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एक और मदरसे के टीचर पर हमला, कब रुकेंगे मुसलमानों पर हमले?

झारखंड में तबरेज़ अंसारी की भीड़ से पिटाई की मौत का मामला अभी ताज़ा ही है कि कोलकाता में मदरसे के एक टीचर पर ‘जय श्री राम’ न कहने पर हमला करने और ट्रेन से धक्का देने की घटना सामने आई है। सवाल यह उठ रहा है कि इस तरह की घटनाएँ रुकेंगी या नहीं? सवाल यह भी है कि क्यों देश में मुसलमानों को ‘जय श्री राम’ और ‘वंदे मातरम’ के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है।

अंग्रेजी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, यह घटना पिछले हफ़्ते हुई है। रेलवे पुलिस का इस बारे में कहना है कि उस व्यक्ति पर हमला ट्रेन में चढ़ने और उतरने के दौरान हुए विवाद में हुआ है।

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अख़बार के मुताबिक़, हाफ़िज़ मोहम्मद शाहरूख़ हलदार दक्षिण 24 परगना जिले में ट्रेन नंबर 34531 से हुगली से कैनिंग की ओर जा रहे थे। हलदार ने कहा, ‘ट्रेन के एक डिब्बे में कुछ लोगों ने उन्हें देखकर ‘जय श्री राम’ का नारा लगाना शुरू कर दिया। उन्होंने मुझसे भी ऐसा करने को कहा। जब मैंने ऐसा करने से मना किया तो उन्होंने मुझे पीटना शुरू कर दिया और कोई भी मुझे बचाने नहीं आया। उस दौरान ट्रेन धाकुड़िया और पार्क सर्कस स्टेशन के बीच थी। उन्होंने मुझे पार्क सर्कस स्टेशन पर ट्रेन से धक्का दे दिया। इसके बाद कुछ स्थानीय लोगों ने मेरी मदद की।’
हलदार दक्षिण 24 परगना के बासंती के रहने वाले हैं। हलदार ने कहा कि वह केस दर्ज कराने के बाद लिए तोपसिया पुलिस स्टेशन गए लेकिन उन्हें कहा गया कि पहले वह जीआरपी के पास जाएँ। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 323, 325 और अन्य धाराओं में मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि वह हलदार की बात सही है या नहीं, इसकी जाँच कर रही है। रेलवे पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक़, हलदार को थोड़ा-बहुत चोटें आई हैं और उन्हें चितंरजन अस्पताल ले जाया गया। अधिकारी के मुताबिक़, ऐसा लगता है कि यात्रा के दौरान ट्रेन में चढ़ने-उतरने के झगड़े के दौरान उन पर हमला किया गया। मामले की जाँच जारी है और अभी तक इस मामले में किसी को भी गिरफ़्तार नहीं किया गया है। रेलवे पुलिस के अधिकारियों ने कहा है कि आरोपियों का पता लगने पर उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 
अब फिर वही सवाल खड़ा होता है कि आख़िर ये घटनाएँ रुक क्यों नहीं रही हैं। क्यों आए दिन इस तरह की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं।
तबरेज़ के मामले में पुलिस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी ख़बर के मुताबिक़, पुलिस ने मोटरसाइकिल चोरी के कबूलनामे का तो तबरेज़ का बयान दर्ज कर लिया था लेकिन भीड़ ने उसे पीटा, इसका बयान दर्ज नहीं किया गया। इससे यही सवाल खड़ा होता है कि क्या पुलिस किसी दबाव में तबरेज़ की पिटाई करने वाले लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है।
वेबसाइट फ़ैक्ट चेकर. इन के मुताबिक़, नफ़रत के आधार पर अपराध को अंजाम देने का इस साल यह 11वाँ मामला है। इन घटनाओं में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है और 22 लोग घायल हुए हैं।
अगर 2009 से 2019 के बीच हुई ऐसी घटनाओं को देखें तो 59 फ़ीसदी मामलों में हिंसा का शिकार होने वाले मुसलिम थे और इसमें से 28% घटनाएँ पशु चोरी और पशुओं की तस्करी से संबंधित थीं। आंकड़े यह भी बताते हैं कि ऐसी 66% घटनाएँ बीजेपी शासित राज्यों में हुईं जबकि 16% घटनाएँ कांग्रेस शासित राज्यों में।
सवाल यह है कि आख़िर भीड़ के द्वारा हिंसा के मामलों में मुसलमानों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है। हाल में ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं, जब मुसलमानों को ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्री राम’ कहने के लिए मजबूर किया गया और न कहने पर उनके साथ मारपीट हुई।
तबरेज़ अंसारी की पिटाई वाले वीडियो में भी यह देखा गया कि भीड़ उसे बुरी तरह पीटने के साथ ही ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ का नारा लगाने के लिए कह रही है। कुछ दिन पहले ही दिल्ली में मोहम्मद मोमीन नाम के मदरसे के एक टीचर को ‘जय श्री राम’ बोलने को कहा गया और ऐसा न कहने पर उसे कार से टक्कर मारकर घायल कर दिया गया। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों के भीतर क़ानून का ख़ौफ़ पूरी तरह ख़त्म हो गया है या उनके ख़िलाफ़ कोई सख़्त कार्रवाई न होने के कारण ही वे ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

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