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जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय शासन लंबे समय के लिए नहीं : मोदी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को आश्वासन देते हुए कहा है कि यह क्षेत्र लंबे समय तक केंद्र शासित क्षेत्र बना नहीं रहेगा। राष्ट्र के नाम सम्बोधन में उन्होंने इस बात पर ख़ास ज़ोर दिया कि नई व्यवस्था अस्थायी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जल्द ही चुनाव कराए जाएँगे। 

आपका प्रतिनिधि आपके बीच से ही चुना जाएगा। जैसे पहले आपके विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री होते थे, आने वाले समय में भी होंगे। मौजूदा व्यवस्था अस्थायी है। विधानसभा चुनाव जल्द कराया जाएगा।


नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

'नया नेतृत्व उभरेगा'

प्रधानमंत्री ने बिना नाम लिए एक या दो परिवारों के लोगों के सत्ता में काबिज रहने की बात कही और इसके साथ ही युवाओं से कहा कि आने वाले समय के नेता वे हैं, वे राज्य का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने कहा, 'दशकों के परिवारवाद ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं को नेतृत्व का मौक़ा ही नहीं दिया। अब वे जल्द ही इसमें भाग लेंगे, अपनी काम ख़ुद संभालेंगे।' 

आर्थिक विकास

प्रधानमंत्री ने राज्य के विकास की बात कही और ज़ोर देकर कहा कि अनुच्छेद 370 में किए गए बदलाव की वजह से राज्य में निवेश होगा, राज्य का आर्थिक विकास होगा और रोज़गार के नए मौक़े बनेंगे। 
मोदी ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर के उद्योग धंधों, उत्पादों का पूरी दुनिया मे प्रचार किया जाएगा और उनके निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा। वह कहवा हो या केसर, सेब हो खुबानी, उनका निर्यात बढ़ाया जाएगा, जिससे लाखों की तादाद में रोज़गार के मौके बनेंगे।'
इसी क्रम में मोदी ने कहा कि लद्दाख़ बनेगा ईको- टूअरिज़म का सबसे बड़ा केंद्र। यहाँ सोलर पावर का विकास होगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। यहाँ शांति लौटेगी तो फ़िल्म की शूटिंग होगी। उन्होंने हिन्दी, तेलुगु और दूसरे फ़िल्म उद्योग से आग्रह किया कि वे जम्मू-कश्मीर में शूटिंग करें। 
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम सम्बोधन के दौरान ही एलान किया कि जम्मू-कश्मीर राज्य और यहाँ की केंद्रीय ईकाइयों में तमाम खाली पड़े पद भरे जाएँगे, जिससे बड़ी तादाद में रोज़गार के मौके बनेंगे। 

वित्तीय सुविधाएँ

प्रधानमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 370 में बदलाव की वजह से राज्य के लोगों को वे वित्तीय सुविधाएँ मिलेंगी, जो अब तक नहीं मिलती रही हैं। उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर के सरकारी कर्मचारियों को वे वित्तीय सुविधाएँ नहीं मिलती हैं, जो पूरे देश के कर्मचारियों को मिलती हैं। इसमें पुलिस के लोग भी शामिल हैं।'

विरोध का सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी कार्यशैली से हट कर लोगों को आश्वस्त किया कि जो लोग अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर सरकार के फ़ैसले से सहमत नहीं हैं, वे उनका भी सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा, 'जो लोग हमारे फ़ैसले से सहमत नहीं हैं, हम उनकी आपत्तियों, संवेदनशीलता का ख़्याल रखेंगे। यह लोकतंत्र की परंपरा के अनुकूल ही है कि कुछ लोग हमसे सहमत हैं, कुछ असहमत। जो हमसे असहमत हैं, वे अब हमसे जुड़ें, हमारी मदद करें।' 
प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन की बड़ी खूबी यह रही कि उन्होंने राज्य में नई शुरुआत की बात की, लोगों को उम्मीद की किरण दिखाई और उन्हें आश्वस्त किया कि यह अस्थायी व्यवस्था है। उन्होंने आतंकवाद के ख़ात्मे के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की बात की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि राज्य के लोगों को वह इस मुहिम में शामिल करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य के लोग ही पाकिस्तान को जवाब देंगे। 
लेकिन उन्होंने राष्ट्र के नाम सम्बोधन में घाटी में गिरफ़्तार नेताओं की रिहाई पर कुछ नहीं कहा। नेशनल कॉन्फ्रेंस के फ़ारूक अब्दुल्ला और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की महबूबा मुफ़्ती जैसे नेता गिरफ़्तार हैं। प्रधानमंत्री इस पर चुप रहे। इससे यह सवाल उठता है कि उनकी बातें लोगों के घाव को किस हद तक भर सकेंगी, लोगों को कितना संतुष्ट कर पाएंगी। 
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