CJP छात्र आंदोलन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इंस्टाग्राम पर तेजी से उभरे रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन ने Gen Z की एकजुटता, आरक्षण बहस और सोशल मीडिया की भूमिका पर नए सवाल खड़े कर दिए। आखिर कौन है इसके पीछेः
इंस्टाग्राम पर रिजर्वेशन हटाओ पेज
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के बाद अब सोशल मीडिया पर एक नया अभियान तेज़ी से उभरकर सामने आया है। "रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन" (Reservation Hatao Andolan - RHA) नाम का एक इंस्टाग्राम अभियान दो दिनों में लाखों युवकों तक पहुंच गया है। इस तेज़ी से बढ़ते अभियान ने छात्रों, सामाजिक न्याय के समर्थकों और कई शिक्षाविदों के बीच यह बहस छेड़ दी है कि क्या यह Gen Z की हालिया एकजुटता को तोड़ने और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की संगठित कोशिश है।
दो दिनों में लाखों फॉलोअर्स
CJP के आंदोलन के बाद शुरू हुए इस अभियान से जुड़े इंस्टाग्राम अकाउंट ने शुरुआती दो दिनों में ही करीब 37 लाख (3.7 मिलियन) फॉलोअर्स जुटा लिए। इसके बाद इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई और आज मंगलवार 28 जुलाई को "Reservation Hatao Andolan" के इंस्टाग्राम हैंडल के 55 लाख (5.5 मिलियन) से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। इस अचानक हुई लोकप्रियता ने सोशल मीडिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक न्याय के पक्षधर और कई छात्र संगठनों का कहना है कि यह केवल एक स्वतःस्फूर्त सोशल मीडिया ट्रेंड नहीं, बल्कि आरक्षण के खिलाफ जनमत तैयार करने की एक सुनियोजित मुहिम है। ज़ाहिर सी बात है कि जो लोग आरक्षण के खिलाफ हैं और समय समय पर इसका विरोध करते रहे हैं, वही लोग, वही संगठन इसके पीछे हैं।CJP आंदोलन के बाद बदला विमर्श
देशभर में पिछले कई सप्ताह तक छात्र परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। CJP के नेतृत्व में यह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा और अंततः केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ समाप्त हुआ।
- आंदोलन समाप्त होने के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर आरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उभरने लगा। आलोचकों का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की बहस को पीछे धकेलकर सार्वजनिक विमर्श को आरक्षण बनाम मेरिट की दिशा में मोड़ दिया गया।
BJP समर्थक पोस्टों का रिकॉर्ड
"Reservation Hatao Andolan" इंस्टाग्राम अकाउंट की पुराने पोस्टों की जांच दलित लाइव्स मैटर्स ने की। दलित लाइव्स मैटर्स ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा है कि इस अकाउंट ने पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में कई पोस्ट साझा किए थे।आर्काइव पोस्टों में भाजपा के स्थापना दिवस पर बधाई देने, चुनावों के दौरान भाजपा उम्मीदवारों का समर्थन करने और प्रधानमंत्री मोदी के पक्ष में संदेश प्रकाशित करने जैसे पोस्ट मौजूद हैं। हालांकि हालिया विवाद के दौरान यही अकाउंट पूरी तरह आरक्षण विरोधी सामग्री साझा करने लगा, जिसने बहुत कम समय में लाखों नए फॉलोअर्स आकर्षित कर लिए।
विवाद इस तरह बढ़ाया गया
कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन जब चरम पर पहुंचा तो एक कथित राष्ट्रीय टीवी चैनल पर छात्र हर्ष दुबे ने जाति आधारित आरक्षण समाप्त करने की वकालत की। उनका इंटरव्यू सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और आरक्षण विरोधी समूहों ने उसे बड़े पैमाने पर साझा किया। यह इंटरव्यू सीजेपी आंदोलन के दौरान जानबूझकर प्रायोजित किया गया।
दलित लाइव्स मैटर्स और अन्य आरक्षण समर्थकों ने आरोप लगाया कि टेलीविजन चैनलों ने बहस के केवल एक पक्ष को प्रमुखता दी, जबकि सामाजिक न्याय के पक्ष में आवाज़ों को उचित स्थान नहीं मिला। उस कथित राष्ट्रीय चैनल के बाद कई और चैनलों ने भी इसी तरह आरक्षण के विरोध में छात्रों के इंटरव्यू प्रायोजित किए।
