प्रधानमंत्री मोदी ने क्या देश के नाम संबोधन को भी महिला आरक्षण के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल किया? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी पर आरोप क्यों लगाया कि उनके भाषण में कांग्रेस का नाम 59 बार लिया गया, जबकि महिलाओं का जिक्र बेहद कम रहा?
महिला आरक्षण पर संबोधन देकर अब पीएम मोदी और फँस गए हैं? विपक्षी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी के शनिवार को दिए गए राष्ट्र के नाम संबोधन पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने अपने 30 मिनट के भाषण में कांग्रेस का नाम 59 बार लिया, जबकि महिलाओं का नाम मुश्किल से कुछ ही बार लिया। इससे साफ़ हो जाता है कि उनकी प्राथमिकता क्या है। इसके साथ ही कांग्रेस ने मोदी के भाषण को प्रधानमंत्री पद की गरिमा को गिराने वाला क़रार दिया है।
पीएम के संबोधन को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने एक्स पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट लिखी और इसमें प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा, 'एक हताश और निराश प्रधानमंत्री के पास पिछले 12 साल में दिखाने लायक कुछ भी नहीं है। उन्होंने राष्ट्र के नाम आधिकारिक संबोधन को एक राजनीतिक भाषण बना दिया। इसमें गाली-गलौज, कीचड़ उछालना और सीधे-सीधे झूठ भरे थे।'
'आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन'
खड़गे ने एक्स पर लिखा कि लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के हार जाने के बाद मोदी जी ने यह भाषण दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने आगामी दो बड़े राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया। खड़गे ने कहा, 'मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट पहले से लागू है। फिर भी प्रधानमंत्री ने सरकारी पद का इस्तेमाल करके अपने विरोधियों पर हमला किया। यह लोकतंत्र और भारतीय संविधान का अपमान है।' विधेयक में क्या था प्रावधान?
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पास नहीं हो सका। सरकार को 298 वोट मिले जबकि विपक्ष के 230 सांसदों ने एकजुट होकर इसके खिलाफ वोट किया। इस विधेयक में लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था ताकि 2029 के चुनाव से महिलाओं को 33% आरक्षण मिल सके। लेकिन विपक्ष ने कहा कि यह असल में महिलाओं का आरक्षण बिल नहीं, बल्कि डिलिमिटेशन का बिल था।
खड़गे की तीन बड़ी मांगें
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से तीन मांगें रखीं-
- महिलाओं को तुरंत आरक्षण दो: 2023 के कानून के तहत मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही 33% आरक्षण लागू कर दो। महिलाओं को उनका हक अभी से दो।
- डिलिमिटेशन को आरक्षण बिल से न जोड़ो: यह बिल महिलाओं का आरक्षण बिल नहीं था, बल्कि शुद्ध डिलिमिटेशन बिल था। दोनों को अलग-अलग रखो।
- 140 करोड़ भारतीयों से माफी मांगो: खड़गे ने कहा कि मोदी जी को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए।
'महिलाएं बीजेपी की प्राथमिकता नहीं'
खड़गे ने दावा किया कि महिलाएं बीजेपी की प्राथमिकता नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मोदी जी ने कांग्रेस का नाम 59 बार लिया और महिलाओं का नाम बहुत कम। इससे पूरा देश समझ गया कि उनकी असली प्राथमिकता क्या है। कांग्रेस सही इतिहास के पक्ष में खड़ी है, इसलिए बीजेपी उसे टारगेट कर रही है।'खड़गे ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने 2010 में राज्यसभा में महिलाओं का आरक्षण बिल पास करवाया था और 2023 के बिल का भी समर्थन किया था। खड़गे ने तंज कसते हुए कहा, "बीजेपी को अपने खुद के बिल को नोटिफाई करने में 3 साल लग गए। इससे उनकी ‘नारी शक्ति’ के प्रति प्रतिबद्धता साफ दिखती है!”
