दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार (18 जुलाई) सुबह दिल्ली पुलिस ने जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। पुलिस की इस कार्रवाई और प्रदर्शन स्थल से छात्रों व प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में उबाल आ गया है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SP), शिवसेना यूबीटी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) समेत समूचे विपक्ष ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव का तीखा हमला

शनिवार के घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा- सोनम वांगचुक जी को ‘बल-प्रयोग’ करके, ज़बरदस्ती उनके आमरण अनशन स्थल से उठाकर ले जाना अत्यंत निंदनीय समाचार है। आज सुबह घटी ये घटना थोड़ी ही देर में पूरे देश और संपूर्ण विश्व में फैल चुकी है। सारी दुनिया और देशभर में सोनम वांगचुक जी को लेकर गहरी चिंता है और भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ आक्रोश भी। जो लोग सादी वर्दी में इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए धोखे से अचानक घुसे थे, उनकी पहचान सार्वजनिक की जाए। ये हमारी पुरज़ोर माँग है कि सोनम वांगचुक जी का इलाज ‘न्यायिक निगरानी’ में हो क्योंकि सोनम वांगचुक जी का जीवन मानवता, पर्यावरण-संरक्षण, लोकतांत्रिक मूल्यों, युवा ऊर्जा की प्रेरणा, साइंस और इनोवेशन के लिए अनमोल है।
अखिलेश ने बीजेपी पर ज़ोरदार हमला करते हुए कहा- हमारे देश की जनता व समस्त विश्व इस समय बीजेपी सरकार को संदेह और सवाल भरी संदिग्ध नज़र से देख रहा है। दमनकारी राजनीति करनेवाली भाजपा सरकार की इस अवांछनीय कार्रवाई ने इंटरनेशनल लेवल पर हमारे देश की मानवीय और डेमोक्रेटिक इमेज को बेहद धूमिल और खंडित करने का काम किया है। भाजपा ने न कभी गांधी जी में विश्वास किया, न कभी उनके गांधीवादी तौर-तरीक़ों में। भाजपा की नकारात्मक विचारधारा ही ‘विवाद’ की है; संवाद की नहीं। भाजपा निराशा का पर्याय बन चुकी है। भाजपा सरकार नहीं, अहंकार है!
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- संविधान पर काला धब्बा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वांगचुक को जबरन हटाने की निन्दा की है। खड़गे ने एक्स पर लिखा- 111 दिन तक माँ गंगा को बचाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे प्रो  जी डी अग्रवाल हों या हरियाणा की ओलिंपिक रेसलर हों, हमारे 750 अन्नदाता किसान हों, दलित-आदिवासी हों, या फ़िर पेपर लीक की बलि चढ़े 25 बच्चे और उनके परिजन, इस तानाशाह सरकार ने किसी को नहीं बख़्शा…। इनकी नज़र में कोई भी अगर आवाज़ उठाता है तो वह "Anti-National" है, "परजीवी" है! जंतर-मंतर पर आज जो हुआ वह लोकतंत्र और संविधान के ऊपर एक और काला धब्बा है। कोटा और देहरादून से "छात्रों की गूँज" का आगाज़ हो चुका है…दिल्ली की दहलीज़ तक ज़रूर पहुँचेगी !
कांग्रेस प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कहा- हमारा संविधान हर नागरिक को अपनी आवाज़ उठाने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का बुनियादी अधिकार देता है। लेकिन आज गृह मंत्रालय का रवैया देखकर लगता है कि उसने इसी संवैधानिक अधिकार को अपना निशाना बना लिया है। दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है और कल ही इसी मंत्रालय ने दिल्ली को नया पुलिस कमिश्नर दिया है। अगर आज की बर्बर कार्रवाई कमिश्नर साहब का पहला संदेश है, तो इससे साफ़ पता चलता है कि उनकी वफ़ादारी संवैधानिक कर्तव्य से ज़्यादा सत्ता के प्रति है। महिला पहलवानों को सड़कों पर घसीटना हो या पूर्व सैनिकों के साथ बदसलूकी करना,  यह सरकार बार-बार दिखा चुकी है कि उसे न संविधान की इज़्ज़त है और न ही लोकतांत्रिक मर्यादा की। आज की घटना ने एक बार फिर इसकी सोच को बेनकाब कर दिया है। इस सरकार के लिए शांतिपूर्ण विरोध किसी नागरिक का बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार नहीं, बल्कि एक "कानून एवं व्यवस्था" की समस्या है, जिसे डंडे के ज़ोर पर कुचल देना चाहिए। इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र आज दुनिया की सबसे अलोकतांत्रिक और लोकतंत्र-विरोधी राजनीतिक दल के कब्ज़े में है।

