केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। छात्र सिद्धांत के खुलासे के बाद नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी बोर्ड की डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राहुल ने सार्थक सिद्धांत के आरोपों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं को प्रोफेशनल स्कैनरों के बजाय मोबाइल फोन से स्कैन किया गया, जिसके कारण लाखों छात्रों के नतीजे प्रभावित हुए।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सोमवार 1 जून को कहा कि मई 2025 में जारी CBSE के टेंडर में उत्तर पुस्तिकाओं को ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनरों से स्कैन करने, कॉपियों की बाइंडिंग (स्पाइन) सुरक्षित रखने और न्यूनतम 300 DPI रिजॉल्यूशन की शर्त रखी गई थी। लेकिन अगस्त में दोबारा जारी किए गए टेंडर में इन महत्वपूर्ण तकनीकी शर्तों को हटा दिया गया। छात्र सार्थक सिद्धांत ने रविवार 31 मई को एक्स पर इस बारे में विस्तृत जानकारी दी थी।
आरोप है कि स्कैनिंग संबंधी आवश्यकताओं को जानबूझकर कमजोर किया गया ताकि एक विशेष कंपनी, COEMPT Edu Teck, को फायदा पहुंचाया जा सके। राहुल गांधी ने कहा कि 300 DPI की जगह 200 DPI रिजॉल्यूशन स्वीकार किया गया और “स्कैनर” शब्द को भी सामान्य बना दिया गया, जिसका नतीजा यह हुआ कि उत्तर पुस्तिकाओं की धुंधली प्रतियां, गायब पन्ने और अधूरी स्कैनिंग जैसी समस्याएं सामने आईं।
उन्होंने कहा, “अब यह सामने आ चुका है कि COEMPT ने उत्तर पुस्तिकाओं को मोबाइल फोन से स्कैन किया। धुंधली कॉपियां, गायब पन्ने और बिना स्कैन हुई उत्तर पुस्तिकाएं कोई तकनीकी गलती नहीं, बल्कि उसी कॉन्ट्रैक्ट का अनुमानित परिणाम हैं जिसे एक विशेष कंपनी के अनुरूप तैयार किया गया था। यह धोखाधड़ी है।”

छात्र सार्थक सिद्धांत के खुलासे से मचा कोहराम

इस पूरे मामले को सबसे पहले छात्र सार्थक सिद्धांत (Sarthak Sidhant) ने एक्स पर सार्वजनिक किया। दस्तावेजों के आधार पर की गई उनकी जांच में दावा किया गया कि CBSE ने OSM पोर्टल के लिए अनुबंध देते समय कई तकनीकी और सुरक्षा मानकों में बदलाव किए। सार्थक ने सोशल मीडिया पर साझा की गई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपियों का विश्लेषण करते हुए उनमें ‘ड्रॉप शैडो’ और कई जगह मोड़ (फोल्ड) के निशान देखे। आमतौर पर इस तरह के निशान मोबाइल कैमरे या हैंडहेल्ड डिवाइस से लिए गए फोटो में दिखाई देते हैं, जबकि फ्लैटबेड या ऑटोमैटिक स्कैनरों से स्कैन की गई प्रतियों में ऐसा नहीं होता।
उन्होंने X पर सवाल उठाते हुए लिखा कि यदि कॉपियां वास्तव में स्कैनरों से स्कैन की गई थीं तो उनमें ड्रॉप शैडो और फोल्ड मार्क्स कैसे दिखाई दे रहे हैं।

एथिकल हैकर ने उठाए सुरक्षा संबंधी सवाल

इस खुलासे को और बढ़ाने का काम 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी (Nisarga Adhikary) के दावों ने किया। निसर्ग ने OSM पोर्टल की सुरक्षा में गंभीर खामियां होने का आरोप लगाया और दावा किया कि कुछ सुरक्षा व्यवस्थाओं को दरकिनार कर इंटरनेट पर कोई भी व्यक्ति उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपियों तक पहुंच सकता है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर कथित तौर पर पोर्टल से जुड़ी कुछ तस्वीरें और स्क्रीनशॉट साझा किए, जिनके बाद डेटा सुरक्षा और छात्रों की गोपनीयता को लेकर भी सवाल उठने लगे। बाद में CBSE ने एक संबद्ध पोर्टल में सुरक्षा कमजोरियों की बात स्वीकार की और कहा कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, सरकारी तकनीकी टीमों और IIT विशेषज्ञों की मदद से सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।