बीजेपी महिला विरोधी?
खड़गे ने बीजेपी को 'महिलाओं के खिलाफ' बताया। उन्होंने हाथरस, उन्नाव और हरियाणा की महिला पहलवानों की घटनाओं का जिक्र किया। साथ ही बिलकिस बानो मामले में दोषियों को रिहा करने और बलात्कारियों को माला पहनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'बीजेपी ने अपराधियों और बलात्कारियों को माला पहनाई है। साढ़े बारह साल सत्ता में रहने के बाद भी प्रधानमंत्री के पास देश के लिए कुछ नहीं था, सिर्फ एक राजनीतिक भाषण था।'टीएमसी ने किया हमला
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा कि महिलाओं का सबसे बड़ा अपमान यह है कि उन्हें डिलिमिटेशन बिल पास कराने के लिए बहाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। अन्य विपक्षी दलों ने भी प्रधानमंत्री के आरोपों को गलत बताया और कहा कि वे जनता को गुमराह कर रहे हैं।
'पीएम में मीडिया से सामना करे की हिम्मत नहीं'
जयराम रमेश ने पीएम के संबोधन पर हमला किया है। उन्होंने कहा, "किसी मौजूदा प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन उस पद की गरिमा से जुड़ा होता है। इसका उद्देश्य बिना किसी पक्षपात के राष्ट्र के संकल्प और आत्मविश्वास को मजबूत करना होता है। लेकिन आज का बेहद निराशाजनक और पूरी तरह से पक्षपात से भरा भाषण – राष्ट्र के नाम संबोधन की बजाय एक ‘निराशा से भरा संबोधन’ ज्यादा लगा – जिसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में देना ज़्यादा उचित होता। लेकिन कल रात लोकसभा में मिली करारी विधायी हार से विचलित प्रधानमंत्री में अब भी मीडिया का सामना करने की हिम्मत नहीं है।"उन्होंने आगे कहा, "प्रधानमंत्री ने अपने संविधान संशोधन बिल को लोकसभा से पारित न करा पाने के लिए माफी मांगी है। लेकिन वास्तव में उन्हें महिलाओं के नाम पर परिसीमन के एक कुटिल प्रस्ताव को ज़बरदस्ती पारित कराने के अपने बेशर्मी और कपट से भरे प्रयासों के लिए माफी मांगनी चाहिए थी। इस पूरे मामले में उनकी नीयत साफ नहीं, स्पष्ट रूप से खोटी है। अगर उनकी नीयत को समझना हो, तो यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’, जो सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पास हो गया था, उसे 30 महीने की देरी के बाद 16 अप्रैल 2026 की देर रात को अधिसूचित क्यों किया गया। उनके जीवन भर के आचरण को देखते हुए, महिला सम्मान की उनकी बातें पूरी तरह से पाखंड लगती हैं।"
पीएम ने भाषण में क्या कहा था?
प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को 30 मिनट के देश के नाम संबोधन में विपक्ष पर आरोप लगाया था कि उन्होंने महिलाओं के सुधार को राजनीतिक कारणों से रोका। उन्होंने कहा कि विधेयक के हारने पर कुछ विपक्षी नेता खुश हुए, जो महिलाओं के सम्मान का अपमान है। लेकिन खड़गे और विपक्ष का कहना है कि वे महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में हैं, बस उसे डिलिमिटेशन से अलग करके तुरंत लागू किया जाए।महिला आरक्षण पर बीजेपी जितना नैरेटिव 'गढ़ने' की कोशिश कर रही है, उतनी ही फँसती दिख रही है। यह मुद्दा अब देशभर में गरमागरम बहस का विषय बन गया है। विपक्ष प्रधानमंत्री से माफी मांगने और महिलाओं को तुरंत आरक्षण देने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार इसे विपक्ष की राजनीति बता रही है। आने वाले दिनों में इस पर संसद और राजनीतिक मैदान में और तीखी बहस होने की संभावना है।