी बैठक को अच्छा और सौहार्दपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बैठक के बाद कुछ मुद्दों पर आगे काम किया जाएगा और वह इन बातों को वॉशिंगटन लेकर जाएंगे। उन्होंने भारत और जम्मू-कश्मीर के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा भी जताई। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गोर छह साल में जम्मू-कश्मीर का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी राजदूत हैं। वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाते हैं और दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए विशेष दूत की भूमिका भी निभा रहे हैं।
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अमेरिका की कश्मीर यात्रा एडवाइजरी में बदलाव के संकेत

गोर के बयान का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू अमेरिका की जम्मू-कश्मीर संबंधी यात्रा चेतावनी है। अमेरिका फिलहाल जम्मू-कश्मीर के लिए लेवल-4 यानी “Do Not Travel” एडवाइजरी जारी करता है। गोर ने संकेत दिया कि वॉशिंगटन इस चेतावनी की समीक्षा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर इसे नीचे किया जा सकता है।
गोर ने कहा कि अमेरिका समय-समय पर अपनी यात्रा चेतावनियों का पुनर्मूल्यांकन करता है और जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति में हुए सुधार को देखते हुए इस चेतावनी को डाउनग्रेड करने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, मुख्यमंत्री और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने क्षेत्र को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनका कहना था कि जम्मू-कश्मीर की खूबसूरती और यहां मौजूद अवसरों को देखते हुए बड़ी संख्या में अमेरिकी पर्यटक यहां आना पसंद कर सकते हैं।
यात्रा एडवाइजरी में बदलाव जम्मू-कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। अमेरिकी सरकार की सर्वोच्च स्तर की चेतावनी विदेशी पर्यटकों के लिए मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक दोनों तरह की बाधा मानी जाती है। खास तौर पर पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं बढ़ी थीं। उस हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की मौत हुई थी। पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी गोर से जम्मू-कश्मीर की यात्रा एडवाइजरी की समीक्षा करने की अपील की थी। उनका कहना था कि पर्यटन पर निर्भर हजारों परिवारों के लिए यह एडवाइजरी दुनिया और कश्मीर के बीच एक दीवार की तरह है।

पाकिस्तान ने अमेरिका को क्यों तलब किया?

गोर के बयान के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रभारी राजदूत नताली बेकर को इस्लामाबाद में तलब किया और उनके सामने कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे “strong demarche” बताया और गोर के बयान को गैर-जिम्मेदाराना तथा तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया।
पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताए जाने को स्पष्ट रूप से खारिज किया। उसका कहना है कि जम्मू-कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित क्षेत्र है और इसका अंतिम निर्धारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों तथा कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना बाकी है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि गोर का बयान अमेरिका के कश्मीर संबंधी लंबे समय से चले आ रहे रुख के विपरीत है। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि यह बयान अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की सर्वोच्चता के प्रति अमेरिका की घोषित प्रतिबद्धता के अनुरूप नहीं है।
पाकिस्तान ने अमेरिका से यह भी आग्रह किया कि उसके सार्वजनिक बयान जम्मू-कश्मीर के विवादित दर्जे के संबंध में उसकी पुरानी नीति के अनुरूप होने चाहिए। पाकिस्तान ने विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पहले भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश का भी उल्लेख किया।

अमेरिका की पुरानी नीति से कितना अलग है गोर का बयानः गोर का बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अतीत में अमेरिकी अधिकारी कश्मीर मुद्दे पर अक्सर “कश्मीरी लोगों की इच्छाओं” का उल्लेख करते रहे हैं। पाकिस्तान इस भाषा को अपने पक्ष के समर्थन के रूप में देखता रहा है, जबकि भारत तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को लगातार खारिज करता रहा है और कश्मीर को भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा बताता रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने 2019 में और उसके बाद भी कई मौकों पर भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश की थी। ऐसे में गोर का जम्मू-कश्मीर को सीधे तौर पर “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” बताना पाकिस्तान के लिए विशेष रूप से संवेदनशील माना जा रहा है।

