BCI Manan Kumar Mishra Controversy: बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन का इस्तीफा अब संस्था के अंदर से ही मांगा जा रहा है। BCI सह-अध्यक्ष वाईआर सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा पर बहुत गंभीर आरोप लगाए हैं।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के भीतर अब उसके चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ असंतोष खुलकर सामने आ गया है। BCI के सह-अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता वाईआर सदाशिव रेड्डी ने मनन कुमार मिश्रा से चेयरमैन पद से इस्तीफा देने की मांग की है। रेड्डी ने कहा है कि “द बार डिजर्व्स बेटर” यानी वकीलों को इससे बेहतर नेतृत्व मिलना चाहिए। बता दें कि मनन कुमार मिश्रा बीजेपी का राज्यसभा सांसद भी हैं। उन पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) आरोप लगा चुकी है कि वो बार काउंसिल ऑफ को मोदी सरकार के इशारे पर चला रहे हैं।
रेड्डी ने मिश्रा के इस्तीफे की मांग के पीछे कई गंभीर आरोप और मुद्दे गिनाए हैं। इनमें NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के छात्रों के खिलाफ BCI की कार्रवाई, करीब 150 करोड़ रुपये की धनराशि के कथित डायवर्जन, परिवार के सदस्यों की नियुक्तियों से जुड़े आरोप और BCI के कामकाज को लेकर उठे सवाल शामिल हैं।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया किसी की निजी संपत्ति नहींः रेड्डी
लाइव लॉ के मुताबिक बार के सह अध्यक्ष रेड्डी ने इस संबंध में पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि चुप रहना “इस देश के वकीलों द्वारा मुझ पर जताए गए भरोसे के साथ विश्वासघात” के समान होगा। रेड्डी ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) किसी व्यक्ति की “निजी संपत्ति” नहीं है, बल्कि यह अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत स्थापित एक वैधानिक संस्था है। उन्होंने कहा कि BCI के पास देश के लाखों वकीलों के योगदान से जुटाई गई धनराशि है और यह कानूनी पेशे में प्रवेश को नियंत्रित करने वाली नियामक शक्तियों का इस्तेमाल करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि BCI की धनराशि और उसकी शक्तियों का इस्तेमाल संस्था और पूरे वकालत समुदाय के हित में होना चाहिए, न कि उस व्यक्ति के लिए जो चेयरमैन के पद पर बैठा है।'इस देश की बार को इससे बेहतर नेतृत्व मिलना चाहिए'
रेड्डी ने मांग की है कि मनन मिश्रा पत्र मिलने के 15 दिनों के भीतर अपने पद से इस्तीफा दें। उन्होंने BCI की एक विशेष बैठक बुलाकर पत्र में उठाए गए मुद्दों पर विचार करने की मांग भी की है। इसके साथ ही उन्होंने BCI और BCI Trust PEARL First के खातों का विशेष ऑडिट कराने की भी मांग की है।उन्होंने आगे मांग की कि BCI या उससे जुड़ा कोई भी ट्रस्ट अथवा संस्था कानून कॉलेजों, विश्वविद्यालयों या उनके प्रबंधन से किसी भी तरह का योगदान, दान या भुगतान तत्काल स्वीकार करना बंद करे। उन्होंने BCI की वेबसाइट पर संस्था के कर्मचारियों की पूरी जानकारी प्रकाशित करने की भी मांग की। रेड्डी ने कहा, “मेरे मन में आपके प्रति कोई व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं है।” उन्होंने बताया कि वह करीब एक दशक से मनन मिश्रा के साथ काउंसिल में काम कर चुके हैं।
हालांकि, रेड्डी ने कहा कि “जब तक आप चेयर पर बने रहेंगे, संस्था इससे उबर नहीं पाएगी।” उन्होंने अपने पत्र का समापन करते हुए कहा कि “इस देश की बार को अपने ही काउंसिल से वर्तमान में जो मिल रहा है, उससे बेहतर मिलना चाहिए। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि उसे यह अवसर दें।”
मनन मिश्रा ने कहा- इस्तीफा नहीं दूंगाः दूसरी ओर, मनन कुमार मिश्रा ने अपने इस्तीफे की मांग को खारिज कर दिया। हालांकि उन्होंने यह बात शुक्रवार को कही थी। उनकी इस्तीफे की मांग कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी की थी। CJP ने अपने समर्थकों से “लीगल कॉकरोच” यानी “कानूनी कॉकरोच” कहकर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। मनन मिश्रा ने वकीलों के लिए इस शब्द के इस्तेमाल पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “आगे से ‘लीगल कॉकरोच’ शब्द इस्तेमाल करने की हिम्मत मत करना। मैं आपको यह बता रहा हूं। कोई वकील कॉकरोच नहीं हो सकता। वकील एक सम्मानित वर्ग से आते हैं और वे अत्यंत बुद्धिमान लोगों का समूह हैं।”
BCI के अंदर से उठी आवाज कितनी महत्वपूर्ण?
वाईआर सदाशिव रेड्डी BCI के सह-अध्यक्ष होने के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता भी हैं। ऐसे में मौजूदा चेयरमैन के इस्तीफे की उनकी सार्वजनिक मांग BCI के नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद को और गंभीर बनाती है। रेड्डी ने NALSAR प्रकरण के अलावा वित्तीय मामलों और नियुक्तियों से जुड़े आरोपों को भी इस्तीफे की मांग के आधार के रूप में सामने रखा है। उनके मुताबिक करीब 150 करोड़ रुपये की धनराशि के कथित डायवर्जन और परिवार से जुड़े लोगों की नियुक्तियों जैसे मुद्दे भी चिंता का विषय हैं।बार काउंसिल के नेतृत्व पर बढ़ता दबाव
NALSAR विवाद ने BCI की शक्तियों, उसके नियामक अधिकारों और छात्रों तथा कानून संस्थानों के साथ उसके व्यवहार को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ शांतिपूर्ण असहमति व्यक्त करने पर उनके पेशेवर भविष्य पर इस तरह की कार्रवाई की जा सकती है। एक ओर BCI ने बाद में अपना कठोर आदेश वापस लिया, वहीं दूसरी ओर बार एसोसिएशन और अब BCI के सह-अध्यक्ष की ओर से इस्तीफे की मांग सामने आने से विवाद और गहरा गया है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मनन कुमार मिश्रा इन आरोपों और बढ़ते दबाव के बीच अपने पद से इस्तीफा देंगे या BCI के भीतर इस विवाद का कोई संस्थागत समाधान निकलेगा। मामले में आगे की जानकारी और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं आने का इंतजार है।बॉम्बे बार एसोसिएशन भी मांग चुका है इस्तीफा
मनन मिश्रा के खिलाफ अब केवल BCI के भीतर से ही सवाल नहीं उठे हैं। इससे पहले बॉम्बे बार एसोसिएशन ने भी NALSAR छात्रों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उनकी आलोचना की थी और कहा था कि उन्हें BCI चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था। 18 अगस्त को लिखे पत्र में एसोसिएशन ने मिश्रा की माफी को “बेहद देर से” की गई कार्रवाई बताया था। एसोसिएशन के मुताबिक यह माफी वास्तविक पश्चाताप की अभिव्यक्ति के बजाय स्थिति को शांत करने की कोशिश जैसी लगती है। बॉम्बे बार एसोसिएशन ने कहा था कि BCI चेयरमैन के रूप में मिश्रा के आचरण ने कानूनी पेशे की गरिमा, संवैधानिक स्वतंत्रताओं, निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को प्रभावित किया है। एसोसिएशन ने यह भी कहा कि जब मिश्रा अभी भी चेयरमैन पद पर बने हुए हैं तो उनकी माफी को वास्तविक पश्चाताप नहीं माना जा सकता।NALSAR छात्रों के खिलाफ कार्रवाई से शुरू हुआ विवाद
मामला NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के छात्रों के एक विरोध से जुड़ा है। विश्वविद्यालय के छात्रों के एक समूह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने के फैसले पर आपत्ति जताई थी। शुरुआत में अंतिम वर्ष के LLB बैच के करीब 70 छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को इस संबंध में अपना प्रतिनिधित्व दिया था। बाद में दूसरे बैचों के छात्रों ने भी इस अभियान का समर्थन किया।इसके बाद BCI ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि NALSAR से 2026 में कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले किसी भी छात्र का अधिवक्ता के रूप में नामांकन अगले आदेश तक न किया जाए। BCI ने NALSAR से उन छात्रों की पहचान बताने वाली प्रमाणित रिपोर्ट भी मांगी थी, जिन्होंने कथित तौर पर CJI के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के खिलाफ अभियान शुरू किया, उसे संगठित किया, समन्वित किया या छात्रों को लामबंद किया था।
BCI की इस कार्रवाई को लेकर कानूनी बिरादरी और अन्य पक्षों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया हुई। विरोध बढ़ने के बाद BCI ने छात्रों के नामांकन को फ्रीज करने वाला अपना आदेश वापस ले लिया, हालांकि NALSAR को जांच से संबंधित निर्देश जारी रहने की बात सामने आई थी। इसके बाद मनन कुमार मिश्रा ने 15 अगस्त 2026 को माफी भी मांगी। लेकिन इस माफी से विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।