दिल्ली के मालवीय नगर में अरुणाचल प्रदेश की तीन महिलाओं के साथ नस्लीय अपमान की कम से कम तीन पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों के साथ भेदभाव अब बंद होना चाहिए, क्योंकि वे भी भारत के ही नागरिक हैं। इन महिलाओं पर कथित तौर पर 'मोमो बेचने वाली', '500 रुपये में मसाज पार्लर में काम करने वाली धंधेवाली' जैसी नस्लीय टिप्पणियाँ की गईं। इस घटना ने पूरे पूर्वोत्तर को झकझोर कर रख दिया है। अरुणाचल, मेघालय और सिक्किम के सीएम ने इस मुद्दे को उठाया, लेकिन असम और मणिपुर जैसे राज्यों के सीएम का अभी तक इस पर बयान नहीं आया है।

अरुणाचल के सीएम बोले- शर्मनाक

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने घटना को शर्मनाक बताया और कहा कि ऐसे व्यवहार समाज में बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'मैंने सोमवार को घटना के बारे में जानते ही दिल्ली पुलिस कमिश्नर से बात की और सख्त कार्रवाई की मांग की। आरोपी फरार हैं, लेकिन मुझे आश्वासन मिला है कि उन्हें जल्द पकड़ा जाएगा और कानून के अनुसार सजा दी जाएगी। हम अपनी तीन बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनकी सुरक्षा, सम्मान और न्याय हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।'

मेघालय के सीएम ने की निंदा

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों के साथ भेदभाव अब रुकना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के साथ भेदभाव बंद होना चाहिए।
 
संगमा ने न सिर्फ दिल्ली की घटना, बल्कि गोरखपुर के एम्स में नगालैंड की एक रेजिडेंट डॉक्टर के साथ नस्लीय और यौन उत्पीड़न का भी ज़िक्र किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'महिला की गरिमा का अपमान एक सभ्य राष्ट्र में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। वे भी आपकी बहनें और बेटियां हैं। मैं अधिकारियों से अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील करता हूं।' उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं सिर्फ सुर्खियां बनकर भूल नहीं जानी चाहिए।

सिक्किम के सीएम- चिंताजनक घटना

सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने घटना को 'चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा, 'ऐसी घटनाएं हमें सम्मान और आपसी आदर की याद दिलाती हैं। पूर्वोत्तर हमारा अभिन्न अंग है और हर नागरिक को सम्मान, समानता और सुरक्षा मिलनी चाहिए।'

अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

असम कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह घटना पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ लगातार बने पूर्वाग्रह की याद दिलाती है। इसे सिर्फ पड़ोस का झगड़ा नहीं माना जा सकता।
मणिपुर के सांसद एंगोमचा बिमल अकोइजाम और तिपरा मोथा पार्टी के नेता प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने भी निंदा की। प्रद्योत देबबर्मा ने एक्स पर लिखा कि अरुणाचल के लोग चीन सीमा की रक्षा करते हैं, फिर भी उन्हें नस्लवाद का सामना करना पड़ता है। यह देश की एकता को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने महिलाओं को न्याय दिलाने का वादा किया।

क्या हुई थी घटना?

दिल्ली में 'नस्लीय अपमान' की यह घटना 20 फरवरी को हुई थी, जब तीन महिलाएं अपने चौथे मंजिल के किराए के फ्लैट में एसी लगवाने के लिए बिजली मिस्त्री बुलाई थीं। इनमें से एक यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। ड्रिलिंग के दौरान धूल और मलबा नीचे की मंजिल पर गिरा, जिससे पड़ोसी हर्ष सिंह और उनकी पत्नी रूबी जैन ने आपत्ति जताई। विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने महिलाओं पर नस्लीय टिप्पणियां कीं।

वायरल वीडियो में आरोपी महिला को 'मोमो बेचने वाली', '500 रुपये में मसाज पार्लर में काम करने वाली धंधेवाली' जैसे अपमानजनक शब्द कहते सुना जा सकता है। उन्होंने महिलाओं को कथित तौर पर सेक्स वर्कर और ड्रग एडिक्ट भी कहा। रिपोर्ट है कि पुलिस मौके पर मौजूद थी और स्थिति को शांत करने की कोशिश कर रही थी। महिलाओं ने मालवीय नगर थाने में शिकायत की। इस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 यानी महिला की गरिमा भंग करना, 351(2) यानी आपराधिक धमकी देना और 196 यानी नस्ल, जन्म स्थान आदि के आधार पर दुश्मनी फैलाना के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई। धारा 196 गैर-जमानती और संज्ञेय है। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। महिलाओं को कोई शारीरिक चोट नहीं आई, लेकिन मानसिक उत्पीड़न की शिकायत गंभीर है।
यह घटना पूर्वोत्तर के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव को फिर से उजागर करती है। हाल ही में गोरखपुर में भी नगालैंड की एक डॉक्टर के साथ ऐसी ही घटना हुई है। पूर्वोत्तर के नेता एकजुट होकर कह रहे हैं कि अब समय आ गया है कि समाज में जागरूकता फैलाई जाए और ऐसे अपराधों पर सख्ती बरती जाए ताकि हर भारतीय सुरक्षित महसूस करे।