महान पेंटर एमएफ हुसैन
जांच अधिकारी को संबंधित पेंटिंग्स को जब्त करने का निर्देश देते हुए, पटियाला हाउस कोर्ट के जज साहिल मोंगा ने कहा, “शिकायतकर्ता ने पेंटिंग को जब्त करने के लिए आईओ (जांच अधिकारी) को निर्देश देने के लिए एक अर्जी दी है। तमाम तथ्यों और हालात को देखते हुए पुलिस के जांच अधिकारी को उक्त पेंटिंग को जब्त करने और रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश दिया जाता है।
कलाकार हुसैन के खिलाफ भारत में कई जगह दक्षिणपंथी संगठनों ने एफआईआर दर्ज कराई। उनकी प्रदर्शनियों पर हमले हुए। 2006 में हुसैन ने भारत छोड़ दिया। वो कतर पहुंचे। कतर ने उन्हें वहां की नागरिकता पूरे सम्मान के साथ दे दी। उन्हें वहां घर दिया गया। कतर सरकार ने उनकी कई पेंटिंग्स को खरीद लिया। लेकिन भारत को हुसैन नहीं भूले। इसी गम में वो बीमार पड़ गये। 9 जून 2011 को लंदन में इलाज के दौरान 95 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उन्हें 10 जून 2011 को लंदन के कब्रिस्तान में दफन किया गया।
एमएफ हुसैन ने उस समय कहा था- "जब संघ परिवार के संगठनों ने मुझे निशाना बनाया, तो सभी चुप रहे। राजनीतिक नेतृत्व, कलाकार या बुद्धिजीवियों सहित कोई भी मेरे लिए बोलने के लिए आगे नहीं आया। लेकिन मैं इस तथ्य को जानता हूं कि भारत के 90 प्रतिशत लोग मुझसे प्यार करते हैं। वे मेरे साथ हैं।" हुसैन ने कहा, "कुछ राजनेताओं समेत केवल 10 फीसदी लोग ही मेरे खिलाफ हैं।"