OSM प्रणाली को बताया गया था तकनीकी सुधार

CBSE ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की थी। बोर्ड का दावा था कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और मानवीय त्रुटियों से मुक्त होगी।
लेकिन परिणाम घोषित होने के बाद सोशल मीडिया पर छात्रों की शिकायतों की बाढ़ आ गई। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपियां धुंधली थीं, कई पन्ने गायब थे, कुछ उत्तरों की जांच नहीं हुई थी और प्राप्त अंक उनकी शैक्षणिक प्रदर्शन से मेल नहीं खाते थे।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब कक्षा 12 का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत पिछले वर्ष के 88.39 प्रतिशत से घटकर 85.2 प्रतिशत रह गया। साथ ही कंपार्टमेंट मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई। भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित जैसे विषयों में अपेक्षा से कम अंक मिलने की शिकायतें देशभर से सामने आईं।

गलत आंसरशीट अपलोड होने का मामलाः दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव का मामला इस विवाद का सबसे चर्चित उदाहरण बन गया। वेदांत ने दावा किया कि उनके रोल नंबर के सामने जो भौतिकी की उत्तर पुस्तिका अपलोड की गई थी, वह किसी अन्य छात्र की थी।

बाद में CBSE ने इस त्रुटि को स्वीकार किया और सही आंसरशीट उपलब्ध कराई। लेकिन इसके बाद कई अन्य छात्रों ने भी आरोप लगाया कि उन्हें ऐसी आंसरशीट दिखाई गईं जिनकी लिखावट, उत्तर शैली और प्रस्तुति उनकी नहीं थी।

राहुल गांधी ने छात्रों से की मुलाकात

रविवार को राहुल गांधी ने वेदांत श्रीवास्तव और अन्य प्रभावित छात्रों से मुलाकात की। इस दौरान छात्रों ने बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ी का मुद्दा उठाने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर “पाकिस्तानी एजेंट”, “एंटी-नेशनल”, “डीप स्टेट एजेंट” और “सोरस एजेंट” जैसे नामों से ट्रोल किया गया।
राहुल गांधी ने छात्रों को “बहादुर युवा भारतीय” बताते हुए कहा कि उन्होंने केवल अपनी उत्तर पुस्तिकाओं और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, लेकिन उन्हें जवाब देने के बजाय अपमानित किया गया।
उन्होंने X पर साझा वीडियो में तंज कसते हुए लिखा, “मेरे साथी ‘एंटी-नेशनल सोरस एजेंट्स’ के साथ एक खुली बातचीत।” राहुल ने कहा कि छात्रों ने केवल उचित सवाल पूछे, लेकिन उन्हें जवाबों की जगह आरोप और गालियां मिलीं।
वेदांत ने राहुल गांधी को बताया कि जब उन्होंने उत्तर पुस्तिका की कॉपी प्राप्त की तो उसका पहला पन्ना उनकी लिखावट में था, लेकिन अंदर के पन्नों पर किसी और की लिखावट थी। उनके भाई सिद्धांत ने कहा कि मुद्दा उठाने के बाद उन्हें “पाकिस्तानी”, “डीप स्टेट एजेंट” और “सोरस एजेंट” कहा जाने लगा।

CBSE की लीपापोती जारी

बचाव की मुद्रा में होने के बावजूद CBSE ने राहुल गांधी के आरोपों को “तथ्यहीन, भ्रामक और गलत” बताते हुए खारिज कर दिया है। बोर्ड का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन के लिए अनुबंध सरकारी वित्तीय नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार दिया गया था। बोर्ड के अनुसार अगस्त 2025 में केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर निविदा जारी की गई थी और सभी प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद योग्य बोलीदाता को अनुबंध सौंपा गया। हर नए आरोप पर सीबीएसई सबसे पहले खंडन करती है।
राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा ने भी जवाब दिया। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी पर छात्रों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। अमित मालवीय ने कहा कि राहुल गांधी विदेशी ताकतों से संबंधों और अपने राजनीतिक रिकॉर्ड पर जवाब देने के बजाय छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को जवाब और समाधान मिलना चाहिए, न कि राजनीतिक इस्तेमाल। वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि CBSE से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है और सरकार की प्राथमिकता छात्रों को मानसिक तनाव से बचाना है।
बहरहाल, लगातार सामने आ रही शिकायतों, सुरक्षा खामियों और टेंडर प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों ने CBSE की नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर बहस छेड़ दी है। लगभग 18.5 लाख छात्रों को प्रभावित करने वाले इस विवाद ने शिक्षा व्यवस्था, डिजिटल पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेही को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।