कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। विपक्षी दल ने विशेष संसद सत्र से पहले सांसदों के साथ संविधान संशोधन बिल साझा न करने का आरोप लगाते हुए इसे “लोकतंत्र का पूरा मजाक” और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “बुलडोजर मानसिकता” करार दिया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने केंद्र को सीधी चेतावनी दी है।

कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने एक्स पर कहा कि संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से शुरू होने वाला है। जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा। सरकार ने चुनाव के बाद ऑल-पार्टी मीटिंग बुलाने की विपक्ष की “एकदम उचित और वैध” मांग को ठुकरा दिया है।
रमेश ने लिखा, “मंगलवार सुबह तक मोदी सरकार ने सांसदों के साथ उन संविधान संशोधन बिलों को साझा नहीं किया है जिन पर बहस और वोटिंग होनी है। यह लोकतंत्र का पूरा मजाक है और पीएम की बुलडोजर मानसिकता को उजागर करता है, जो कभी खुद को नॉन-बायोलॉजिकल बताते थे और अब नॉन-गृहस्थी कह रहे हैं।”
यह बयान एक दिन बाद आया है जब कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्षा सोनिया गांधी ने सरकार के एजेंडे पर गंभीर चिंता जताई थी। सोनिया गांधी ने ‘द हिंदू’ में प्रकाशित अपने लेख में कहा था कि मुद्दा महिलाओं का आरक्षण नहीं, बल्कि डीलिमिटेशन (परिसीमन) है। उन्होंने प्रस्तावित डीलिमिटेशन को “अत्यंत खतरनाक” और “संविधान पर हमला” बताया।
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री विपक्षी दलों से उन बिलों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं जिन्हें वे “स्पेशल सत्र” में “बुलडोज” करना चाहते हैं। जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार चरम पर होगा। उन्होंने लिखा, “इस असाधारण जल्दबाजी का सिर्फ एक ही कारण हो सकता है। राजनीतिक फायदा उठाना और विपक्ष को बैकफुट पर डालना।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का मकसद जाति जनगणना को टालना और पटरी से उतारना है।

खड़गे का हमला

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि हमें विश्वास में लिए बिना यह विशेष सत्र बुलाया गया है और आपकी सरकार परिसीमन के बारे में कोई भी जानकारी दिए बिना हमसे फिर से सहयोग मांग रही है। आप समझ सकते हैं कि परिसीमन और अन्य पहलुओं के विवरण के बिना, इस ऐतिहासिक कानून पर कोई भी सार्थक चर्चा करना असंभव होगा। आपने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि आपकी सरकार ने इस संबंध में राजनीतिक दलों के साथ संवाद किया है। हालांकि, मुझे यह बताते हुए खेद है कि यह सत्य के विरुद्ध है क्योंकि सभी विपक्षी दल सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि 29 अप्रैल 2026 को मौजूदा चुनाव समाप्त होने के बाद संविधान संशोधनों पर चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। चल रहे राज्य चुनावों के दौरान विशेष बैठक बुलाना हमारे इस विश्वास को और पुष्ट करता है कि आपकी सरकार महिलाओं को सही मायने में सशक्त बनाने के बजाय राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए विधेयक को जल्दबाजी में लागू कर रही है।
खड़गे ने यह भी कहा कि सार्वजनिक महत्व के मामलों में सरकार का पिछला रिकॉर्ड, चाहे वह नोटबंदी हो, जीएसटी हो, जनगणना हो या वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करना हो सरकार पर विश्वास करना कठिन है। प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन केंद्र और राज्यों दोनों को प्रभावित करेंगे और यह महत्वपूर्ण है कि लोकतंत्र में सभी दलों और राज्यों, चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों, की बात सुनी जाए। यदि विशेष बैठक का उद्देश्य "हमारे लोकतंत्र को मजबूत करना" और "सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना" है, जैसा कि आपने पत्र में लिखा है, तो मैं सुझाव दूंगा कि सरकार 29 अप्रैल के बाद किसी भी समय परिसीमन मुद्दे पर चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाए, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन से जोड़ा जा रहा है।
बता दें कि बजट सत्र को बढ़ा दिया गया है। 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिवसीय विशेष बैठक बुलाई गई है। इस दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिलाओं के आरक्षण कानून) में संशोधन लाकर इसे 2029 से लागू करने की प्रक्रिया पूरी करने की उम्मीद है।

संसद का विशेष सत्र और विधानसभा चुनाव

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महिलाओं के आरक्षण के लिए विशेष सत्र बुलाने को चुनावी वक्त में बीजेपी द्वारा “राजनीतिक माइलेज” लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऑल-पार्टी मीटिंग बुलाई जाए। यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब:
• पुडुचेरी, असम और केरल में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव हो चुके हैं।
• पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान है।
• तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में चुनाव हैं। 

स्टालिन की सीधी चेतावनी

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने मंगलवार को प्रस्तावित परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि अगर उनके हितों को ठेस पहुंची या दक्षिणी राज्यों पर इसका असमान प्रभाव पड़ा तो राज्य सरकार व्यापक आंदोलन करेगी। उनकी ये टिप्पणी संसद के विशेष सत्र से पहले आई है, जो 16 अप्रैल से शुरू होने वाला है। इस सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन और संसद में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने वाले प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर चर्चा होगी।
X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन को जबरदस्ती पारित करने का इरादा रखती है। उन्होंने विशेष सत्र के समय पर भी सवाल उठाया। “यह विशेष सत्र चुनाव के बीच में जबरन बुलाया जा रहा है, वो भी तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में।” उन्होंने कहा- “शुरू से ही हम इसके खिलाफ लगातार चेतावनी देते रहे हैं। हमने लोगों में जागरूकता फैलाई है। न केवल तमिलनाडु में, बल्कि पूरे भारत में, हमने प्रभावित होने वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं को एक साथ लाया और चेन्नई में संयुक्त कार्रवाई समिति की बैठक आयोजित की।” 
यह विवाद संसद की कार्यवाही में पारदर्शिता और सहमति की कमी को लेकर विपक्ष की बढ़ती नाराजगी का प्रतीक है। कांग्रेस का तर्क है कि बिल साझा न करना और चुनावी राज्यों में प्रचार के चरम पर सत्र बुलाना लोकतंत्र के खिलाफ है। क्योंकि इसमें विपक्षी दलों से कोई राय नहीं ली गई है।