एनसीईआरटी की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' चैप्टर पर विवाद के बीच अदालतों में ऐसी शिकायतों को लेकर हाल ही में बड़ी चौंकाने वाली ख़बर आई है। लोकसभा में फरवरी 2026 में दी गई जानकारी के मुताबिक़ पिछले 10 साल में जजों के खिलाफ 8630 से ज़्यादा शिकायतें आईं। लेकिन विवाद एनसीईआरटी की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' चैप्टर पर हुआ और अब कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच तनातनी के आसार बन सकते हैं।

जजों के ख़िलाफ़ कब कितनी शिकायतें आई हैं और कैसे-कैसे बड़े मामले आए, इसके बार में जानने से पहले यह जान लें कि आख़िर एनसीईआरटी की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' को लेकर क्या विवाद सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार सुबह एनसीईआरटी की नई क्लास 8 की सोशल साइंस किताब पर पूरी तरह रोक लगा दी है। किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' का जिक्र करने पर कोर्ट बहुत नाराज हुआ।
ताज़ा ख़बरें
'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' चैप्टर को लेकर सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि यह न्यायपालिका की इज्जत को ठेस पहुंचाने की साजिश है। कोर्ट ने किताब की छपाई, दोबारा छपाई और डिजिटल रूप से शेयर करने पर पूरी रोक लगा दी। इसके साथ ही सभी फिजिकल और डिजिटल कॉपियां जब्त करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने एनसीईआरटी के डायरेक्टर और शिक्षा मंत्रालय के स्कूल एजुकेशन सेक्रेटरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया कि उन पर अदालत की अवमानना का केस क्यों न चलाया जाए। सीजेआई ने कहा, 'यह गोली चलाई गई है और न्यायपालिका खून बहा रही है। हमें पता लगाना होगा कि जिम्मेदार कौन है... उन्हें हटाया जाना चाहिए।' 

कोर्ट ने 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' चैप्टर को गहरी साजिश बताया और कहा कि बच्चों को छोटी उम्र में ऐसी गलत बातें सिखाना गलत है।

'सिर्फ माफी काफी नहीं'

एनसीईआरटी ने पहले माफी मांगी थी और कहा था कि किताब का वह हिस्सा हटा दिया जाएगा। लेकिन कोर्ट ने कहा कि सिर्फ माफी काफी नहीं, गहराई से जांच होनी चाहिए।

क्या है किताब में?

किताब का नाम 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियोंड, Vol II' है। इसमें चैप्टर 4 'द रूल ऑफ़ द ज्यूडिशियरी इन आवर सोसाइटी' में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, केसों का बहुत बैकलॉग (लगभग 5 करोड़ से ज्यादा पेंडिंग केस) और जजों की कमी का ज़िक्र था। एनसीईआरटी ने किताब को वापस ले लिया था, लेकिन कोर्ट ने अब पूरी तरह बैन कर दिया।
देश से और ख़बरें

जजों के ख़िलाफ़ शिकायतें

इस विवाद के बीच एक बड़ा डेटा सामने आया है। लोकसभा में फ़रवरी 2026 में दी गई जानकारी के मुताबिक, 2016 से 2025 यानी पिछले 10 साल में जजों के खिलाफ 8630 से ज्यादा शिकायतें आईं। सीजेआई के ऑफिस को ये शिकायतें मिलीं।
शिकायतों की संख्या
  • 2016: 729
  • 2017: 682
  • 2018: 717
  • 2019: 1037
  • 2020: 518
  • 2021: 686
  • 2022: 1012
  • 2023: 977
  • 2024: 1170
  • 2025: 1102

कैसे निपटाई जाती हैं शिकायतें

ये शिकायतें इन-हाउस मैकेनिज्म से निपटाई जाती हैं। सीजेआई या हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शिकायत मिलने पर जज से जवाब मांगते हैं। अगर जरूरत पड़ी तो कमिटी बनाई जाती है। अगर गंभीर आरोप साबित हुए तो जज से इस्तीफा मांग सकते हैं या इम्पीचमेंट की सिफारिश कर सकते हैं।

जस्टिस यशवंत वर्मा मामला

मार्च 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहने के दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में आग लगी। फायर ब्रिगेड आई तो स्टोररूम में जले हुए नोटों के बंडल मिले। जस्टिस वर्मा ने कहा कि उनका या परिवार का कोई लेना-देना नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने जांच कमिटी बनाई, जिसने इम्पीचमेंट की सिफारिश की। अब मामला सरकार के पास लंबित है। जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया। उनके ऊपर कार्रवाई की तैयारी है।

NCLAT जज शरद कुमार शर्मा ने 2025 में एक केस से रिक्यूज किया और कहा कि उच्च न्यायपालिका के किसी बड़े व्यक्ति ने दबाव डाला। यह बायजू के केस से जुड़ा था। 2018 में रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल जज आरके मित्तल पर 50 करोड़ के फ्रॉड का आरोप लगा। ईडी ने जांच की और जज को हटा दिया गया।

2011 में कलकत्ता हाई कोर्ट जज सौमित्र सेन पहले जज थे जिन्हें राज्यसभा ने इम्पीच किया। उनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
सर्वाधिक पढ़ी गयी ख़बरें

कार्यपालिका-न्यायपालिका विवाद बढ़ेगा?

यह विवाद न्यायपालिका और सरकार के बीच पुराने तनाव को फिर से सामने ला रहा है। NJAC कानून को सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में रद्द किया था, जो कोलेजियम सिस्टम की जगह लेना चाहता था। कई बार कानून मंत्री और उपराष्ट्रपति ने न्यायिक ओवररीच की बात कही।

अब सवाल यह है कि क्या एनसीईआरटी किताब में लिखी बातें सच हैं या न्यायपालिका की छवि खराब करने की कोशिश? कोर्ट का सख्त रुख दिखाता है कि वह अपनी इज्जत की रक्षा के लिए तैयार है। आगे जांच में क्या निकलता है, यह देखना होगा।