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एनआईए : भारत में तेज़ी से पैर पसार रहा है आईएस, मक़सद इसलामी राज्य की स्थापना

भारत में आतंकवादी संगठन इसलामिक स्टेट तेज़ी से अपने पैर पसार रहा है। यह अधिक चिंता की बात इसलिए है कि यह जम्मू-कश्मीर जैसे मुसलिम-बहुल राज्य या केरल जैसे मध्य-पूर्व के बहावी इसलाम की विचारधारा से प्रभावित जगहों तक सीमित नहीं है।  इसलामिक स्टेट तमिलनाडु और कर्नाटक में तेज़ी से उभर रहा है और देश के लिए बहुत बड़ा ख़तरा बन सकता है। 

ख़िलाफ़त की स्थापना है मक़सद!

इसलामिक स्टेट का मक़सद सिर्फ छिटपुट आतंकवादी वारदातों तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि वह भारत में इसलामिक शरीआ से चलने वाले ख़िलाफ़त राज्य की स्थापना करना चाहता है और उसने इसके लिए अल हिंद नामक संगठन बनाया है। 
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इंडियन एक्सप्रेस ने एक ख़बर में कहा है कि राष्ट्रीय जाँच एजेन्सी (एनआईए) ने सोमवार को अदालत में पेश चार्जशीट में यह बात कहते हुए 17 लोगों के ख़िलाफ़ सबूत दिए हैं। 

अल हिंद

एनआईए का कहना है कि इन 17 लोगों ने दक्षिण भारत में आतंकवादी गुट अल हिंद की स्थापना की, जिसका मक़सद कर्नाटक और तमिलनाडु में हिन्दू नेताओं को निशाना बनाना और भारत में ख़िलाफ़त की स्थापना करना है। 
एनआईए ने पिछले सप्ताह ही एक पुलिस अधिकारी की हत्या के मामले में ख़ाजा मोहिदीन के ख़िलाफ़ चार्जशीट पेश किया। वह आईएस की ओर से भर्ती किए गए शुरुआती लोगों में से है, जिसकी जाँच एनआईए 2017 से ही कर रहा है। उसका संपर्क इसलामिक स्टेट के हाजा फ़ख़रूद्दीन से है, जो 2014 में ही आईएस से जुड़ गया था। ये दोनों संदिग्ध आतंकवादी तमिलनाडु के कड्डलोर के रहने वाले हैं।

दंगा करवाने की साजिश

एनआईए का यह भी कहना है कि बेंगलुरू के महबूब पाशा के साथ मिल कर मोहीद्दीन ने आतंकवादी अल हिंद गुट की स्थापना की थी। इस गुट का मक़सद हिन्दुओं को निशाना बनाना था। 
एनआईए ने 24 फरवरी को कर्नाटक के 15 ठिकानों पर छापे मारे। उसे भारी मात्रा में प्रचार सामग्री और दूसरी आपत्तिजनक चीजें बरामद हुईं। चार्जशीट में कहा गया है,

‘हिन्दू नेताओं की हत्या कर बड़े पैमाने पर हिन्दू-मुसलिम दंगा कराने और दूसरे राष्ट्र-विरोधी कामों को अंजाम देने की साजिश रची गई थी।’


एनआईए की चार्जशीट का अंश

निशाने पर तमिलनाडु, कर्नाटक

चार्जशीट में आगे कहा गया है, ‘यह संगठन और इसके लोग इसलामिक स्टेट की विचारधारा से पूरी तरह प्रभावित हैं और इन्होंने कर्नाटक और तमिलनाडु के अलग-अलग हिस्सों में अपनी विचारधारा फैलाने और अधिक से अधिक लोगों को आईएस का सदस्य बनाने का अभियान चलाया था।’ 
एनआईए का कहना है कि महबूब पाशा बेंगलुरू के गुरप्पनपाल्या का रहने वाला है। उसने खाजा मोहीद्दीन और सादिक़ बाशा के साथ मिल कर साजिश रची थी। इन लोगों ने एक बड़े आतंकवादी संगठन की नींव डाली थी और अल हिंद उससे निकला हुआ गुट है। 

साजिश, प्रशिक्षण

चार्जशीट के अनुसार, बेंगलुरू के गुरुप्पमपाल्या स्थित सादिक़ बाशा के घर पर बैठकें होती थीं और साजिश रची जाती थी, योजनाएं बनाई जाती थीं। अप्रैल 2019 से दक्षिण भारत के कई जगहों पर आतंकवादी हमले करने की योजना भी यहीं बनाई गई थी।
एनआईए का कहना है कि इन लोगों ने जंगल में प्रशिक्षण लेने के उपकरण भी ले लिए थे और गुंडलपेट व शिवमसमुद्र के जंगल में छिपने की जगह बना ली थी और हथियारों का जखीरा इकट्ठा कर रख लिया था।

विदेशी हैंडलर

ये लोग किसी विदेशी के संपर्क में थे और उससे चैट कर आईएस के मक़सद को भारत में पूरा करने की फिराक में थे। 
याद दिला दें कि कुछ महीने पहले ही पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के रहने वाले एक जोड़े को दक्षिण दिल्ली से गिरफ़्तार किया है, जिसके बारे में उसका कहना था कि वे दोनों आतंकवादी हैं और इसलामिक स्टेट से जुड़े हुए हैं। पुलिस ने यह दावा भी किया था कि ये दोनों दिल्ली में आतंकवादी हमले करना चाहते थे और मुसलमान युवकों को हमलों के लिए उकसाने की योजना में थे। 
जहानजेब समी (अबु अबदुल्ला) और उसकी पत्नी हिना बशीर की गिरफ्तारी और इनसे बरामद इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों से कई ऐसी सनसनीखेज जानकारियां सामने आईं, जिसने जांच एजेंसियों को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक़ यह दंपति करीब आधा दर्जन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल कर रहा था। इनके जरिए लोगों को आंदोलन से जुड़ने और आईएसआईएस की गतिविधियों में शामिल होने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा था। 

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