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ड्रोन भेजकर ले लेता हूं किसी भी काम की जानकारी: मोदी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ड्रोन का इस्तेमाल कृषि, रक्षा, आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में बढ़ेगा और भारत के अंदर दुनिया का ड्रोन हब बनने की क्षमता मौजूद है। प्रधानमंत्री शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित भारत ड्रोन महोत्सव में बोल रहे थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब उन्हें कहीं सरकारी कामों की क्वालिटी को देखना होता है तो यह जरूरी नहीं कि वह पहले से बता दें कि उन्हें वहां निरीक्षण करने जाना है, ऐसे में तो सब कुछ ठीक-ठाक हो ही जाएगा, वह ड्रोन भेज देते हैं और ड्रोन से वहां के बारे में पता चल जाता है लेकिन वहां काम कर रहे लोगों को इसका पता तक नहीं चल पाता है।

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प्रधानमंत्री की इस बात पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने खूब तालियां बजाईं। 

मोदी ने कहा कि वह महीने में एक बार सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से उनके राज्यों में जो प्रोजेक्ट चल रहे हैं ड्रोन के जरिये उनका प्रजेंटेशन देने के लिए कहते हैं।

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केदारनाथ के पुनर्निर्माण का काम 

उन्होंने कहा कि जब केदारनाथ में आपदा के बाद पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ तो वह केदारनाथ में कैसा काम चल रहा है, अपने दफ्तर में बैठकर ड्रोन के जरिए वहां चल रहे निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग करते थे क्योंकि हर बार केदारनाथ जाना संभव नहीं था। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि ड्रोन टेक्नोलॉजी को लेकर भारत में जो उत्साह देखने को मिल रहा है, वह अद्भुत है। उन्होंने कहा कि ये जो ऊर्जा नज़र आ रही है, वह भारत में ड्रोन सर्विस और ड्रोन आधारित इंडस्ट्री की लंबी छलांग का प्रतिबिंब है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि टूरिज्म सेक्टर, मीडिया, फिल्म इंडस्ट्री में भी ड्रोन क्वालिटी और कंटेंट दोनों को बढ़ाने में मदद करेगा और आने वाले दिनों में इसका इस्तेमाल और बढ़ेगा।

नई ड्रोन नीति लाई थी सरकार

केंद्र सरकार ने पिछले साल नई ड्रोन नीति का एलान किया था और इसमें ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कई फैसले लिए गए थे। इसके तहत ड्रोन खरीदने, आयात करने, रखने और चलाने से जुड़ी कई तरह की शर्तें हटा ली गई थीं, कई लाइसेंसों की ज़रूरत को ख़त्म किया गया था और काग़ज़ी कार्रवाई भी कम कर दी गई थी। 

सरकार ने कहा था कि नए नियमों से अर्थव्यवस्था के क़रीब सभी क्षेत्रों जैसे- कृषि, खनन, बुनियादी ढांचे, परिवहन, रक्षा, निगरानी, पुलिस कार्य, ​​आपातकालीन सेवा, मैपिंग आदि में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ेगा और इससे काम बेहतर होगा और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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