नालसार लॉ छात्र विवाद ने तूल पकड़ लिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने शुक्रवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा से इस्तीफा मांगा है। सौरव दास का बयान बहुत कड़ा है। उन्होंने एक्स पर लिखा है- नैतिक दायित्व के तहत मनन कुमार मिश्रा को इस्तीफा देना चाहिए। अदालतों के अंदर और बाहर मौजूद कॉकरोचों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसा हो। सीजेपी के संयोजक अभिजीत दिपके ने गुरुवार रात को ही मिश्रा का इस्तीफा मांगा था। लेकिन मिश्रा ने इस्तीफा देने की जगह आज शुक्रवार 14 अगस्त को सफाई दी। बार काउंसिल अध्यक्ष को आज भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी फटकारा है।
गुरुवार को BCI ने राज्य बार कौंसिलों को निर्देश दिया था कि वे NALSAR के 2026 के लॉ ग्रैजुएट्स का नामांकन न करें। इस आदेश के पीछे विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत की प्रस्तावित भागीदारी का विरोध करने वाले छात्रों के एक वर्ग का अभियान बताया गया था। चौतरफा आलोचना के बाद BCI ने अपने आदेश को वापस ले लिया। BCI का कहना था कि अधिकांश छात्र निर्दोष हैं और कुछ छात्रों के कथित आचरण के कारण पूरे बैच को सजा नहीं दी जा सकती। सीजेआई ने आज शुक्रवार को इसके लिए बार काउंसिल को फटकार लगाई। सीजेआई ने कहा यह विवाद उनके और छात्रों के बीच में है। इसके बीच में बार काउंसिल ऑफ इंडिया कहां से कूद पड़ी।

मनन मिश्रा की सफाई और CJP नेताओं को संदेश

विवाद के बाद CJP के नेताओं अभिजीत दीपके और सौरव दास द्वारा उठाए गए सवालों पर BCI अध्यक्ष मनन मिश्रा ने शुक्रवार को जवाब दिया। उन्होंने कहा: "वास्तव में छात्रों के हितों को नुकसान पहुँचाने का हमारा कोई इरादा नहीं था। यह निर्णय अचानक लिया गया था, और जैसे ही काउंसिल के संज्ञान में यह आया, इसे तुरंत रोक दिया गया। काउंसिल के सभी वरिष्ठ सदस्यों ने इस पर चर्चा की और सर्वसम्मति से इस निर्णय को पूरी तरह से वापस ले लिया। अब इस मामले में किसी भी प्रकार की जाँच का सवाल ही नहीं उठता।"
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CJP नेताओं को संबोधित करते हुए मिश्रा ने स्पष्ट किया: "चाहे अभिजीत दिपके हों या सौरव दास, मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि जहाँ तक छात्रों के हितों का सवाल है, कोई समस्या नहीं है। छात्रों के हितों की रक्षा करना मेरी, BCI और इसके सदस्यों की जिम्मेदारी है। यदि कोई भ्रम या संवादहीनता (Communication Gap) रही है, तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि BCI के लिए छात्रों के हित सर्वोपरि हैं। जो अभिजीत दिपके भी चाहते हैं, BCI भी वही चाहती है। इसलिए यहाँ हितों का कोई टकराव नहीं है।"

14 करोड़ रुपये के खर्च के आरोपों का खंडन

CJP प्रवक्ता सौरव दास द्वारा लगाए गए उस आरोप पर, जिसमें उन्होंने मनन मिश्रा पर बैठकों और सम्मेलनों में 14 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप लगाया था, BCI अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि 14 करोड़ का यह आंकड़ा कहाँ से आया। BCI विभिन्न विषयों पर सेमिनार तो आयोजित करती है, लेकिन बैठकों और सम्मेलनों पर इस तरह की भारी राशि खर्च करने जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई संवादहीनता हुई है तो वे CJP नेताओं से बात करने को तैयार हैं।

ABVP और अन्य संगठनों की प्रतिक्रिया

BCI के शुरुआती फैसले की कानूनी क्षेत्र के दिग्गजों, राजनीतिक नेताओं, कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने कड़ी आलोचना की थी।आरएसएस (RSS) से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने BCI के इस कदम का विरोध करते हुए कहा: "NALSAR के 2026 के ग्रैजुएट्स के नामांकन को रोकने का BCI का निर्णय और फिर उसे वापस लेना एक बेहद त्रुटिपूर्ण दृष्टिकोण की ओर इशारा करता है। जिन निर्दोष छात्रों की कोई भूमिका नहीं थी, उन्हें जिम्मेदार ठहराना न तो न्यायसंगत है और न ही स्वीकार्य। BCI जैसे संस्थानों को ऐसे मनमाने निर्देश जारी करने से बचना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर निर्णय तथ्यों, उचित प्रक्रिया और न्याय पर आधारित हो।"

CJP ने बताया इसे अपनी 'जीत'

BCI द्वारा आदेश वापस लिए जाने के बाद CJP नेताओं ने इसे अपनी जीत बताया। CJP के सौरव दास ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ हुए आंदोलन के समय के चर्चित जुमले को दोहराते हुए सोशल मीडिया पर लिखा— "It’s done bro" (यह काम पूरा हो गया है भाई)।