एससी यानी अनुसूचित जातियों के कल्याण वाले काम में भयंकर लापरवाही बरती जा रही है या फिर जानबूझकर ऐसी योजनाओं पर ख़र्च ही नहीं किया जा रहा है? संसद की एक स्थायी समिति ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समिति ने कहा है कि मंत्रालय ने अनुसूचित जातियों के कल्याण की योजनाओं के लिए मिले पैसे का एक बड़ा हिस्सा वापस लौटा दिया है। यह बात बहुत चिंताजनक है क्योंकि ये पैसे समाज के सबसे गरीब और कमजोर वर्गों के लिए हैं। इतना ही नहीं, बजट जारी होने से पहले संशोधित अनुमान ही क़रीब 30 फीसदी तक कम कर दिया गया था। तो सवाल है कि आख़िर यह क्यों हो रहा है?
संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में एससी विभाग के लिए कुल 10309 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। लेकिन मंत्रालय ने इनमें से 2345 करोड़ रुपये यानी क़रीब 23% मतलब एक चौथाई राशि सरेंडर कर दी। इसका साफ़ मतलब यह है कि यह पैसा योजनाओं पर ख़र्च नहीं किया गया और इसे वापस लौटा दिया गया। समिति ने इसे समझ से परे बताया है।
ताज़ा ख़बरें
समिति ने कहा, 'हम समझ नहीं पा रहे कि गरीबों में सबसे गरीब वर्ग यानी अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) और विनिर्दिष्ट जनजातियों यानी डिनोटिफाइड ट्राइब्स (डीएनटी) के लिए बनी योजनाओं के लिए इतनी बड़ी राशि क्यों वापस लौटानी पड़ी।'

बजट का संशोधित अनुमान 30% कम किया

यह 31 सदस्यीय संसदीय स्थायी समिति सामाजिक न्याय और अधिकारिता पर है। इसकी अध्यक्षता भाजपा सांसद पी.सी. मोहन कर रहे हैं। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार समिति ने मंत्रालय की वित्तीय प्रबंधन पर सख्त टिप्पणी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कई सालों से मंत्रालय को मिले बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट अनुमान यानी बजट एस्टिमेट में राशि बढ़ाई जाती है, लेकिन संशोधित अनुमान यानी रिवाइज्ड एस्टिमेट में इसे क़रीब 30% तक कम कर दिया जाता है। फिर भी बाक़ी बचे पैसे का पूरा इस्तेमाल नहीं होता।
देश से और ख़बरें

दो छात्रवृत्ति योजनाओं पर भी चिंता जताई

समिति ने खासकर दो अहम छात्रवृत्ति योजनाओं पर चिंता जताई है। ये हैं- एससी छात्रों के लिए 'टॉप क्लास एजुकेशन' और ओबीसी, ईबीसी तथा डीएनटी के लिए 'टॉप क्लास स्कूल एंड कॉलेज'। इन योजनाओं में भी 20-25% बजट वापस लौटाया गया। ये योजनाएँ 12वीं के बाद मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए मदद करती हैं।

योजना ठीक नहीं बनी या लागू सही से नहीं हुई?

समिति ने कहा कि इतनी राशि वापस लौटने का मतलब है कि या तो सही से योजना नहीं बनाई गई या फिर लागू करने वाली एजेंसियां ठीक से काम नहीं कर रही हैं।

समिति ने मंत्रालय के उस बहाने को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि राज्य सरकारों से कम प्रस्ताव आए। समिति ने इस तर्क को बिल्कुल नहीं मानने योग्य बताया।

समिति ने साफ़ कहा कि पैसे वापस लौटने का कोई और कारण नहीं हो सकता सिवाय गलत आकलन या खराब क्रियान्वयन के।
सर्वाधिक पढ़ी गयी ख़बरें
समिति ने मंत्रालय से कहा है कि वह अपनी योजनाओं की बेहतर योजना बनाए, क्रियान्वयन को मजबूत करे और पैसे का समय पर सही इस्तेमाल सुनिश्चित करे। क्योंकि ये योजनाएँ समाज के उन लोगों के लिए हैं जो सबसे ज़्यादा ज़रूरतमंद हैं। अगर पैसे वापस लौटते हैं तो इन वर्गों का उत्थान प्रभावित होता है।
यह मामला देश में सामाजिक न्याय की योजनाओं की प्रभावशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। सरकार को अब इन कमियों को जल्दी दूर करना चाहिए ताकि असली लाभार्थी समय पर मदद पा सकें। यदि ऐसा नहीं हुआ तो विपक्ष को यह आरोप लगाने का एक और मौक़ा मिलेगा कि सरकार दलितों और पिछड़ों की जानबूझकर उपेक्षा कर रही है।