loader
फ़ोटो क्रेडिट - https://indianairforce.nic.in/

चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी में है भारत सरकार?

क्या भारत चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारियों में जुटा हुआ है। अंग्रेजी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, भारत सरकार में इस बात को लेकर सहमति बन रही है कि ड्रैगन के साथ बातचीत तो जारी रहनी चाहिए लेकिन ज़रूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद के बीच बीते कई दिनों से भारत ने बॉर्डर पर अपनी तैयारियां तेज़ कर दी हैं। भारत के लड़ाकू विमान सुखोई, मिग, अपाचे और चिनूक सीमा पर लगातार उड़ान भर रहे हैं।

इसके अलावा भारत अपने मारक योद्धा भीष्म टैंक सहित युद्ध में दुश्मन की सांसें उखाड़ देने वाले बाक़ी साजो-सामान और जवानों को भी सीमा पर तैनात कर रहा है। भारत-चीन सीमा विवाद पर देखिए वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष का वीडियो - 

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, भारत सरकार के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत में टकराव और लड़ाई जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ है। इस तरह की बातचीत में शामिल रहे एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘हम टकराव को बढ़ाना नहीं चाहते लेकिन हम चीन के सामने झुकेंगे नहीं। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं, हम उनका मुकाबला करेंगे।’ 
ताज़ा ख़बरें

इस शीर्ष अधिकारी ने अख़बार की ओर से यह पूछे जाने पर कि सैन्य संघर्ष के क्या परिणाम हो सकते हैं, क्या सरकार इस बारे में विचार कर रही है, उन्होंने कहा, ‘सरकार का यह मत है कि अगर आप परिणामों के बारे में सोचेंगे तो आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे।’ 

ड्रैगन का अड़ियल रूख़

भारत सरकार के इस रूख़ के पीछे अहम कारण चीन के रवैये को बताया गया है। क्योंकि भारत के 20 जवानों की शहादत के बाद भी बीजिंग की ओर से सांत्वना का एक शब्द तक नहीं आया। उल्टा वह भारत को ही इस झड़प के लिए जिम्मेदार बता रहा है।

शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘चीन जो करने के लिए कह रहा है, उस पर भी वह अमल नहीं कर रहा है। उसका अब तक यही कहना है कि भारत की ग़लती है और निर्माण के काम के लिए भारत जिम्मेदार है।’ 

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि अप्रैल के महीने में जब चीन की ओर से निर्माण किए जाने की ख़बरें आई थीं, तभी उस इलाक़े में पेट्रोलिंग और रेकी बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। प्रधानमंत्री के भारत की सीमाओं में कोई नहीं घुसा है, के बयान पर शीर्ष अधिकारी ने कुछ ज़्यादा कहने से इनकार कर दिया। 

देश से और ख़बरें

अगर युद्ध होता है तो चीन के साथ आर्थिक संबंधों पर क्या असर होगा, सरकार को व्यापार के मामलों में सलाह देने वाले एक अन्य शीर्ष अधिकारी ने इस सवाल के जवाब में अख़बार से कहा, ‘इस बारे में कोई फ़ैसला करना आसान नहीं है लेकिन भारत में चीन के ख़िलाफ़ जबरदस्त माहौल है।’ उन्होंने कहा कि इसलिए भारत के पास कूटनीतिक और सैन्य ताक़त के रास्ते आगे बढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। 

उन्होंने कहा कि भारत अब 1962 का देश नहीं है और इसके विश्व में दूसरे देशों के साथ अच्छे संबंध हैं और हमें इसका फायदा उठाना होगा। उन्होंने कहा कि चीन ख़ौफ़ पैदा करना चाहता है और ख़ुद को सुपर पावर के रूप में स्थापित करना चाहता है। 

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें