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बीजेपी के कई और नेताओं ने भी दिए हैं किसानों पर भद्दे बयान

कुछ ही दिन पहले मोदी मंत्रिमंडल में शामिल की गईं मीनाक्षी लेखी ने किसानों को कथित रूप से मवाली कह दिया है। हालांकि उनका कहना है कि उनके बयान को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया और उनके बयान से किसी को दुख पहुंचा हो तो वह अपने शब्दों को वापस लेती हैं। 

पहले जानते हैं कि मीनाक्षी लेखी ने क्या कहा। नई दिल्ली सीट से सांसद मीनाक्षी शुक्रवार को पत्रकारों से बात कर रही थीं। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को हुई हिंसा में शामिल लोग किसान नहीं हैं, वे लोग मवाली हैं और किसान के पास वक़्त नहीं है कि वह जंतर-मंतर पर आकर बैठे। 

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लेकिन सवाल यह कि बीजेपी नेता किसानों को लेकर इस तरह के बयान देते ही क्यों हैं जिसे लेकर कोई विवाद खड़ा हो। बीजेपी में अकेली मीनाक्षी ही नहीं बल्कि कई नेता ऐसे हैं जिन्होंने किसानों के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया है। 
जब से किसान दिल्ली के बॉर्डर्स पर आकर बैठे हैं, बीजेपी नेताओं ने उन्हें खालिस्तानी, वामपंथी बताने से लेकर इस आंदोलन में चीन-पाकिस्तान का हाथ होने और विदेशी फंडिंग के कई आरोप लगा दिए हैं।

जनवरी, 2021 में राजस्थान की सुरक्षित दौसा सीट से सांसद जसकौर मीणा ने कहा था कि किसान आंदोलन में आतंकवादी बैठे हुए हैं, उन्होंने एके-47 ली हुई है और खालिस्तान का झंडा लगाया हुआ है। मीणा ने यह भी कहा था कि मोदी युग पुरूष हैं और इस देश को जगत गुरू बनाने की ओर ले जा रहे हैं। 

केंद्र सरकार भी सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी है कि किसानों के प्रदर्शन में खालिस्तानियों की घुसपैठ हो चुकी है। हरियाणा सरकार के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने बीते साल कहा था, ‘किसान का नाम आगे करके विदेशी ताकतें जैसे- चीन और पाकिस्तान या दुश्मन देश, हमारे देश को अस्थिर करना चाहते हैं।’ 

इसी तरह बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम ने भी कहा था कि किसान आंदोलन में खालिस्तान और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जा रहे हैं और कट्टरपंथियों ने इस आंदोलन को हाईजैक कर लिया है। 

Meenakshi lekhi mawali comment on farmers - Satya Hindi

दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी ने बीते साल दिसंबर में कहा था कि किसानों के आंदोलन में ऐसे कुछ लोगों और संगठनों की मौजूदगी, जिन्होंने शाहीन बाग़ में सीएए और एनआरसी का विरोध किया था, से पता चलता है कि टुकड़े-टुकड़े गैंग किसानों के आंदोलन में शाहीन बाग़ को दोहराने की कोशिश कर रहा है। 

गृह मंत्रालय से जेड सिक्योरिटी हासिल करने वालीं कंगना रनौत ने किसान आंदोलन में शामिल होने आ रहीं बुजुर्ग महिला के लिए कहा था कि ये सौ रुपये लेने आ रही हैं। 

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‘बात न मानें तो आतंकवादी’

कृषि क़ानूनों के पुरजोर विरोध के कारण एनडीए से नाता तोड़ने वाली शिरोमणि अकाली दल के प्रधान और राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने इस तरह के बयानों को लेकर मोदी सरकार को घेरा था और कहा था, ‘अगर सरकार की बात मान लें तो देशभक्त और न मानें तो आतंकवादी, इससे ख़राब बात और क्या हो सकती है।’ 

अब सवाल यही है कि बीजेपी अपने इन नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी या नहीं। कार्रवाई की उम्मीद नहीं है क्योंकि जितने भी नेताओं ने अब तक किसानों को लेकर ग़लत बयानबाज़ी की है, एक के भी ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 

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