कई शिक्षाविदों, पत्रकारों और आंबेडकरवादी विचारकों ने आरोप लगाया कि आरक्षण पर अचानक शुरू हुई बहस का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग से लोगों का ध्यान हटाना है। इसे जेन ज़ी छात्रों के बीच बनी एकजुटता को तोड़ने की कोशिश बताया गया। इन लोगों ने लिखा कि समानता का विरोध करने वाले युवाओं को "काउंसलिंग" की जरूरत है क्योंकि वे पीढ़ियों से चले आ रहे जातिगत पूर्वाग्रहों को ढो रहे हैं। उनके अनुसार दलितों, आदिवासियों और मुसलमानों के प्रति नफरत समाज के कुछ उच्च जाति के युवाओं के बीच एक राजनीतिक एकजुटता का आधार बनाने की कोशिश लंबे समय से की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. रविकांत कसाना का कहना है कि भाजपा उभर रहे छात्र आंदोलन का मुकाबला करने के लिए आरक्षण विरोधी विमर्श की ओर झुकती दिखाई दे रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी राजनीति शिक्षा सुधारों पर ध्यान देने के बजाय सामाजिक विभाजन को और गहरा कर सकती है।
आरक्षण हटाओ आंदोलनः इंस्टाग्राम पेज प्रोफाइल
- "Reservation Hatao Andolan" का इंस्टाग्राम अकाउंट reservation hatao movement नाम से संचालित हो रहा है। इस अकाउंट पर 100 से अधिक पोस्ट हैं और यह केवल भारतीय सेना के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट को फॉलो करता है।
- प्रोफाइल में खुद को "नागरिकों द्वारा समर्थित आंदोलन" बताया गया है। इसके साथ डॉ. भीमराव आंबेडकर का प्रसिद्ध नारा "Educate, Agitate, Organize" भी लिखा गया है। हिंदी में इसका संदेश है- "सारी जाति एक समान, मेरा बस ये देश महान।"
- अभियान से जुड़े एक पोस्ट में दावा किया गया है कि उसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।
- इस अभियान के संस्थापक या संचालक की पहचान अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है।
अभियान क्या मांग कर रहा है?
इस अभियान की पोस्टों में कहा गया है कि आरक्षण से योग्यता (Merit) प्रभावित होती है, जातीय विभाजन बढ़ता है और प्रतिस्पर्धा कम होने से शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। अभियान का दावा है कि अवसर जाति के बजाय केवल योग्यता के आधार पर मिलना चाहिए।अभियान ने तथाकथित सुधारों का एक रोडमैप भी प्रस्तुत किया है। इसमें कहा गया है कि यदि सरकार वास्तव में जातिगत भेदभाव समाप्त करना चाहती है, तो उसे सार्वजनिक जीवन में जाति की पहचान पूछना और उसे सरकारी प्रक्रियाओं में मान्यता देना बंद कर देना चाहिए।
क्या Gen Z की एकजुटता को चुनौती?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि CJP आंदोलन ने पहली बार बड़ी संख्या में अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि के युवाओं को परीक्षा प्रणाली, शिक्षा सुधार और सरकारी जवाबदेही जैसे साझा मुद्दों पर एक मंच पर खड़ा किया था। ऐसे में आंदोलन समाप्त होने के तुरंत बाद आरक्षण जैसे अत्यधिक संवेदनशील मुद्दे का सोशल मीडिया पर केंद्र में आ जाना इस बहस को जन्म दे रहा है कि क्या इससे युवाओं की वह एकजुटता कमजोर होगी, जो शिक्षा और रोजगार के साझा सवालों पर बनी थी।हालांकि आरक्षण हटाओ आंदोलन अपने को गैर-राजनीतिक नागरिक अभियान बताता है, लेकिन उसके पुराने सोशल मीडिया रिकॉर्ड, भाजपा समर्थक पोस्ट और आंदोलन की अचानक मिली व्यापक लोकप्रियता को लेकर बहस जारी है। दूसरी ओर, अभियान के समर्थकों का कहना है कि वे केवल "मेरिट आधारित व्यवस्था" की मांग उठा रहे हैं और इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
इस पूरे विवाद के बीच इतना स्पष्ट है कि CJP आंदोलन के बाद सोशल मीडिया पर अब शिक्षा सुधार की बहस के समानांतर आरक्षण का प्रश्न केंद्र में आ गया है। यही वजह है कि इसे लेकर राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना जताई जा रही है।