लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पेपर लीक विरोधी बिल पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि छात्रों पर गृह मंत्री अमित शाह ने पैलेट गन चलवाई। इस पर हंगामा हो गया। इसके बाद स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी।
राहुल गांधी का 29 जुलाई को लोकसभा में संबोधन
लोकसभा में बुधवार 29 जुलाई को पेपर लीक विरोधी बिल पर चर्चा जारी है। नेता विपक्ष राहुल गांधी के संबोधन के दौरान सत्ता पक्ष ने जोरदार हंगामा किया। इसके बाद सदन स्थगित हो गया। राहुल गांधी ने अपने भाषण में अमित शाह, पैलेट गन, आरएसएस का खासतौर पर उल्लेख किया। राहुल गांधी ने एक छात्रा की बातचीत की जानकारी देते हुए अंधभक्त और इंडिट्स शब्द का इस्तेमाल किया। इस पर भी काफी हंगामा हुआ।
राहुल के भाषण की खास बातें
- जंतर मंतर प्रोटेस्ट के छात्रों पर अमित शाह ने पैलेट गन चलवाई
-अमित शाह में हिम्मत नहीं है कि वो लोकसभा में बैठ सकें
-हर यूनिवर्सिटी में आरएसएस का कुलपति
-धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ शिक्षा मंत्री थे, आरएसएस शिक्षा मंत्रालय चलाता है
- अंधभक्त इडियट्स खुद को भगवान समझते हैं लेकिन वे मूर्ख होते हैं
-सरकार ने राहुल गांधी के अमित शाह पर लगे आरोपों को खारिज किया, सबूत मांगे
-कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने राहुल गांधी के पैलेट गन वाले बयान को सही ठहराया
-पैलेट गन को लेकर दिल्ली पुलिस की अंदरुनी जांच अभी भी जारी है
अमित शाह ने पैलेट गन चलाने का आदेश दिया था
राहुल गांधी ने कहा गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों पर पैलेट चलाने का आदेश दिया था। उन्होंने हमारे छात्रों के शरीर में छर्रे दागवाए।
गृह मंत्री ने भारत के छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया। राहुल के इस बयान पर हंगामा शुरू हो गया। मंत्री रिजिजू ने उनसे माफी की मांग की है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का बचाव किया। राहुल ने अपने भाषण में कहा 'अमित शाह डरे हुए हैं।' उन्होंने संसद में उनकी गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि गृह मंत्री में लोकसभा में बैठने की हिम्मत नहीं है।
बल प्रयोग की मंज़ूरी सिर्फ़ गृह मंत्री ही दे सकते हैं। अमित शाह ने देश के छात्रों पर पैलेट गन चलवाई।
राहुल गांधी, नेता विपक्ष
राहुल का लोकसभा में 29 जुलाई 2026 को संबोधन
राहुल गांधी ने जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को सही ठहराया
राहुल गांधी ने संसद में कहा कि युवाओं के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से वे "उत्साहित और आश्वस्त" हैं। उन्होंने इन प्रदर्शनों को गुस्से, हिंसा या नफ़रत के बजाय देश के युवाओं की भावनाओं की सच्ची अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि बीजेपी समेत सभी राजनीतिक दलों को युवा भारतीयों की इन भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। गांधी ने आगे कहा कि अगर बीजेपी नेता प्रदर्शन कर रहे युवाओं से बात करें, तो उन्हें शायद पता चलेगा कि उनके अपने बच्चे भी इन युवाओं के साथ सहानुभूति रखते हैं। उन्होंने कहा, "जो कुछ हुआ है, उसमें कुछ भी गलत नहीं है और हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए।"
राहुल के अंधभक्त और इडियट कहने पर हंगामा
राहुल गांधी के ‘इडियट्स’ (मूर्ख) वाले बयान पर NDA ने हंगामा किया। विपक्ष के नेता (LoP) एक छात्रा की बात दोहरा रहे थे, जिसने कहा था कि कुछ छात्र ऐसे होते हैं जो सीखते हैं, ज्ञान पाना चाहते हैं और दूसरों की सच्चाई को स्वीकार करते हैं, जबकि एक दूसरी श्रेणी ‘इडियट्स’ (मूर्खों) की होती है जो दूसरों की बात नहीं सुनते। राहुल गांधी ने कहा कि देश के भविष्य ने हमारी सड़कों पर जो किया, उससे उन्हें भरोसा मिला। छात्रा ने बताया कि लोगों का एक ऐसा समूह है जो अहंकारी है, जिन्हें लगता है कि वे सब कुछ जानते हैं और खुद को "भगवान" मानते हैं। गांधी ने कहा कि उन्होंने छात्रा से पूछा कि वह ऐसे लोगों को क्या कहती है। उन्होंने बताया, "उसने कहा कि वह ऐसे अंधभक्तों को बेवकूफ कहती है।"
राहुल ने बताईं 3 श्रेणियां
नेता विपक्ष ने अपने भाषण में तीन श्रेणियां बताईं- तीन कैटेगरी होती है- 1. स्टूडेंट, 2. इडियट 3. अंधभक्त। जहां 'अंधभक्त' को लगता है कि 'इडियट' ही भगवान है।