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी गोर के बयान को अमेरिकी नीति के पुराने संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक सामान्य तौर पर भारत का हर राज्य भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन कश्मीर को लेकर अमेरिका की पुरानी नीति और ट्रंप की मध्यस्थता संबंधी टिप्पणियों के संदर्भ में गोर का बयान अलग महत्व रखता है। उन्होंने यह भी संभावना जताई कि गोर ने शायद अपने निर्धारित दायरे से आगे जाकर बयान दिया हो और पाकिस्तान के विरोध के बाद अमेरिका अपनी पारंपरिक स्थिति दोहरा सकता है। दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने कहा कि गोर के बयान से भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूती मिल सकती है। हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह बयान वास्तव में अमेरिकी नीति में बदलाव का संकेत है। यदि ऐसा है तो यह कश्मीर पर अमेरिका की वर्षों पुरानी नीति से अलग होगा और पाकिस्तान के साथ उसके संबंधों को प्रभावित कर सकता है।

दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बैरिकेड हटाए गए

कश्मीर को लेकर भारत-पाकिस्तान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक हलचल के बीच गुरुवार को नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर लगे कई सुरक्षा ढांचे भी हटा दिए गए। अधिकारियों ने सड़क पर लगे ट्रैफिक बोलार्ड, सुरक्षा बैरिकेड और कतार नियंत्रित करने वाले क्यू लाइनर हटा दिए। इनमें पाकिस्तान मिशन के वीजा सेक्शन के पास लगाए गए ढांचे भी शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक ये ढांचे हाई कमीशन के निर्धारित परिसर की सीमा से बाहर सड़क की एक लेन में लगे हुए थे। मौके से सामने आए दृश्यों में टूटे हुए रेलिंग, गेट, धातु के फ्रेम, छत की चादरें, ईंटें और कंक्रीट का मलबा दिखाई दिया। वीजा सेक्शन के बाहर लगे “Window 1”, “Pakistani Passport Only” और “Window-5 / Collection of Visa Applications” जैसे संकेत भी दिखाई दिए।
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यह कार्रवाई इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि इसके करीब तीन दिन पहले पाकिस्तान में इस्लामाबाद स्थित भारतीय हाई कमीशन के बाहर सुरक्षा बैरिकेड हटाए गए थे। इसलिए दिल्ली की कार्रवाई को एक तरह की जवाबी या “टिट-फॉर-टैट” कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारत सरकार या संबंधित अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा है कि पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर की संरचनाएं हटाने का संबंध सर्जियो गोर के कश्मीर संबंधी बयान पर पाकिस्तान के विरोध से है। अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से इस कार्रवाई का कारण स्पष्ट नहीं किया है।

एक ही समय पर तीन मोर्चों पर बढ़ी हलचलः सर्जियो गोर का बयान, पाकिस्तान का अमेरिकी राजनयिक को तलब करना और दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर सुरक्षा ढांचे हटाया जाना—तीनों घटनाएं ऐसे समय सामने आई हैं जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं।

एक तरफ अमेरिका का वरिष्ठ राजनयिक जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति में सुधार की बात कर रहा है और यात्रा चेतावनी में बदलाव की संभावना जता रहा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान इस बयान को अपने कश्मीर संबंधी रुख और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के विपरीत बता रहा है। वहीं भारत और पाकिस्तान की राजधानियों में दोनों देशों के राजनयिक मिशनों के बाहर सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी एक-दूसरे के कदमों का जवाब देने की स्थिति दिखाई दे रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सर्जियो गोर का बयान सिर्फ उनके व्यक्तिगत या तत्काल कूटनीतिक आकलन तक सीमित रहेगा या आने वाले समय में यह अमेरिकी नीति में किसी व्यापक बदलाव का संकेत साबित होगा। इसी तरह यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वॉशिंगटन जम्मू-कश्मीर की लेवल-4 “Do Not Travel” एडवाइजरी में वास्तव में कोई बदलाव करता है या नहीं। यदि एडवाइजरी में कमी आती है तो इससे जम्मू-कश्मीर के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और भारत-अमेरिका संबंधों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जबकि पाकिस्तान इसे अपनी कश्मीर कूटनीति के लिए बड़ा झटका मान सकता है।