पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा पर बड़ा विवाद हो गया है। यह घटना शनिवार को हुई, जब राष्ट्रपति 9वीं अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने के लिए उत्तर बंगाल गई थीं। इस दौरान प्रोटोकॉल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति पर बीजेपी के इशारे पर राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे शर्मनाक बताया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संथाल समुदाय से हैं और वे इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि थीं। आरोप है कि कार्यक्रम मूल रूप से बिधाननगर के एक बड़े मैदान में होना था, लेकिन प्रशासन ने इसे सिलीगुड़ी के पास गोसाईंपुर में बदल दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि मैदान बदलने से बहुत से संथाल लोग कार्यक्रम में नहीं आ पाए। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि कोई संथालों को एकजुट नहीं होने देना चाहता, उन्हें पढ़ना-लिखने देना नहीं चाहता, उन्हें मजबूत नहीं होने देना चाहता।' उन्होंने कहा कि बिधाननगर का मैदान बहुत बड़ा था, वहाँ 5 लाख लोग आसानी से आ सकते थे, लेकिन प्रशासन ने कहा कि जगह छोटी और भीड़भाड़ वाली है।

ममता स्वागत करने क्यों नहीं पहुँचीं?

राष्ट्रपति ने दुख जताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने नहीं आईं। उन्होंने ममता बनर्जी को छोटी बहन पुकारते हुए कहा, “गोसाईंपुर बहुत दूर है। शायद उन्हें लगा कि राष्ट्रपति आएंगी और चली जाएंगी क्योंकि वहां कोई नहीं होगा। मैं सच में बहुत दुखी हूं। आम तौर पर, जब राष्ट्रपति कहीं जाते हैं, तो मुख्यमंत्री आते हैं, मंत्री आते हैं। सीएम नहीं आईं। मुझे पता है कि राज्यपाल का तबादला हो गया है, इसलिए वह नहीं आ सकीं। कार्यक्रम की तारीख़ पहले तय हो गई थी… लेकिन कोई बात नहीं। मैं भी बंगाल की बेटी हूं। ममता बनर्जी मेरी बहन हैं… मेरी छोटी बहन… शायद वह मुझसे नाराज़ हैं। लेकिन कोई बात नहीं, मैं उनके अच्छे होने की दुआ करती हूं।' कार्यक्रम के आयोजक नरेश मुर्मू ने भी पुलिस पर आरोप लगाया कि उन्होंने जगह चार बार बदली और राष्ट्रपति के लिए अलग शौचालय तक नहीं बनाया। कई संथालों को बिना सिक्योरिटी पास के अंदर नहीं आने दिया गया।

बीजेपी के कहने पर राजनीति न करें: ममता

इसके बाद कोलकाता में वोटर लिस्ट से नाम कटने के ख़िलाफ़ धरने बैठीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, '
हम राष्ट्रपति का सम्मान करते हैं। लेकिन अफसोस है कि उन्हें बीजेपी का एजेंडा बेचने के लिए भेजा गया है। माफ़ कीजिएगा मैडम, लेकिन आप बीजेपी के जाल में फँस गई हैं। चुनाव के समय बीजेपी के कहने पर राजनीति न करें। आपने एसआईआर के बारे में कुछ नहीं कहा। कितने आदिवासियों के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं? कृपया पता करें।
ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल सीएम

आदिवासियों पर अत्याचार पर चुप्पी क्यों?

ममता ने आगे कहा कि राज्य सरकार इस कार्यक्रम की भागीदार नहीं थी। यह एक निजी संगठन का कार्यक्रम था। उन्होंने कहा, 'आप बीजेपी के लिए प्राथमिकता हैं, मेरी प्राथमिकता जनता है। मैं धरने पर हूँ। दो दिन पहले पता चला कि आप आ रही हैं। मुझे नहीं पता कौन आयोजक है।' उन्होंने पूछा, 'जब मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ या मणिपुर में आदिवासियों पर अत्याचार होते हैं, तब आप क्यों चुप रहती हैं? बंगाल में आदिवासियों के लिए क्या किया गया है, देखिए।'
ममता ने एक्स पर पोस्ट भी किया कि प्रोटोकॉल में कोई चूक नहीं हुई। अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि राष्ट्रपति को किसी ने स्वागत नहीं किया। उन्होंने लिखा, 'एक निजी आयोजक इंटरनेशनल संथाल काउंसिल ने राष्ट्रपति को कॉन्फ्रेंस में आमंत्रित किया था। एडवांस सिक्योरिटी के संपर्क के बाद जिला प्रशासन ने राष्ट्रपति सचिवालय को लिखकर बताया कि आयोजक ठीक से तैयार नहीं लग रहा था; यह चिंता टेलीफोन पर भी जताई गई थी।'
उन्होंने लिखा, ‘राष्ट्रपति सचिवालय की एडवांस टीम 5 मार्च को आई थी, उन्हें इंतज़ामों की कमी के बारे में बताया गया था, फिर भी प्रोग्राम तय समय पर जारी रहा।' उन्होंने लिखा, 'माननीय राष्ट्रपति को सिलीगुड़ी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के मेयर, दार्जिलिंग के डीएम और सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के सीपी ने राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा साझा किए गए मंजूर लाइनअप के अनुसार ही उनका स्वागत किया और विदा किया। पश्चिम बंगाल की सीएम लाइनअप या मंच प्लान का हिस्सा नहीं थीं। जिला प्रशासन की तरफ से कोई प्रोटोकॉल में चूक नहीं हुई।' उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बीजेपी अपनी पार्टी के एजेंडे के लिए देश की सबसे ऊंची कुर्सी का अपमान और गलत इस्तेमाल कर रही है।

प्रधानमंत्री का ममता पर हमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, 'यह शर्मनाक और अभूतपूर्व है। लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाले सभी लोग दुखी हैं। राष्ट्रपति जी, जो खुद आदिवासी हैं, उनके दर्द ने पूरे देश को दुखी किया है।' पीएम ने कहा कि टीएमसी सरकार ने हद पार कर दी है। उनका प्रशासन राष्ट्रपति का अपमान करने के लिए जिम्मेदार है। संथाल संस्कृति को इतने हल्के में लिया जाना अफसोस की बात है। राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है, उसका सम्मान होना चाहिए।
विपक्षी बीजेपी और कांग्रेस ने भी ममता पर हमला बोला। बीजेपी नेता राहुल सिन्हा ने कहा कि बंगाल में भारत-विरोधी सरकार चल रही है। कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि राष्ट्रपति देश की सर्वोच्च पद पर हैं, ऐसा व्यवहार शोभा नहीं देता।
टीएमसी के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि पूरा मामला चुनाव आयोग की वजह से है। हमारी मुख्यमंत्री जनता के अधिकार के लिए लड़ रही हैं। राष्ट्रपति बहुत अच्छी इंसान हैं, वे ममता की मजबूरी समझेंगी।

यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ है, जिससे राजनीतिक गर्मी बढ़ गई है। सभी पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।