आप प्रमुख अरविन्द केजरीवाल का बयान

AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा "आज सुबह जब मैं उठा, तो मुझे पता चला कि सोनम वांगचुक को बहुत गलत तरीके से हटाया गया। उनकी भूख हड़ताल को तोड़ने की कोशिशें की गईं। गांधीजी ने भी लंबे समय तक उपवास किए थे, लेकिन अंग्रेजों ने भी उनके साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया था। मैं मोदी जी से पूछना चाहता हूं: ये युवा क्या मांग रहे हैं? वे हमारे देश के बच्चे हैं। उनके साथ ऐसा बर्ताव करना सही नहीं है। वे बस एक अच्छी शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। वे पेपर लीक को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। वे एक मजबूत परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं। इन मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय, सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि उनके आंदोलन को कैसे नाकाम किया जाए, उसे कैसे बदनाम किया जाए और उसे कैसे नीचा दिखाया जाए..."

आप सांसद संजय सिंह ने कहा "यह कैसी गुंडागर्दी चल रही है? मोदी जी, सत्ता का यह अहंकार लंबा नहीं चलता। जिन युवाओं पर आप लाठियां बरसा रहे हैं, वही आपका तख्ता पलट देंगे। एक व्यक्ति (सोनम वांगचुक) जो 21 दिनों से आमरण अनशन पर था, उसकी मांगें सुनने के बजाय उसे जबरन गिरफ्तार कर अस्पताल में डाल दिया गया।"

टीएमसी सांसद सागरिका घोष का बयान- मोदी सरकार घबराई हुई है

TMC सांसद सागरिका घोष ने कहा- "यह कार्रवाई इसलिए की गई है क्योंकि मोदी सरकार घबराई हुई है; वे पैनिक की स्थिति में हैं। वे इसलिए घबराए हुए हैं क्योंकि सोनम वांगचुक ने 20 तारीख को संसद तक मार्च करने का ऐलान किया था। मैं भी उस मार्च में शामिल होने वाली थी; मैं ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की तरफ़ से उनके साथ हिस्सा लेने वाली थी। यह एक शांतिपूर्ण आंदोलन है। संसद का मॉनसून सत्र बस दो दिन में शुरू होने वाला है, इसलिए मोदी सरकार घबरा रही है। वे पैनिक में हैं, इसीलिए यह कदम उठाया गया है। यह तानाशाही है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता; यह दुर्भाग्यपूर्ण है और लोकतंत्र तथा लोगों के अधिकारों पर हमला है।"

शरद पवार ने सरकार को बताया- 'गैरजिम्मेदार'

एनसीपी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने बारामती में संवाददाताओं से बात करते हुए केंद्र सरकार के रवैये को बेहद "गैर-जिम्मेदार" करार दिया। उन्होंने कहा कि जब स्थिति बेकाबू होने लगी तो सरकार ने वांगचुक को अस्पताल भेज दिया, लेकिन सरकार छात्रों की वास्तविक मांगों का समाधान करने के बजाय मूकदर्शक बनी रही। शरद पवार ने कहा: "केंद्र ने इस स्थिति को संवेदनशीलता से नहीं संभाला, जिससे कई छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। जब अन्य राजनीतिक दल वांगचुक के समर्थन में आए, तब भी सरकार मूकदर्शक बनी रही। कांग्रेस, हमारी पार्टी (सुप्रिया सुले समेत) और कई अन्य दलों के नेताओं ने वहां जाकर छात्रों के हित में साझा मांग उठाई थी। लेकिन दिल्ली में बैठे सरकार के किसी भी नेता ने प्रदर्शन स्थल का दौरा तक नहीं किया। इसका मतलब है कि सरकार पूरी तरह गैर-जिम्मेदार है।" पवार ने चेतावनी दी कि यह मुद्दा यहीं खत्म नहीं होने वाला है, क्योंकि आगामी संसद सत्र में विपक्ष इस मामले को पूरी ताकत से उठाएगा और वांगचुक पर हुई कार्रवाई के बावजूद यह आंदोलन जारी रहेगा।

सीपीएम की वृंदा करात का बयान- तानाशाही की निशानी

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन स्थल से सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने पर CPI(M) नेता वृंदा करात ने कहा, "आज (शनिवार) सुबह सोनम वांगचुक के साथ जो हुआ, वह लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को कुचलने जैसा था। यह सीधे गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर किया गया है। यह तानाशाही की निशानी है।"