नेता विपक्ष ने शनिवार को दो प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस उन्होंने सुबह की, तब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हुआ था। शाम को उन्होंने दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस प्रधान के इस्तीफे के बाद की। राहुल के तेवर बता रहे हैं कि कांग्रेस छात्रों का मुद्दा जिन्दा रखेगी।
राहुल गांधी की 25 जुलाई की शाम दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस
नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपनी दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों के आंदोलन को कुचलने की कोशिश को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तमाम आरोप लगाए। राहुल गांधी ने शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को छात्रों और भारत के भविष्य की जीत बताया, लेकिन सरकार को चेतावनी दी कि यह विरोध एक बहुत बड़े संकट की सिर्फ़ शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार लोगों को नज़रअंदाज़ करती रही, तो ऐसी ही घटनाएँ "दस गुना बड़े" पैमाने पर हो सकती हैं।
विपक्ष के नेता ने छात्रों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा के लिए सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि शाह ने ही छात्रों के ख़िलाफ़ पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियारों के इस्तेमाल की मंज़ूरी दी थी।
राहुल गांधी ने कहा, "हमारे छात्रों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा के लिए हम सीधे तौर पर अमित शाह को ज़िम्मेदार मानते हैं। उन्होंने ही हमारे छात्रों पर गोली चलाने की मंज़ूरी दी। उन्होंने ही हमारे छात्रों के ख़िलाफ़ पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियारों के इस्तेमाल की मंज़ूरी दी।" उन्होंने आगे कहा, "हमारे लिए यह एक बुनियादी मुद्दा है। हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे कि हमारे ही सुरक्षा बल भारत के भविष्य पर गोली चलाएँ। संसद में यह एक बड़ा मुद्दा होगा।"
राहुल गांधी ने पेलेट गन से घायल युवक को साथ लेकर शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सभी मांगें स्वीकार किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह "बहुत गहरी समस्या की दिशा में एक कदम" है।
राहुल गांधी की दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस
कांग्रेस सांसद और नेता विपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार 25 जुलाई को आइसा के स्टूडेट्स लीडर के साथ बैठक की। इनमें जंतर मंतर पर अनशन करने वाली नेहा बोरा भी शामिल हैं। बैठक के बाद राहुल गांधी ने 10, जनपथ पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। राहुल गांधी ने कहा- छात्रों की मांगें ऐसी हैं जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता। पहली बात: भ्रष्ट और अयोग्य शिक्षा मंत्री को हटाया जाना चाहिए। हमे पता चला है कि मोदी सरकार की कैबिनेट में प्रधान को किसी दूसरे मंत्रालय में भेजने की चर्चा चल रही है। यह भारत के छात्रों को मंज़ूर नहीं है, और यह किसी को भी मंज़ूर नहीं है।
- राहुल गांधी का शनिवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया बयान इन सूचनाओं के बीच आया है कि पीएम मोदी अब धर्मेद्र प्रधान का विभाग बदलने के लिए राज़ी हो गए हैं। आज सीजेपी के साथ दूसरे दिन की बातचीत में यही आफर दिया जाने वाला है। लेकिन उससे पहले राहुल ने नई मांग छात्रों की ओर से रख दी है।
नेता विपक्ष ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वजह यह है कि धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और भारत के बच्चों के साथ जो हुआ, उसके प्रतीक हैं। वे इस देश की सबसे कीमती चीज़ - हमारे छात्रों और उनके भविष्य - की बर्बादी के प्रतीक हैं। धर्मेंद्र प्रधान को हटाया ही जाना चाहिए। बस! दूसरी बात: जिन लोगों ने (आयोजकों और इसे अंजाम देने वालों ने) छात्रों पर हमला किया, उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए और उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि इस पूरे सिस्टम के मुखिया, श्री नरेंद्र मोदी को, छात्रों और इस देश के भविष्य के साथ जो कुछ भी उन्होंने किया है, उसके लिए माफ़ी मांगनी चाहिए।
राहुल के बाद आइसा की छात्र नेता नेहा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- आज राहुल गांधी जी के साथ हमने जो चर्चा की, वह सार्थक रही। देश में शिक्षा व्यवस्था को takeover कर और उसपर चर्चा न करके युवाओं की आकांक्षाओं को ख़त्म किया जा रहा है, लेकिन आज जो बातचीत हुई, वह शानदार रही। हमारे कुछ साथियों ने लचर शिक्षा व्यवस्था को लेकर आज 'बिहार बंद' का ऐलान किया था, लेकिन उससे पहले ही बिहार पुलिस ने उन्हें और बाकी स्टूडेंट्स को हिरासत में ले लिया। छात्रों की जो तीन मांग राहुल गांधी जी ने रखी हैं, वो जायज हैं और उनसे कोई समझौता नहीं हो सकता।
इससे पहले सुबह भी एक ट्वीट के ज़रिए राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जोरदार निशाना साधा। राजधानी दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों की बंदी, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और आवाजाही पर लगाई गई सख्त पाबंदियों को लेकर उन्होंने सरकार पर छात्रों के आंदोलन को दबाने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा: "मेट्रो बंद करो। सड़कें बंद करो। दुकानें बंद करो। इंटरनेट बंद करो। खाना बंद करो। सरकार ने अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों के खिलाफ ये क्रूर कदम उठाए हैं। लेकिन मोदी जी, एक ही चीज है जिसे आप बंद नहीं कर सके- पेपर लीक।"
विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के आरोप
जंतर-मंतर और 'संसद चलो' मार्च: नीट धांधली के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन और हालिया 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक छात्र साहिल का वीडियो साझा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि हाथ में तिरंगा लेकर निष्पक्ष परीक्षा की मांग कर रहे युवाओं पर गोलियां/पेलेट चलाए गए। उन्होंने इसकी तुलना औपनिवेशिक दौर से करते हुए इसे "स्वतंत्र भारत में मोदी सरकार की बर्बरता" करार दिया।प्रदर्शन के दौरान हिंसा और घायलों का आंकड़ा
20 जुलाई को निकाले गए 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई झड़पों में व्यापक स्तर पर हिंसा देखने को मिली थी। इस दौरान झड़पों और पुलिस कार्रवाई में लगभग 60 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए। हालांकि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पथराव का आरोप लगाया। पुलिस ने दावा किया कि उसके कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। अभी भी कई प्रदर्शनकारी जेलों में हैं और कई घायलों का इलाज अस्पतालों में चल रहा है।केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली के कई संवेदनशील इलाकों में कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसकी वजह से स्थानीय लोगों और छात्रों को आवाजाही तथा कम्युनिकशन में बाधा का सामना करना पड़ रहा है।