राहुल के बयान पर जब हंगामा होने लगा तो नेता विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष से कहा- अध्यक्ष जी, अगर आप चाहते हैं कि देश में सिर्फ BJP बोले तो मैं चुप होकर बैठ जाऊंगा। मैं जब भी बोलता हूं... BJP की तरफ से कोई न कोई बोलने लगता है।
हर यूनिवर्सिटी में आरएसएस का कुलपति, शिक्षा मंत्रालय संघ चलाता हैः राहुल
एनडीए सांसद के हंगामे के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुरोध पर राहुल गांधी ने फिर से बोलना शुरू किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हर भारतीय विश्वविद्यालय का कुलपति आरएसएस का कोई व्यक्ति है। शिक्षा मंत्रालय आरएसएस द्वारा चलाया जाता है। धर्मेंद्र प्रधान कभी शिक्षा मंत्री नहीं थे। शिक्षा मंत्रालय आरएसएस चला रहा था।
राहुल गांधी फिर बोले- अमित शाह या तो अक्षम हैं या फिर दोषी
राहुल गांधी ने अपने भाषण पर संसद के बाहर कहा, "दो स्थितियां हो सकती हैं। एक तो यह कि गृह मंत्री ने आदेश दिया हो। दूसरी यह कि गृह मंत्री को पता ही न हो कि गोलीबारी होगी। पहली स्थिति में, वे दोषी हैं; दूसरी में, वे अक्षम हैं। इन दोनों में से कोई एक बात तो होगी ही; कोई तीसरी संभावना नहीं है। अगर गृह मंत्री को यह भी नहीं पता था कि गोलियां चल रही हैं, तो इसका मतलब है कि वे अक्षम हैं; और अगर उन्होंने आदेश दिया था, तो वे दोषी हैं...।"
सरकार ने राहुल गांधी के आरोप को खारिज किया
सरकार ने बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस आरोप को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर कथित गोलीबारी के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार थे। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि कोई गोली नहीं चलाई गई और न ही गोली चलाने का कोई आदेश दिया गया था।
लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर बहस में भाग लेते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह दावा "तथ्यात्मक रूप से गलत" है और स्पष्ट किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने आगे कहा कि गोली चलाने का आदेश केवल मजिस्ट्रेट द्वारा ही दिया जा सकता है, न कि पुलिस द्वारा।
खड़गे ने भी किया राहुल गांधी के आरोपों का समर्थन
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को X पर राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हमला करने के लिए BJP दोषी है। उन्होंने कहा, "हमारे युवाओं और छात्रों पर पैलेट गन से हमला किया गया। या तो यह गृह मंत्री अमित शाह की मंज़ूरी से हुआ, या फिर उनके सीधे निर्देश के बिना हुआ।" "दोनों ही स्थितियों में गृह मंत्री या प्रधानमंत्री की गैर-ज़िम्मेदारी झलकती है। राहुल गांधी लोकसभा में ठीक यही बात कह रहे हैं।"
पैलेट गन पर दिल्ली पुलिस की अंदरुनी जांच
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए सीजेपी (CJP) प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर प्लास्टिक पैलेट (प्लास्टिक की गोलियों) और बल प्रयोग के आरोपों के बीच एक नया मोड़ आया है। दिल्ली पुलिस पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई एक कथित 'बैक-डेटेड' (पिछली तारीख में दर्ज) जनरल डायरी (GD) प्रविष्टि की जांच कर रही है। इस डायरी एंट्री में दावा किया गया है कि एक डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) के निर्देशों पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के डिप्टी कमांडर ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया और एंटी-राइअट गन से प्लास्टिक पैलेट फायर किए।
22 जुलाई को तड़के 1:24 बजे दर्ज की गई इस जनरल डायरी प्रविष्टि के अनुसार, RAF के डिप्टी कमांडर ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान वे संबंधित DCP के साथ तैनात थे। एंट्री में उल्लेख है कि अधिकारी के आदेश पर 55 नॉन-इलेक्ट्रिक शेल, 15 इलेक्ट्रिक शेल, 5 आंसू गैस के ग्रेनेड और एंटी-राइअट गन से 2 प्लास्टिक पैलेट शॉट्स का इस्तेमाल किया गया। यदि इस दावे की पुष्टि होती है, तो यह दिल्ली में भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल का पहला मामला होगा।
पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दर्ज डायरी एंट्री के समय पर ध्यान दें - यह 22 जुलाई को सुबह 1.24 बजे दर्ज की गई थी। यह एंट्री 20 जुलाई की घटना के दो दिन बाद और 'द हिंदू' की उस रिपोर्ट के कुछ घंटों बाद की गई थी जिसमें बताया गया था कि RAF ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया था। RAF ने यह बात खास तौर पर दर्ज की कि यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस के निर्देशों पर की गई थी। इसके अलावा, 20 जुलाई की घटना के बाद, RAF ने जंतर-मंतर पर तैनात जवानों से शॉक बैटन, इलेक्ट्रिक शील्ड, पंप-एक्शन गन और पैलेट फायर करने वाली एंटी-रायट गन वापस ले लीं। RAF के IG जनरल की समीक्षा में मार्च के दौरान RAF के व्यवहार में "गंभीर कमियां" भी पाई गईं, जो "संवेदनशील पुलिसिंग" के उनके सिद्धांत का उल्लंघन था।
दूसरी तरफ, इस मामले में आरोपी बनाए जा रहे संबंधित DCP ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन वाले दिन उनकी तैनाती उस स्थल पर थी ही नहीं, जिसका जिक्र डायरी एंट्री में किया गया है। वहीं दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने पुलिस बल द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि संबंधित क्षेत्र में केवल आंसू गैस का ही इंतजाम किया गया था और प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव और पुलिसकर्मियों पर हमले के बाद ही स्थिति को संभालने के लिए सीमित आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे।
पुलिस ने इससे पहले अपने आधिकारिक 'X' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर 'फेक न्यूज अलर्ट' जारी कर स्पष्ट किया था कि दिल्ली पुलिस के पास पैलेट गन न तो मौजूद हैं और न ही इनका इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, प्रदर्शन में घायल हुए कुछ लोगों की शुरुआती मेडिकल जांच में पैलेट जैसे निशान मिलने से विवाद गहरा गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने संबंधित थाने से पूरे घटनाक्रम और इस विवादित डायरी एंट्री पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है तथा मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
बहरहाल, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी के भाषण में ‘असंसदीय’ शब्द के इस्तेमाल पर उन्हें टोका। लोकसभा में राहुल गांधी 18 साल के एक छात्र के साथ हुई बातचीत का ज़िक्र कर रहे थे, जिसने लोगों को ‘छात्र, बेवकूफ़ और अंधभक्त’ की श्रेणियों में बांटा था। सत्ता पक्ष ने राहुल के बयान को संसदीय कार्यवाही से हटाने की मांग की।
इससे पहले संसद में विपक्ष ने CJP के नेतृत्व में 20 जुलाई को संसद तक हुए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि लाठी की हर चोट ने युवाओं की पीठ से ज़्यादा सरकार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया। संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए किरण रिजिजू ने कहा, "कांग्रेस नेताओं ने बिल पर बिल्कुल भी बात नहीं की। वे सिर्फ़ राजनीति कर रहे थे। हमें उम्मीद है कि राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेता आज बिल पर बोलेंगे।" उन्होंने कहा, "इतने महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा हो रही है, लेकिन वे ऐसे मुद्दों पर बात करके और इसे राजनीतिक रंग देकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं जिनका बिल से कोई संबंध नहीं है।"
उन्होंने कहा, "यह छात्रों की माँगों के जवाब में लाया गया एक बहुत अच्छा बिल है। प्रधानमंत्री ने एक बड़ा फ़ैसला लिया है और इससे छात्रों में नया आत्मविश्वास जगा है। अगर कांग्रेस के पास परीक्षा प्रणाली को लेकर कोई सुझाव है, तो वे बेझिझक उन्हें बता सकते हैं।" मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी नेताओं ने बहस के दौरान ऐसे मुद्दों पर बात की जिनका बिल से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने कहा, "आपने कल प्रियंका गांधी को सुना। उन्होंने बिल के दायरे से पूरी तरह हटकर बात की। विपक्ष के अन्य सभी सांसदों ने भी बिल के दायरे से बाहर के मुद्दों पर बात की, न कि बिल पर।"
इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बुधवार को विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे लोकसभा में बहस के दौरान ऐसे मुद्दों पर बात करके 'पेपर लीक विरोधी बिल' से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं जिनका बिल से कोई लेना-देना नहीं है। रिजिजू ने कहा कि बहस के दौरान विपक्षी नेता राजनीति करने में व्यस्त थे और उन्हें उम्मीद है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी बुधवार को सदन में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर बोलेंगे।