प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब लोकसभा में कह रहे थे कि भारत ऊर्जा संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है तो देश भर में कई जगहों से गैस की किल्लत की ख़बरें आ रही थीं। गुजरात से पेट्रोल पंपों पर डीजल-पेट्रोल की कमी की ख़बरें आ रही थीं। हाल ही में ख़बर आई थी कि रसोई गैस नहीं मिलने से मजदूर वापस अपने घर जा रहे हैं और मज़दूरों की कमी से सूरत की टेक्सटाइल यूनिटों को हर हफ़्ते दो दिन बंद करने का फ़ैसला लेना पड़ रहा है। इसके अलावा होटल, रेस्तराँ के बंद होने की ख़बरें क्यों आ रही हैं? गैस के लिए लाइनें क्यों लग रही हैं? तो क्या सच में इस संकट से निपटने की पूरी तैयारी है या फिर वास्तविक स्थिति ख़राब है?
ईरान युद्ध के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट से तेल, गैस नहीं आने की इन्हीं चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश ऊर्जा संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार, तत्पर और संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व है जो संकट के समय काम आएगा। इसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा करने की योजना है। पीएम ने कहा कि ऊर्जा आयात अब 41 देशों से होता है, पहले 27 से था।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले और रुकावट मंजूर नहीं है, भारत कूटनीति से अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि घरेलू एलपीजी सप्लाई बनी रहेगी क्योंकि घरों को प्राथमिकता दी जा रही है।
लेकिन वास्तविक स्थिति काफ़ी अलग दिख रही है। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावी रूप से बंद कर रखा है, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस गुजरता है। भारत का बहुत सारा एलपीजी मध्य पूर्व से आता है और इस रुकावट से सप्लाई प्रभावित हुई है। कच्चे तेल की क़ीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं।

कमर्शियल एलपीजी सप्लाई कम

सरकार ने घरेलू उपयोग को बचाने के लिए कमर्शियल और इंडस्ट्रियल एलपीजी सप्लाई कम कर दी है। इससे कई इलाक़ों में समस्या बढ़ गई है। ख़ासकर गुजरात के सूरत में टेक्सटाइल इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित हुई है। यहां हजारों प्रवासी मजदूर काम करते हैं। एलपीजी की कमी से मजदूरों को खाना बनाना मुश्किल हो गया, क्योंकि उनके पास घरेलू कनेक्शन नहीं होता और वे कमर्शियल गैस पर निर्भर थे।

साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन यानी एसजीटीपीए ने फ़ैसला किया कि यूनिट्स हफ्ते में दो दिन बंद रहेंगी, ताकि उत्पादन कम हो और लागत नियंत्रित रहे।

सूरत में 400 से ज्यादा डाइंग-प्रिंटिंग मिल्स हैं और लाखों पावरलूम यूनिट्स। करीब 8 लाख प्रवासी मजदूर हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 30% मजदूर घर लौट चुके हैं। उधना रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ है, मजदूर बोरिया-बिस्तर लेकर ट्रेनों में घर जा रहे हैं। यह कोविड जैसा पलायन लग रहा है। कई मजदूर खुले में लकड़ी की आग पर खाना पका रहे हैं।

अन्य सेक्टर में भी हालत ख़राब

  • होटल-रेस्तरां: कई जगहों पर 30-35% होटल और रेस्तरां बंद होने की रिपोर्टें हैं। जहाँ खुले हैं वहाँ मेन्यू सीमित है। छोटे ढाबे, स्ट्रीट फूड, बेकरी, लॉन्ड्री, अस्पताल किचन प्रभावित हुए हैं।
  • मोरबी की सिरेमिक-टाइल्स इंडस्ट्री: 450 से ज़्यादा यूनिट बंद या मेंटेनेंस पर हैं। ऑटो कंपोनेंट्स में भी मज़दूरों की कमी से उत्पादन प्रभावित होने का ख़तरा है।
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कांग्रेस ने कहा- संकट बड़ा

कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और संसद में कई सवाल उठाए। इसने कहा कि पीएम के दावे और हकीकत अलग हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि '50% घरों में सिलेंडर की कमी है, ब्लैक में 5 हजार रुपये में मिल रहा है। सरकार घरेलू सिलेंडर का वजन 14.2 किलो से घटाकर 10 किलो करने की तैयारी में है। इंडस्ट्रियल डीजल और प्रीमियम पेट्रोल महंगा हुआ। एयरलाइंस टिकट महंगे हो रहे हैं।' कांग्रेस ने कहा कि पहले ईरान से रुपये में तेल खरीदते थे, अब स्थिति खराब है। विदेश नीति कमजोर होने से संकट आया। राहुल गांधी ने कहा है कि सरकार बहाने बना रही है, लेकिन जनता भुगत रही है।

क्या कांग्रेस के सवालों का जवाब दिया?

पीएम मोदी के भाषण से ठीक पहले कांग्रेस ने सवाल पूछे थे, लेकिन पीएम ने सीधे उनका जवाब नहीं दिया। उन्होंने सामान्य रूप से कहा कि कुछ लोग घबराहट फैला रहे हैं, लेकिन भारत तैयार है। सरकार ने घरेलू उत्पादन 40% बढ़ाया है और कुछ जहाजों को ईरान की मदद से होर्मुज से गुजारा गया है। लेकिन कमर्शियल सेक्टर में अभी भी कमी है और स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
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कांग्रेस और विपक्ष ने पहले से ही ईरान पर यूएस-इसराइल हमलों की निंदा न करने, खामेनेई की मौत पर खामोशी, इसराइल दौरे के समय और भारत के रुख पर सवाल उठाए थे। पीएम मोदी ने अपने भाषण में इन पर सीधे जवाब नहीं दिया, बल्कि संकट के प्रबंधन, एकजुटता और राष्ट्रीय हित पर फोकस किया। इसके बाद कांग्रेस सांसदों ने प्रतिक्रिया दी कि भाषण छिछला था और इसमें ठोस कुछ भी नहीं था। कांग्रेस ने कहा कि सरकार चुप्पी साध रही है और यह पर्याप्त नहीं था। विपक्ष ने इसे 'साइडट्रैक' या 'असफल' बताया, जबकि सरकार समर्थक इसे राष्ट्रीय हित में संतुलित मान रहे हैं।
कुल मिलाकर, चाहे पीएम के दावे रणनीतिक तैयारी पर सही हों या ग़लत, लेकिन मौजूदा एलपीजी संकट से आम आदमी, मजदूर और छोटे व्यवसाय प्रभावित हैं। सरकार घरों को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन उद्योग और प्रवासी मजदूरों पर बोझ पड़ रहा है।