संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से विपक्षी इंडिया गठबंधन ने वाकआउट कर दिया। इसने केंद्र सरकार द्वारा तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के गुट को बैठक में बुलाए जाने के विरोध में ऐसा किया। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष की ओर से अभी तक टीएमसी के बागी सांसदों के अलग गुट को आधिकारिक मान्यता नहीं दी गई है। ऐसे में उन्हें अलग राजनीतिक इकाई मानकर सर्वदलीय बैठक में बुलाना संसदीय परंपराओं और संविधान की भावना के खिलाफ है।

सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार ने सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई थी ताकि सदन को सुचारु रूप से चलाने पर चर्चा हो सके। लेकिन बैठक शुरू होते ही टीएमसी के बागी सांसदों की मौजूदगी को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

सरकार ने गलत संदेश दिया- कांग्रेस

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने कुछ समय के लिए बैठक का बहिष्कार किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उस समूह को बैठक में बुलाया है, जिसने खुद को नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई में विलय करने का दावा किया है, जबकि इस मामले पर अंतिम फैसला अभी लोकसभा अध्यक्ष ने नहीं किया है।
कांग्रेस का कहना है कि जब तक स्पीकर किसी गुट को आधिकारिक मान्यता नहीं देते तब तक उसे अलग दल की तरह बुलाना सही नहीं है। इसके बाद एक अन्य पोस्ट में जयराम रमेश ने टीवी चैनलों पर चल रही परिसीमन बिल के कथित समर्थन की ख़बरों को फेक न्यूज़ बताया है। उन्होंने कहा, 'कुछ टीवी चैनल ऐसी खबरें दिखा रहे हैं जो साफ़ तौर पर प्रायोजित हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि चल रही सर्वदलीय बैठक में परिसीमन विधेयक का समर्थन किया गया है। यह पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठी ख़बर है।'

महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि पूरे विपक्ष ने एकजुट होकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दल और शिवसेना (यूबीटी) सहित सभी विपक्षी दल बैठक से बाहर चले गए।
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महुआ ने कहा कि जिन 20 सांसदों ने टीएमसी से अलग होने का दावा किया है, उनके विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूरी नहीं दी है। उनके खिलाफ दलबदल से जुड़े मामलों पर भी फैसला लंबित है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई आधिकारिक मान्यता ही नहीं मिली है तो सरकार ने उन्हें किस आधार पर सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किया।

समाजवादी पार्टी ने कहा- विपक्ष एकजुट

समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले विपक्ष को बांट नहीं सकती। उन्होंने कहा कि विपक्ष पूरी तरह एकजुट है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा की रक्षा के लिए साथ खड़ा रहेगा।

सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि सर्वदलीय बैठक की गरिमा को नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि जब टीएमसी के विभाजन पर स्पीकर का फैसला अभी लंबित है तब सरकार का बागी गुट को अलग पहचान देकर बैठक में बुलाना जल्दबाजी और संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

'संविधान की रक्षा के लिए विरोध'

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए बैठक से बाहर गई। उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर के अंतिम फैसले से पहले किसी गुट को मान्यता देना पूरी तरह असंवैधानिक है।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने पूछा कि आखिर किस कानूनी प्रावधान के तहत बागी सांसदों को अलग पहचान दी गई। वहीं आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एन. डी. गुप्ता ने कहा कि उनकी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के मामले में भी फैसला लंबित है, लेकिन उन्हें भी अलग बैठने की व्यवस्था दी गई है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया।

क्या है पूरा विवाद?

जून महीने में टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र देकर दावा किया था कि वे नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं और लोकसभा में अलग संसदीय दल के रूप में बैठना चाहते हैं।

हालाँकि इस विलय को लेकर अंतिम फैसला अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ने नहीं सुनाया है। इसके बावजूद बागी सांसदों को अलग बैठने की व्यवस्था और सर्वदलीय बैठक में बुलाए जाने से विवाद खड़ा हो गया है।
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बैठक में कौन-कौन पहुँचे?

सर्वदलीय बैठक में केंद्र सरकार की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शामिल हुए। वहीं विपक्ष की ओर से कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, डीएमके, एनसीपी (शरद पवार), वाम दल, आम आदमी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), झामुमो और अन्य दलों के नेता मौजूद रहे।

मानसून सत्र में हंगामे के आसार

सर्वदलीय बैठक में हुए इस घटनाक्रम से साफ़ संकेत मिल रहे हैं कि संसद का मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। विपक्ष पहले ही कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर चुका है, वहीं टीएमसी बागी सांसदों की मान्यता का विवाद भी अब संसद के भीतर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।